उत्तर प्रदेश के बागपत के बड़ौत कोतवाली क्षेत्र में इस वक्त दहशत फैल गई जब मंगलवार शाम करीब 6 बजे दो बदमाशों ने अंधाधुंध फायरिंग की. NH- 709B पर स्थित बस स्टैंड पुलिस स्टेशन के पास हुए हमले में टेंट व्यवसायी सोहनलाल अग्रवाल और उनके बेटे विकास अग्रवाल की मौत हो गई. वहीं वारदात को अंजाम देकर भाग रहे मुख्य आरोपी हिस्ट्रीशीटर वरुण लुहार को गुस्साई भीड़ ने मौके पर घेर लिया और फिर जमकर पिटाई की. इसी बीच किसी शख्स ने उसे गोली मार दी, जिसके बाद इलाज के दौरान आज उसकी मौत हो गई है. अब उसकी मौत के बाद पूरी कहानी सामने आई कि आखिर यह विवाद कैसे शुरू हुआ. विस्तार से जानिए कौन हैं हिस्ट्रीशीटर वरुण लुहारी और मामले की पूरी कहानी.
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पिता को बचाने में बेटे की मौत
मिली जानकारी के मुताबिक, रोज की तरह मार्केट में हलचल थी. सोहनलाल अपनी दुकान पर बैठे हुए थे और किसी काम में लगे हुए थे. इसी दौरान हिस्ट्रीशीटर वरुण लुहारी अपने एक साथ के साथ मोटरसाइकिल से वहां पहुंचा. उसने पहुंचते ही सोहनलाल पर बंदूक तान दी और उस पर फायरिंग शुरू कर दी. गोली की आवाज सुनते ही वहां हड़कंप मच गया और लोग अपनी जान बचाने के लिए भागने लगे. लेकिन सोहनलाल की स्थिति देखकर उनका बेटा विकास उनके पास जा रहा था, तभी वरुण ने उसे भी गोली मार दी. गोली लगते ही दोनों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया. इस गोलीबारी में एक राहगीर को भी गोली लगी, जो कि गंभीर रूप से घायल है.
गुस्साई भीड़ ने वरुण को पीटा, गोली भी मारी
इस मामले से जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. वायरल हो रहे इस वीडियो में साफतौर पर देखा जा सकता है कि वारदात से गुस्साई भीड़ ने वरुण लुहारी को घेर लिया और फिर उसे लाठी-डंडे, लात-घूंसों से पीट रही है. इसी बीच एक शख्स ने वरुण पर गोली भी चला दी. हालांकि घायल हालात में वरुण को अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन आज वहां उसकी भी मौत हो गई.
कौन है वरुण?
अब हिस्ट्रीशीटर वरुण लुहारी के मारे जाने के बाद उसे लेकर पूरी जानकारी सामने है. वरुण बागपत जिल के ही लुहारी गांव का रहने वाला था. वह बेहद सामान्य परिवार से ताल्लुक रखता है. उसके पिता बाबूराम एक रिटायर्ड टीचर है और फिलहाल उसका पूरा परिवार बडौत शहर की नवयुग कॉलोनी में रहता था.
वरुण और सोहनलाल के बीच रंजिश की कहानी
मिली जानकारी के मुताबिक यह रंजिश आज की नहीं बल्कि 10 साल पुरानी है. 17 जुलाई 2015 को इस रंजिश की शुरुआत हुई थी. दरअसल तब दिल्ली बस स्टैंड पर वरुण लुहारी अपने साथियों के साथ बैठकर शराब पी रहा था. इसी बीच वह सोहनलाल के दुकान पर गया और सामान मांगने लगा. जब सोहनलाल ने पैसे मांगे तो वरुण के पास पैसे नहीं थे और तभी इस विवाद ने जन्म लिया.
सोहनलाल की दुकान पर जमकर विवाद और इस दौरान वरुण के भाई की मौत हो गई. भाई की मौत से वरुण को गहरा सदमा लगा और उसने बदला लेने की ठान ली. वरुण ने इस विवाद के बाद जुर्म की दुनिया में कदम रखा और कई आपराधिक वारदातों को अंजाम दिया. पुलिस ने उसके ऊपर गैंगस्टर कार्रवाई भी की और साल 2023 में उसके घर कुर्की-जब्ती भी किया गया था. इसके बाद पूरा परिवार हरिद्वार चला गया और वहीं रहने लगा. वरुण के निशाने पर व्यापारी वर्ग पहले से ही था और साल 2019 में उसने जेल से ही एक व्यापारी से 20 लाख की रंगदारी मांगी थी और तब मामला सुर्खियों में रहा था.
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