Ankita Bhandari Murder Case: उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में अभिनेत्री उर्मिला सनावर ने एक ऑडियो क्लिप जारी कर उत्तराखंड की राजनीतिक में भूचाल ला दिया है. इस ऑडियो के सामने आने के बाद से बीजेपी के पूर्व विधायक सुरेश राठौर के साथ ही पार्टी के अन्य नेताओं पर भी सवाल उठने लगे हैं. उर्मिला का दावा है कि इस क्लिप में हत्याकांड से जुड़े ऐसे गहरे राज दबे हैं जो अब तक जांच एजेंसियों की पहुंच से दूर थे. इस खुलासे के बाद से प्रदेश में लगातार कई दिनों तक विरोध प्रदर्शन हुए. इसके बाद दबाव में आकर सरकार ने मामले की सीबीआई जांच का ऐलान किया. इस बीच अब उर्मिला सनावर ने हमारे सहयोगी UP Tak से बात की है. इस दौरान उन्होंने और चौंकाने वाले दावे किए.
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उर्मिला सनावर ने बताया ये रिकॉर्डिंग सुरेश राठौर और उनके बीच हुई बातचीत की है, जो कि 1 नवंबर 2025 की रात 11 बजकर 5 मिनट हुई थी. उन्होंने कहा कि उर्मिला कि उन्होंने इस साक्ष्य को पहले भाजपा के प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के बड़े नेताओं को दिखाया था. लेकिन किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया. जब उन्हें लगा कि उनकी बात अनसुनी की जा रही है तब उन्होंने सोशल मीडिया पर लाइव आकर इसे सार्वजनिक करने का फैसला किया.
खुलासा के बाद दर्ज हुए फर्जी मुकदमे
अभिनेत्री का आरोप है कि ऑडियो में जिन प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आए हैं. अब उन्हें बचाने के लिए पूरी मशीनरी जुट गई है. उर्मिला ने दावा किया कि भाजपा नेता महेंद्र भट्ट और दुष्यंत कुमार गौतम को इस बारे में पहले ही सूचित किया गया था. लेकिन उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया. उर्मिला के मुताबिक जैसे ही उन्होंने नामों का खुलासा करना शुरू किए तो उनके खिलाफ फर्जी मुकदमे दर्ज करा दिए गए और पुलिस उनके घर पर छापेमारी करने लगी.
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रैन बसेरों और गुरुद्वारों में बिताई रातें
विवाद बढ़ने के बाद उर्मिला ने बताया कि उन्हें अपनी हत्या की साजिश रचे जाने का डर था. इसी कारण वह 9 दिनों तक अज्ञातवास में रहीं. इस दाैरान उन्होंने रैन बसेरों और गुरुद्वारों में रातें बिताई. उन्होंने कहा कि उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स बंद करने की कोशिश की गई ताकि उनकी आवाज जनता तक न पहुंचे. उर्मिला ने आरोप लगाया कि उन्हें देहरादून में पुलिस कस्टडी जैसी स्थिति में रखा गया और वकीलों से भी मिलने नहीं दिया गया.
सीबीआई जांच से इंसाफ की उम्मीद
अब फिलहाल मामला सीबीआई को सौंप दिया गया है. वहीं उर्मिला ने अपना मोबाइल और अन्य साक्ष्य कोर्ट में जमा कर दिए हैं. उर्मिला का कहना है कि वो अंकिता भंडारी के माता पिता से मिलना चाहती थीं. लेकिन उन्हें सुरक्षा का हवाला देकर रोक दिया गया. उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मांग की है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष हो ताकि हत्याकांड के असली चेहरों को बेनकाब किया जा सके.
विपक्ष के हाथ होने के सवाल पर उर्मिला ने कहा कि उनकी ये लड़ाई अकेले की है किसी राजनीतिक दल ने उनका साथ नहीं दिया. उन्होंने कहा कि वो डरने वाली नहीं हैं और अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए अपना संघर्ष जारी रखेंगी.
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