दिल्ली के पूर्व पार्षद से सिक्किम के राज्यपाल तक... जानिए सिक्किम के नए राज्यपाल दुष्यंत कुमार गौतम के राजनीतिक सफर की पूरी कहानी!

राजू झा

• 09:34 PM • 13 Oct 2026

Dushyant Kumar Gautam: सिक्किम के नए राज्यपाल बने दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति को लेकर उत्तराखंड में बड़ा राजनीतिक विवाद छिड़ गया है. कांग्रेस ने इस फैसले के विरोध में मौन उपवास रखते हुए इसे अंकिता भंडारी हत्याकांड के कथित वीआईपी एंगल से जोड़ा है, जबकि भाजपा इसे दलित नेतृत्व का सम्मान बता रही है.

सिक्किम के गवर्नर बनाए गए दुष्यंत गौतम
सिक्किम के गवर्नर बनाए गए दुष्यंत गौतम
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Dushyant Kumar Gautam: उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड के कथित 'वीआईपी एंगल' को लेकर राजनीति एक बार फिर गरमा गई है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा किए गए राज्यपालों के बड़े फेरबदल के तहत दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का नया राज्यपाल नियुक्त किया है. इस नियुक्ति के तुरंत बाद राज्य में एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. उत्तराखंड कांग्रेस ने इस फैसले का कड़ा विरोध करते हुए राजधानी देहरादून में मौन उपवास रखा है. चलिए विस्तार से जानते हैं, क्या है ये पूरा मामला, क्यों दुष्यंत कुमार गौतम को लेकर विरोध जता रही है कांग्रेस.

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कांग्रेस का मौन उपवास और सरकार पर कड़े आरोप

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल अपने समर्थकों के साथ देहरादून के गांधी पार्क पहुंचे और महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने मौन उपवास पर बैठ गए. कांग्रेस का आरोप है कि अंकिता के माता-पिता ने हत्याकांड में शामिल 'वीआईपी' के रूप में दुष्यंत कुमार गौतम का नाम लिया था. पार्टी का कहना है कि सरकार ने मामले में निष्पक्ष जांच कराने के बजाय संबंधित नेता को राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद पर नियुक्त कर दिया है. कांग्रेस ने इस निर्णय को उत्तराखंड की जनता की भावनाओं का अपमान और महिला-विरोधी कदम बताया है.

क्या था मुख्य अंकिता भंडारी हत्याकांड?

दरअसल, 19 वर्षीय अंकिता भंडारी पौड़ी गढ़वाल जिले के ऋषिकेश स्थित वनंतरा रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट का काम करती थीं. 18 सितंबर 2022 को संदिग्ध परिस्थितियों में उनकी हत्या कर दी गई थी और 24 सितंबर 2022 को उनका शव चिल्ला नहर से बरामद हुआ था. जांच में सामने आया कि रिसॉर्ट मालिक और उनके साथियों ने अंकिता पर मेहमानों को 'अतिरिक्त विशेष सेवाएं' यानी शारीरिक संबंध बनाने का दबाव बनाया था. विरोध करने और सच्चाई उजागर करने की धमकी देने पर आरोपियों ने उन्हें नहर में धक्का देकर डुबो दिया था.

अदालत का फैसला, 'वीआईपी थ्योरी' और सीबीआई जांच की मांग

मई 2025 में एक विशेष पीठ ने 500 पन्नों की चार्जशीट के आधार पर मुख्य आरोपी पुलकित आर्य (पूर्व भाजपा नेता विनोद आर्य का बेटा), अंकित गुप्ता और सौरभ भास्कर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई. अगस्त 2026 में नैनीताल हाईकोर्ट ने मुख्य दोषी की जमानत याचिका भी खारिज कर दी थी. हालांकि, रिसॉर्ट में किस 'वीआईपी' के लिए दबाव बनाया जा रहा था, उसे लेकर विवाद बना रहा. जनवरी 2026 में लीक हुए कथित ऑडियो-वीडियो और जन-आक्रोश को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 'वीआईपी एंगल' की सीबीआई जांच की सिफारिश केंद्र को भेजी थी. सितंबर 2026 में घटना के 4 साल पूरे होने पर भी देहरादून में 'न्याय यात्रा' निकाली गई.

कौन हैं सिक्किम के नए राज्यपाल दुष्यंत कुमार गौतम?

दुष्यंत कुमार गौतम का राजनीतिक सफर एबीवीपी से शुरू हुआ था और वे 1980 में भाजपा के गठन के समय से पार्टी से जुड़े रहे हैं. वे भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव, तीन बार अनुसूचित जाति (एससी) मोर्चे के राष्ट्रीय अध्यक्ष और 1997 से 2002 तक दिल्ली में एमसीडी पार्षद रह चुके हैं. उन्होंने कुडली और करोल बाग से विधानसभा चुनाव भी लड़ा था. इसके अलावा, 2020 से 2022 तक वे हरियाणा से राज्यसभा सांसद रहे. भाजपा उनकी नियुक्ति को जमीनी स्तर के दलित नेतृत्व का सम्मान मान रही है, जबकि विपक्षी दल इस पर सवाल उठा रहे हैं.

नई जिम्मेदारी पर दुष्यंत कुमार गौतम का बयान

अपनी नियुक्ति के बाद दुष्यंत कुमार गौतम ने शीर्ष नेतृत्व का आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा, "मैं सबसे पहले देश के यशस्वी प्रधानमंत्री आदरणीय नरेंद्र मोदी जी का धन्यवाद करता हूं. साथ ही, मैं अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन जी और सभी शीर्ष नेतृत्व का भी आभार व्यक्त करता हूं जिन्होंने मुझे नई जिम्मेदारी सौंपी है; मैं उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप अपनी जिम्मेदारी का सही ढंग से निर्वहन करूंगा और संविधान के दायरे में रहते हुए सिक्किम और वहां की जनता के कल्याण पर पूरा ध्यान केंद्रित करूंगा."

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