अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान में गड़बड़ी को लेकर पहली बार गुरुवार को आधिकारिक तौर पर FIR दर्ज की गई है. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर यह शिकायत दर्ज की गई है. इस मामले में 8 लोगों को नामजद किया गया है, जबकि कुछ अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है. SIT अब आरोपियों की संपत्तियों, बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की गहन जांच कर रही है.
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शिकायत के बाद बनी SIT, रिपोर्ट के आधार पर हुई कार्रवाई
राम मंदिर में नकद चढ़ावे की सुरक्षा और गिनती में अनियमितता की शिकायत मिलने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था. जांच पूरी होने के बाद SIT प्रमुख और लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत ने अपनी प्रांरभिक रिपोर्ट सरकार को सौंपी. रिपोर्ट में आपराधिक कार्रवाई की सिफारिश की गई, जिसके बाद अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि थाने में मामला दर्ज किया गया. FIR में आरोप है कि मंदिर में आने वाले करोड़ों रुपये के नकद चढ़ावे की सुरक्षा, परिवहन और गिनती की प्रक्रिया के दौरान कथित हेराफेरी की गई.
8 नामजद आरोपियों की कुडंली..उन पर क्या आरोप है?
1. रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू का क्या काम था?
रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का करीबी माना जाता है. मंदिर में वह व्यवस्थापक के रूप में कार्यरत था. श्रद्धालुओं की सुविधाओं, दर्शन व्यवस्था और दानपात्रों की निगरानी उसकी जिम्मेदारी थी. वह दानपात्रों को बेसमेंट तक सुरक्षित पहुंचाने का काम भी देखता था. जांच में उस पर चढ़ावे की रकम में कथित गड़बड़ी करने का आरोप लगाया गया है.
2. सुभाष चंद्र श्रीवास्तव की क्या जिम्मेदारी थी?
एसबीआई के रिटायर्ड कर्मचारी सुभाष चंद्र श्रीवास्तव राम मंदिर में कैश काउंटिंग सेंटर के प्रभारी थे. मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गिनती की पूरी व्यवस्था और वहां तैनात कर्मचारियों की निगरानी उनके जिम्मे थी. एफआईआर में उन पर गिनती की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और लापरवाही के आरोप लगाए गए हैं.
3. करुणेश पांडेय का क्या रोल था?
राम मंदिर चढ़ावा मामले में गिरफ्तार करुणेश पांडेय की जिम्मेदारी मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई दानराशि को सुरक्षित तरीके से गणना कक्ष तक पहुंचाने की थी. इसके अलावा वह नकदी की गिनती की प्रक्रिया में भी शामिल था. जांच एजेंसियों का आरोप है कि करुणेश ने चढ़ावे की रकम में कथित हेराफेरी कर उससे संपत्ति बनाई.
4. लवकुश मिश्रा क्या करता था?
लवकुश मिश्रा मंदिर में चढ़ावे की नकदी गिनने वाली टीम का सदस्य था. उसकी जिम्मेदारी दानपात्रों से आई रकम की गिनती करना थी. जांच के दौरान उसके घर से करीब 10 लाख रुपये नकद मिलने का दावा किया गया है. एजेंसियां इस रकम के स्रोत की जांच कर रही हैं.
5. अनुकल्प मिश्रा का क्या रोल था?
अनुकल्प मिश्रा भी कैश काउंटिंग टीम में शामिल था और करीब दो वर्षों से चढ़ावे की रकम गिनने का काम कर रहा था. वह श्रद्धालुओं के सुविधा केंद्र में तैनात था, लेकिन गिनती की प्रक्रिया में भी शामिल रहता था. जांच एजेंसियों ने उस पर चढ़ावे से जुड़े वाउचर में कथित गड़बड़ी करने का आरोप लगाया है. वह रिश्ते में लवकुश मिश्रा का साला बताया जाता है.
6. मनीष यादव की क्या जिम्मेदारी थी?
मनीष यादव भी कैश काउंटिंग प्रक्रिया का हिस्सा था. उसका काम चढ़ावे में आए नकली नोटों की पहचान कर उन्हें अलग करना और नकदी की गिनती में सहयोग देना था. जांच एजेंसियों ने उस पर भी चढ़ावे की रकम में कथित हेराफेरी का आरोप लगाया है.
7. अविनाश शुक्ला का क्या रोल था?
अविनाश शुक्ला की जिम्मेदारी दानपात्रों से निकाली गई नकदी को सुरक्षित तरीके से गणना कक्ष तक पहुंचाने की थी. इसके बाद वह कैश काउंटिंग टीम के साथ गिनती की प्रक्रिया में भी शामिल रहता था. जांच एजेंसियों का आरोप है कि उसने चढ़ावे की राशि के कथित दुरुपयोग में भूमिका निभाई.
8. रमाशंकर मिश्र: रामशंकर मिश्रा मंदिर की कैश काउंटिंग व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों में शामिल थे. इन पर भी दान राशि के कथित गबन और साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया गया है.
अन्य अज्ञात आरोपी भी जांच में
एफआईआर में सिर्फ नामजद आरोपियों का ही उल्लेख नहीं है. कुछ अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है. जांच के दौरान यदि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
कौन हैं कृष्ण मोहन, जिसने दर्ज कराई शिकायत?
इस पूरे मामले में एफआईआर दर्ज कराने वाले शिकायतकर्ता कृष्ण मोहन हैं, जो श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य हैं. कृष्ण मोहन भारतीय वन सेवा (IFS) के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी हैं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से लंबे समय से जुड़े हुए हैं. उन्हें साल 2025 में ट्रस्टी कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद इस ट्रस्ट में शामिल किया गया था.
FIR में लगी हैं ये गंभीर धाराएं
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत बेहद सख्त धाराएं लगाई हैं, इनमें..
धारा 305 व 306 BNS: पूजा स्थल और कर्मचारी द्वारा चोरी.
धारा 316(5) BNS: भरोसे की संपत्ति का आपराधिक दुरुपयोग.
धारा 317(4) व 317(5) BNS: चोरी की संपत्ति रखना और उसे छिपाना.
धारा 61 और 3(5) BNS: आपराधिक साजिश और सामूहिक अपराध.
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (धारा 13(1)(a)): पद का दुरुपयोग कर भ्रष्टाचार करना.
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