संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़ा महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक गिर गया है. शुक्रवार, 17 अप्रैल को हुई वोटिंग के दौरान सरकार दो-तिहाई बहुमत का जादुई आंकड़ा नहीं जुटा पाई, जिसके बाद समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर करारा हमला बोला है.
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"कोशिश में कमी रह गई" - अखिलेश यादव
संसद परिसर में मीडिया से मुखातिब होते हुए अखिलेश यादव ने तंजिया लहजे में कहा, "लगता है गाड़ी थमी रह गई, कोशिश में कुछ कमी रह गई होगी." उन्होंने स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी महिला आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन सरकार ने जो बिल पेश किया उसमें महिलाओं के हक और अधिकारों के हरण की कोशिश की गई थी.
अखिलेश यादव ने आगे कहा, "विपक्ष ने एक ऐसी लक्ष्मण रेखा खींची थी जिसे बीजेपी पार नहीं कर पाई. हम चाहते हैं कि महिलाओं को सुरक्षा, सम्मान और लोकतंत्र में उचित स्थान मिले, लेकिन बीजेपी की नीयत साफ नहीं थी."
आंकड़ों में क्यों फेल हुआ बिल?
लोकसभा में वोटिंग के दौरान जो गणित रहा, वह सरकार के पक्ष में नहीं गया:
- कुल मतदान करने वाले सांसद: 528
- बिल पास होने के लिए जरूरी बहुमत (2/3): 352 वोट
- पक्ष में पड़े वोट: 298
- विपक्ष में पड़े वोट: 230
- कमी: सरकार को बहुमत के आंकड़े से करीब 54 वोट कम मिले, जिसके कारण विधेयक पारित नहीं हो सका.
सीएम योगी का पलटवार: "लोकतंत्र का काला अध्याय"
बिल गिरने पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्षी दलों पर तीखा प्रहार किया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर लिखा कि आज का दिन लोकतंत्र के इतिहास में एक 'काला अध्याय' है. सीएम योगी ने कहा, "विपक्ष ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को रोककर भारत माता के सम्मान पर आघात किया है. कांग्रेस और इंडी गठबंधन ने अपनी नारी विरोधी मानसिकता दिखा दी है. देश की मातृशक्ति इस धोखे का जवाब समय आने पर जरूर देगी."
सियासत गरमाई
एक तरफ अखिलेश यादव इसे बीजेपी की विफलता और विपक्ष की मजबूती बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी इसे विपक्ष द्वारा महिलाओं के अधिकारों का हरण करार दे रही है. बिल गिरने के बाद अब महिला आरक्षण का मुद्दा 2026 की राजनीति का केंद्र बनता नजर आ रहा है.
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