बबीता पांडे 19 दिन बाद भी नहीं चला पता! सर्च ऑपरेशन को लीड कर रहे जनक सिंह पंवार से जानिए मामले में अब तक क्या क्या हुआ? 

Babita Pandey missing Case: दयारा बुग्याल से लापता बबीता पांडे का 19 दिन बाद भी सुराग नहीं मिला. पुलिस और रेस्क्यू टीमों की भारी खोजबीन के बाद अब जांच मोबाइल सर्विलांस और सीसीटीवी पर टिकी है. वहीं स्थानीय लोग इस रहस्यमयी गुमशुदगी को पुरानी मान्यताओं से जोड़ रहे हैं. जानिए अब तक क्या हुआ.

आखिर कहां गई बबीता पांडे 19 दिन बाद भी नहीं चला पता
आखिर कहां गई बबीता पांडे 19 दिन बाद भी नहीं चला पता

ओंकार बहुगुणा

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Babita Pandey missing Case: उत्तरकाशी के प्रसिद्ध दयारा बुग्याल क्षेत्र से लापता बबीता पांडे की खोजबीन को 19 दिन का लंबा समय बीत चुका है. इतने दिन गुजर जाने के बाद भी अब तक बबीता का कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा है. पुलिस, प्रशासन और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियां दिन-रात सर्च ऑपरेशन चला रही हैं. शुरुआती दिनों में जंगलों और पहाड़ियों में बड़े पैमाने पर भौतिक रूप से खोजबीन करने के बाद, अब जांच टीम ने अपना पूरा ध्यान तकनीकी पहलुओं पर लगा दिया है. पुलिस मोबाइल सर्विलांस और कॉल डिटेल रिकॉर्ड यानी सीडीआर के जरिए बबीता की लोकेशन और घटनाक्रम को समझने की कोशिश कर रही है.

इस पूरे मामले पर आज तक ने ऑपरेशन को लीड कर रहे पुलिस उपाधीक्षक यानी डिप्टी एसपी जनक सिंह पंवार से बात की है. उन्होंने बताया कि 29 तारीख की रात करीब साढ़े ग्यारह से डेढ़ बजे के बीच बबीता पांडे के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी. इसके तुरंत बाद पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, वन विभाग और स्थानीय आपदा प्रबंधन की टीमों ने मिलकर गोई क्षेत्र और दयारा ट्रैक पर लगातार निगरानी और सर्च अभियान चलाया. यह खोजबीन आज भी थाना और जिला स्तर पर जारी है.

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सीसीटीवी फुटेज से नहीं मिला कोई सुराग

जांच के दूसरे हिस्से के बारे में बताते हुए डिप्टी एसपी ने कहा कि रथल से लेकर तेखला पुल और उत्तरकाशी मुख्यालय तक के सभी सरकारी और प्राइवेट सीसीटीवी कैमरों की फुटेज जांची गई है. इसके लिए एक अलग टीम तैनात की गई थी, लेकिन वहां से कोई भी फायदेमंद जानकारी नहीं मिल सकी. रथल में जहां से ट्रैकिंग शुरू होती है, वहां के कैमरे की 29, 30 और 31 तारीख की पूरी रात की फुटेज देखी गई. रात में कुछ गाड़ियां जरूर वहां आई थीं, लेकिन जांच में पता चला कि वे बाहर से आए ट्रैकर्स की थीं जो रात एक बजे वहां रुके थे. कैमरों में ऊपर से किसी के नीचे आने का कोई सबूत नहीं मिला है.

कैमरे से बचकर निकलने का रास्ता

डिप्टी एसपी ने यह भी साफ किया कि रथल में जहां सीसीटीवी कैमरा लगा है, उससे ठीक ऊपर वाले ट्रैक पर जहां तक कैमरे की नजर जाती है, उससे पहले एक गाथर यानी नाला पड़ता है. अगर कोई व्यक्ति कैमरे की नजर से बचना चाहे, तो वह उस रास्ते से पैदल नीचे आ सकता है. इसके अलावा भटवाड़ी चौकी पर लगे कैमरों की मदद से 29 और 30 तारीख की सुबह गंगोत्री और रथल क्षेत्र से गुजरने वाली सभी गाड़ियों की जांच की जा चुकी है, लेकिन बबीता को लेकर कोई सुराग नहीं मिला.


बबीता पांडे की सेंटीमेंटल पोस्ट का राज

पुलिस अधिकारी से जब पूछा गया कि एक टीम लीडर के तौर पर उन्हें क्या लगता है, तो उन्होंने बताया कि दयारा से लेकर डोडीताल तक के सभी संभावित रास्तों को खंगाला जा चुका है, जहां कोई व्यक्ति बेहोशी या बिना सोचे-समझे जा सकता है. लेकिन वहां से बबीता का जिंदा या मृत अवस्था में कोई शरीर या सबूत नहीं मिला. उन्होंने बताया कि बबीता के इंस्टाग्राम आईडी पर कुछ भावनात्मक यानी सेंटीमेंटल पोस्ट देखी गई थीं. इससे यह उम्मीद लगाई जा रही है कि अगर मानसिक स्थिति सामान्य नहीं थी, तो हो सकता है कि वह एकांत चाहने और लोगों के संपर्क से दूर रहने के लिए खुद कहीं चली गई हों. पुलिस टीम परिजनों और दोस्तों के मोबाइल पर नजर रख रही है ताकि कहीं भी संपर्क होने पर उसे ट्रेस किया जा सके.

परियों की कहानी पर क्या बोले स्थानीय लोग

इस रहस्यमयी घटना को लेकर स्थानीय स्तर पर कई तरह की अफवाहें और पौराणिक चर्चाएं भी चल रही हैं. पहाड़ी इलाकों की पुरानी मान्यताओं के आधार पर कुछ लोग कह रहे हैं कि बबीता को परियां उठाकर ले गई हैं. हालांकि, वैज्ञानिक नजरिया और आधुनिक जांच के तरीके ऐसी बातों को बिल्कुल नहीं मानते. इस मामले पर स्थानीय निवासी और ट्रैकर माधव जोशी ने कहा कि पहाड़ों में लोककथाओं की अपनी जगह है, लेकिन किसी इंसान के गायब होने जैसे गंभीर मामले को अंधविश्वास से नहीं जोड़ना चाहिए. उन्होंने कहा कि दयारा क्षेत्र में लंबे समय से ट्रैकिंग होती आ रही है, इसलिए इस घटना को तथ्यों और वैज्ञानिक जांच के आधार पर ही समझा जाना चाहिए. उन्होंने लोगों से अफवाहों से बचने और जांच एजेंसियों को अपना काम करने देने की अपील की है. फिलहाल बबीता की तलाश जारी है.

 

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