पिछले 72 घंटे से नोएडा की गलगोटिया यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नेहा सिंह वायरल हो रखी हैं. लोग गुस्सा निकाल रहे हैं, मजाक उड़ा रहे हैं, मीम बना रहे हैं. विवाद से परे कहानी एक ऐसे प्रोफेशनल की है जिसने कम्युनिकेशन-पीआर की दुनिया में मेहनत से पहचान बनाई. प्रोफेशनल कमिटमेंट के तरह अपनी ऑर्गनाइजेशन की ब्रैंडिंग करते हुए जान बूझकर या गलती से कुछ ऐसा बोल गई कि सरकार भी चिढ़ गई, ऑर्गनाइजेशन भी अनअथॉराइज्ड करार दिया गया. अब पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ की वाट लगी है.
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विवादों के कारण नेशनल सेंशेशन बनी प्रोफेसर नेहा सिंह आखिर हैं कौन? क्या वो सचमुच एक फ्रॉड प्रोफेसर हैं या फिर अपने ही ऑर्गनाइजेशन के फर्जी एंबिशन और कैमरे के सामने आने के ग्लैमर रोग की शिकार हो गईं? आइए जानते हैं देश में इस समय सबसे चर्चित चेहरा कैमरे के पीछे की प्रोफेसेर नेहा सिंह को.
इंटेशनली फेल हुई या एक्सीडेंटली फंस गई
प्रोफेसर नेहा सिंह रातों-रात चर्चा में आईं. उनकी असल प्रोफाइल साइंटिस्ट की नहीं बल्कि कम्युनिकेटर की है. उसी में इंटेशनली फेल हुई या एक्सीडेंटली फंस गई. प्रोफेसर नेहा सिंह गलगोटिया यूनिवर्सिटी में Head of Department Strategic Communications and PR और असिस्टेंट प्रोफेसर हैं. उन्होंने मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म में पढ़ाई की है. उनके पास इंजीनियरिंग या एआई की है.
कांड की विलेन ठहराई जा रही हैं.
नेहा सिंह ने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से MBA फर्स्ट ग्रेड से और इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से B.Com फर्स्ट ग्रेड से किया. कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन और पब्लिक रिलेशंस (PR) का अच्छा-खासा अनुभव ही उन्हें नोएडा की प्राइवेट गलगोटिया यूनिवर्सिटी में लाया. प्रोफेसर नेहा सिंह की लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक उन्होंने नवंबर 2023 में गलगोटिया यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर बनकर ज्वाइन किया था. उससे पहले नोएडा की ही शारदा यूनिवर्सिटी और GITAM यूनिवर्सिटी में काम कर चुकी हैं. सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर भी हैं नेहा सिंह. अपनी प्रोफेशनल लाइफ के अलावा इंस्टाग्राम पर काफी एक्टिव रहती हैं और मोटिवेशनल व लाइफस्टाइल कंटेंट शेयर करती हैं.
भारत मंडपम से शुरू हुआ मामला
मौका था 'इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026' का. देश-विदेश के दिग्गज जुटे थे. तभी कैमरों की लाइटें मुड़ी एक चार पैरों वाले रोबोटिक कुत्ते की तरफ जिसे नाम दिया गया था ओरियन. नेहा सिंह एआई समिट में गलगोटिया यूनिवर्सिटी की ओर से प्रोफेसर रिप्रजेंटेटिव थीं. उनके ही इंटरव्यू के एक क्लिप ने भारत में हो रहे एआई समिट को दुनिया में वायरल कर दिया. वायरल वीडियो की क्लिप में नेहा सिंह बड़े जोश के साथ रोबोट दिखा रही हैं. कह रही हैं-मिलिए ओरियन से! इसे गलगोटिया यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने तैयार किया है. ये हमारे कैंपस में घूमता है, सुरक्षा करता है और ये हमारी 350 करोड़ की AI पहल का हिस्सा है. बस उसी से आग लग गई इंटरनेट पर.
वायरल होने लगा नेहा सिंह का इंटरव्यू
नेहा सिंह का इंटरव्यू इंटरनेट पर आग की तरह फैल गया. जैसे ही वीडियो वायरल हुआ, भारत से लेकर चीन तक लोगों ने वो देख लिया जो नेहा सिंह छुपाना चाहती थीं या उन्हें बताने के लिए नहीं कहा गया था. इंटरनेट के जासूसों ने एक पल में पर्दाफाश कर दिया. जिसे नेहा सिंह गलगोटिया का आविष्कार कह रही थीं वो दरअसल चीन की कंपनी Unitree का 'Go2' मॉडल था. जो ऑनलाइन किसी भी शॉपिंग साइट पर मिल जाता है. तब से शुरू है मोदी सरकार, गलगोटिया यूनिवर्सिटी और प्रोफेसर नेहा सिंह की सोशल मीडिया में धुलाई-खिंचाई ट्रोलिंग. सबसे ज्यादा निशाने पर है नेहा सिंह का चेहरा.
नेहा सिंह ने शायद गलती ये कि विवाद फूटने के बाद भी कैमरे पर इंटरव्यू और अपना ज्ञान बांटती रहीं. वो सारे बयान बैकफायर करते रहे. पहला दावा रोबोटिक डॉग ओरियन की तरफ इशारा करते हुए किया कि दिस इज आवर क्रिएशन यानी ये हमारा आविष्कार है. फिर पलट गईं ऐसा कभी नहीं कहा. सबसे बड़ा बैकफायर करने वाला बयान 6 और 9 का तर्क जो उन्होंने मीडिया को उसकी जिम्मेदारी समझाते हुए दे डाली.
जब सोशल मीडिया पर पोल खुली तो नेहा सिंह ने कहा-आपका देखने का नजरिया 6 हो सकता है, मेरा 9 हो सकता है. इस दार्शनिक तर्क ने आग में घी का काम किया और नेटिजन्स ने इसे उनके और गलगोटिया की झूठ छुपाने की नाकाम कोशिश करार दिया. जम्मू कश्मीर सीएम उमर अब्दुल्ला को तो ये इतना अच्छा लगा कि उन्होंने मजे लेते हुए कहा आगे वो इसे इस्तेमाल करेंगे.
देश की क्रेडिबिलिटी
विवाद बढ़ा तो सवाल देश और सरकार की क्रेडिटिबिली तक पहुंच गया. सरकार ने गलगोटिया यूनिवर्सिटी को एकदम एआई समिट से बाहर जाने के लिए कह दिया. फौरन बाहर धकेलने के लिए स्टॉल की बिजली तक काट दी. गलगोटिया यूनिवर्सिटी के लिए ये सब किसी धमाके से कम नहीं था. ब्रैंड, रेपुटेशन सब धुआं-धुआं हो गया.
एक और धमाका तब हुआ जब यूनिवर्सिटी ने अचानक अपने हाथ खड़े कर दिए. सारा दोष अपनी प्रोफेसर पर मढ़ दिया. गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने कहा कि कैमरे के सामने आईं नेहा सिंह ill-informed थीं. उन्हें प्रेस से बात करने का अधिकार नहीं था. माफीनामे में दावा किया गया कि नेहा सिंह ने कैमरे के उत्साह में आकर तथ्यों को गलत तरीके से पेश कर दिया. यूनिवर्सिटी ने कमजोर का तर्क दिया कि रोबोट चीन की कंपनी से छात्रों को सिखाने के लिए खरीदा गया था उसे अपना आविष्कार बताने का इरादा नहीं था.
अनऑथराइज्ड बताया गया
नेहा सिंह, जो कल तक गलगोटिया यूनिवर्सिटी का चेहरा थीं, आज उनके लिए अनअथॉराइज्ड बन गईं. नेहा सिंह एकदम अकेली पड़ चुकी हैं. हालांकि सोशल मीडिया पर एक सेक्शन नेहा सिंह के बचाव में तैनात है. कहा जा रहा है कि गलगोटिया ने अपनी गलती छिपाने के लिए नेहा सिंह को कसूरवार ठहरा दिया. चीन का मॉडल तो नेहा सिंह ने खरीदा नहीं होगा. स्टॉल पर सजाकर अपना बताने का फैसला भी नेहा सिंह का नहीं होगा. अगर नेहा सिंह ने गलत बोला भी तो सवाल ये है कि एआई समिट में अपना इनोवेशन लाना था, चीन से खरीदकर दिखाने के लिए थोड़े न समिट हो रहा था. रोबो डॉग के बाद ये थर्माकोल का ड्रोन भी गवाही दे रहा है कि कांड नेहा सिंह ने नहीं, गलगोटिया का किया धरा है जिसमें सरकार और देश की नाक कटी.
लोगों का सवाल ये भी कि क्या एक प्रोफेसर अपनी ऑर्गनाइजेशन के कंसेंट के बिना इतना बड़ा दावा कर सकती है? या फिर पकड़े जाने पर सारा दोष एक पर मढ़ देना आसान रास्ता है? सब कुछ अपने सिर पर आ गया तो नेहा सिंह ने चुप नहीं ठीक नहीं समझा. उन्होंने अपनी यूनिवर्सिटी को ही रगड़कर अपना बदला चुका लिया. भले इसकी भी कीमत उन्हें चुकानी पड़ेगी.
इस हंगामे के बीच प्रोफेसर नेहा सिंह के LinkedIn प्रोफाइल पर Open to Work का स्टेटस नोटिस किया गया. जिसका सीधा मतलब है कि वो अब नई नौकरी की तलाश में हैं, गलगोटिया की नौकरी जा चुकी है. कोई कन्फर्मेशन नहीं कि ये स्टेट्स विवाद के दौरान लगा या पहले से लगा हुआ था. नौकरी के दौरान भी LinkedIn प्रोफाइल पर Open to Work का टैग लगाए रखते हैं.
गलगोटिया यूनिवर्सिटी से कहीं बड़ी, कहीं ताकतवर बिजनेस हाउस है. वो तो शायद रिकवरी कर भी ले. नेहा सिंह आज उस दोराहे पर खड़ी हैं जहां एक तरफ उनका करियर है और दूसरी तरफ वो वायरल कलंक वाला टैग जो शायद उनका पीछा कभी नहीं छोड़ेगा.
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