उत्तर प्रदेश के चर्चित आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही एक बार फिर अपनी कार्यशैली और कड़े फैसलों को लेकर सुर्खियों में हैं. रिंकू सिंह ने हाल ही में अपने पद से 'तकनीकी त्यागपत्र' (Technical Resignation) देकर सबको चौंका दिया है. उनके इस कदम के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि शायद वह राजनीति में कदम रखेंगे, लेकिन अब उन्होंने खुद इन तमाम चर्चाओं पर विराम लगा दिया है.
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क्यों छोड़ रहे हैं आईएएस का पद?
रिंकू सिंह राही का कहना है कि उन्होंने यह फैसला किसी दबाव में नहीं, बल्कि अपने सिद्धांतों के लिए लिया है. उन्होंने बताया कि आईएएस अधिकारी बनने के बाद उन्हें पर्याप्त काम नहीं मिल रहा था. उनका मानना है कि जिस पद पर रहकर वह जनता की सेवा न कर सकें, उस पर बने रहने का कोई मतलब नहीं है. रिंकू सिंह ने स्पष्ट कहा, "हमें मिलने वाली सैलरी जनता के टैक्स का पैसा है. जब हम उनके लिए काम ही नहीं कर पा रहे, तो वेतन लेना गलत है."
राजनीति नहीं, सेवा है लक्ष्य
भविष्य की योजनाओं पर बात करते हुए उन्होंने साफ कर दिया कि उनका राजनीति में जाने का कोई इरादा नहीं है. उनका एकमात्र उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था के भीतर रहकर लोगों की मदद करना है. रिंकू सिंह ने कहा कि वह ऐसे पद पर काम करना चाहते हैं जहां वह सीधे जनता से जुड़ सकें और सरकारी योजनाओं का लाभ उन तक पहुंचा सकें.
क्या है 'तकनीकी त्यागपत्र' का गणित?
रिंकू सिंह ने पूरी तरह इस्तीफा देने के बजाय 'तकनीकी त्यागपत्र' का विकल्प चुना है. नियम के मुताबिक, लीन पीरियड (Lean Period) के दौरान कोई भी अधिकारी तीन साल के भीतर अपनी पुरानी सेवा में वापस लौट सकता है. रिंकू सिंह अब आईएएस छोड़कर अपनी पुरानी पीसीएस (PCS) सेवा में वापस जाना चाहते हैं, ताकि वह जमीनी स्तर पर सक्रिय रहकर काम कर सकें.
पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर
रिंकू सिंह राही हमेशा से ही सिस्टम में पारदर्शिता के पक्षधर रहे हैं. उनका कहना है कि जनता को यह पता होना चाहिए कि बजट कहां और कैसे खर्च हो रहा है. उन्होंने पहले भी 'नो वर्क, नो पे' का मुद्दा उठाया था, जो काफी चर्चा में रहा था. फिलहाल उनका आवेदन सरकार के पास है और अंतिम फैसले का इंतजार किया जा रहा है.
कौन है रिंकू सिंह
रिंकू सिंह राही उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के रहने वाले हैं. उनका जन्म 20 मई 1982 को एक साधारण परिवार में हुआ था. उनके पिता आटा चक्की चलाकर घर का खर्च संभालते थे. शुरुआती पढ़ाई उन्होंने सरकारी स्कूल से पूरी की. 12वीं कक्षा में अच्छे अंक आने पर उन्हें छात्रवृत्ति भी मिली, जिससे आगे की पढ़ाई में मदद मिली.
इसके बाद उन्होंने टाटा इंस्टीट्यूट से बीटेक की डिग्री हासिल की. रिंकू सिंह राही दलित समुदाय से आते हैं और उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर यह मुकाम हासिल किया. साल 2004 में उन्होंने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPCS) की परीक्षा पास की और 2008 में जिला समाज कल्याण अधिकारी के पद पर नियुक्त हुए.
नौकरी के साथ-साथ उन्होंने यूपीएससी की तैयारी जारी रखी. लंबे प्रयास के बाद वर्ष 2021 में उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा पास की, जिसमें उनकी 683वीं रैंक आई. इसके बाद वे 2022 बैच के आईएएस अधिकारी बने. खास बात यह है कि रिंकू सिंह ने यह मुकाम दिव्यांग कोटे से हासिल किया है.
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