उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर बढ़ते विवाद के बीच प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है. उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने पूरे प्रदेश में पुराने मीटर हटाकर नए स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगा दी है. यह रोक तब तक जारी रहेगी, जब तक तकनीकी कमेटी अपनी रिपोर्ट नहीं सौंप देती.
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क्यों लिया गया यह फैसला
पिछले कुछ हफ्तों में प्रदेश के कई जिलों से स्मार्ट मीटर को लेकर शिकायतें सामने आ रही थीं. उपभोक्ताओं का कहना था कि उनकी सहमति के बिना पुराने मीटर हटाकर प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं. कई जगहों पर लोगों ने इसे जबरन कार्रवाई बताते हुए विरोध प्रदर्शन भी किया. इसी बढ़ते असंतोष के कारण यह फैसला लिया गया.
चेयरमैन ने जारी किए सख्त निर्देश
पावर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष गोयल ने सभी डिस्कॉम कंपनियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अगली सूचना तक स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पूरी तरह रोक दी जाए. इसका मतलब है कि फिलहाल किसी भी पुराने मीटर को हटाकर नया स्मार्ट मीटर नहीं लगाया जाएगा.
तकनीकी कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार
राज्य सरकार ने 12 अप्रैल को एक तकनीकी कमेटी का गठन किया था. इस कमेटी को स्मार्ट मीटर से जुड़ी तकनीकी समस्याओं, शिकायतों और उपभोक्ताओं के अनुभवों की जांच करने की जिम्मेदारी दी गई है. अब आगे की रणनीति इसी रिपोर्ट के आधार पर तय की जाएगी.
लाखों मीटर पहले ही लग चुके
प्रदेश में अब तक करीब 78 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं. इनमें लगभग 70.50 लाख प्रीपेड स्मार्ट मीटर शामिल हैं. हालांकि, मौजूदा आदेश के तहत पुराने मीटर बदलने की प्रक्रिया रोक दी गई है, लेकिन जो मीटर पहले से लगे हैं, वे फिलहाल वैसे ही रहेंगे.
नए कनेक्शन पर लागू रहेगा स्मार्ट मीटर नियम
बिजली विभाग ने साफ किया है कि नए बिजली कनेक्शन स्मार्ट प्रीपेड मीटर के जरिए ही दिए जाएंगे. यानी जिन लोगों ने नए कनेक्शन के लिए आवेदन किया है, उन्हें स्मार्ट मीटर के साथ ही बिजली मिलेगी. लेकिन पुराने मीटर बदलने की कार्रवाई फिलहाल बंद रहेगी.
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