उत्तराखंड: 1 दिसंबर से आदि कैलाश और ओम पर्वत यात्रा होगी बंद, सामने आई ये वजह

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में बढ़ रही ठंड के बाद प्रशासन ने 1 दिसंबर से आदि कैलाश और ओम पर्वत यात्रा को बंद करने का फैसला लिया है. BRO और स्थानीय सूत्रों ने बताया कि यहां ठंड के कारण झीलें जमने लगी हैं और सड़कों पर बर्फ की परत जम गई है. इससे यहां पहुंचना और भी मुश्किल हो गया है.

Inner Line Permits for Adi Kailash and Om Parvat will be discontinued from December 1.
आदि कैलाश और ओम पर्वत के लिए एक दिसंबर से इनर लाइन परमिट बनाने होंगे बंद

न्यूज तक डेस्क

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Adi Kailash Yatra Update: उत्तराखंड के बॉर्डर जिले पिथौरागढ़ में आयोजित की जाने वाली आदि कैलाश और ओम पर्वत यात्रा को 1 दिसंबर से बंद किया जा रहा है. इस बारे में जानकारी देते हुए धारचूला के एसडीएम जितेंद्र वर्मा ने बताया कि मौसम में बढ़ते हुए ठंड को देखते हुए ये फैसला लिया गया है. उन्होंने कहा कि 1 दिसंबर से यात्रा के दौरान मिलने वाले इनर लाइन परमिट को बंद कर दिए जाएगा. वर्मा ने बताया कि इसे लेकर एक आधिकारिक आदेश भी जारी कर दिया गया है.

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आपको बता दें कि बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन यानी BRO और अन्य सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, आदि कैलाश के आसपास बर्फबारी के चलते झीलें का जमना शुरू हो गया है. इसके अलावा सड़कों पर भी बर्फ जमने के कारण इलाके में आना-जाना काफी मुश्किल हो गया है. यही वजह है कि प्रशासन ने ऐेसा फैसला लिया.

निचली घाटियों की तरफ जाने लगे हैं गांववाले

जितेंद्र वर्मा ने बताया कि आदि कैलाश इलाके में होस्ट गांववाले भी अब ठंड बढ़ने की वजह से धीरे-धीरे निचली घाटियों की ओर जाने लगे हैं. साथ ही उन्होंने कहा अब तीर्थयात्रा की ILP यानी इनर लाइन परमिट के आवेदनों की संख्या भी बहुत कम हो गई है. बता दें कि पिछले साल ILP को 15 नवंबर को ही रोक दिया था.

प्रधानमंत्री मोदी के दौरे के बाद बढ़ी संख्या

गौरतलब है कि आदि कैलाश की तीर्थयात्रा 1981 में कैलाश मानसरोवर यात्रा के दोबारा शुरू होने के साथ ही शुरू हुई थी. हालांकि, साल 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के बाद इस यात्रा को जबरदस्त बढ़ावा मिला. एसडीएम वर्मा ने बताया कि प्रधानमंत्री के दौरे से पहले हर साल लगभग 2,000 तीर्थयात्री आदि कैलाश की यात्रा पर जाते थे. जितेंद्र वर्मा ने कहा जब से प्रधानमंत्री के दौरे किया है उसके बाद से 28,000 तीर्थयात्री आए थे. वर्मा के अनुसार,  इस साल अब तक 36,461 तीर्थयात्री आदि कैलाश जा चुके हैं.

इसलिए बढ़ रहे तीर्थयात्री?

जितेंद्र वर्मा ने कहा कि तीर्थयात्रियों की संख्या में भारी बढ़ोतरी का कारण भी बताए. उनके अनुसार, BRO द्वारा जोलिंगकोंग तक एक मोटरेबल सड़क बना देने से यात्रियों की संख्या काफी बढ़ गई है. सड़क बनने से पहले पिथौरागढ़ से जोलिंगकोंग तक की नौ दिन की तीर्थयात्रा अब सिर्फ दो दिनों में पूरी हो जाती है.

जानें क्या है महत्व?

आपको बता दें कि आदि कैलाश को छोटा कैलाश भी कहते हैं. पिथौरागढ़ जिले में स्थित ये जगह हिन्दू धर्म के लिए एक पवित्र और आध्यात्मिक स्थान है. इसे भगवान शिव का प्रथम और मूल निवास माना जाता है. वहीं, आदि कैलाश यात्रा के दौरान दिखने वाला वाला ओम पर्वत अपने प्राकृतिक 'ॐ' चिन्ह के लिए विश्वभर में फेमस है. यह हूबहू ओम की तरह नजर आता है.

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