'नशे में थे या गंभीर बीमारी का शिकार?' जानिए उत्तराखंड मेले में हुए दलेर मेहंदी विवाद का पूरा और असली सच

रूपक प्रियदर्शी

24 Oct 2026 (अपडेटेड: Oct 24 2026 11:51 AM)

Charchit Chehra: उत्तराखंड के मेले में मंत्री सुबोध उनियाल और गायक दलेर मेहंदी के बीच हुए विवाद के पीछे नशे का आरोप गलत साबित हुआ, क्योंकि दलेर गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे. इस ड्रामे के बीच, शास्त्रीय संगीत से लेकर 'किंग ऑफ भांगड़ा' बनने तक के उनके संघर्ष, कानूनी विवादों और शानदार वापसी का पूरा सफर चर्चा में आ गया है.

दलेर मेहंदी
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Charchit Chehra: उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में ऐसा हाई-वोल्टेज ड्रामा हुआ, जिसकी गूंज और चर्चा थमने का नाम नहीं ले रही है. नरेंद्र नगर के ऐतिहासिक 'सिद्धपीठ मां कुंजापुरी पर्यटन एवं विकास मेले' की सांस्कृतिक संध्या में जब दलेर मेहंदी को स्टेज पर बुलाया गया, तो किसी ने नहीं सोचा था कि यह रात एक बड़े विवाद में बदल जाएगी.

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सामने दर्शकों में उत्तराखंड के वन एवं कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल बैठे थे. दलेर ने जैसे ही गाना शुरू किया, लोग झूमने लगे, लेकिन मंत्री सुबोध उनियाल को दलेर मेहंदी की परफॉर्मेंस रास नहीं आई. मंत्री को शक हुआ कि दलेर सच में गा नहीं रहे, बल्कि सिर्फ लिप-सिंकिंग कर रहे हैं और नशे की हालत में झूम रहे हैं. बस फिर क्या था, मंत्री जी तैश में आकर सीधे स्टेज पर चढ़ गए और सबके सामने दलेर मेहंदी को सरेआम रगड़ दिया.

दलेर मेहंदी की लाइफ जर्नी

दलेर मेहंदी और सुबोध उनियाल की झड़प का वीडियो वायरल होने से रूक नहीं रहा है. उसी के साथ दलेर मेहंदी की लाइफ जर्नी भी चर्चा में है. लेकिन क्या नशे में गाने के सनसनीखेज आरोपों में कोई ठोस सच्चाई थी? सच यह है कि दलेर मेहंदी के नशे में होने के दावों की कोई पुष्टि नहीं हुई और न ही मौके पर कोई मेडिकल जांच कराई गई.

जब यह विवाद देशव्यापी हंगामा बना, तो परदे के पीछे का असली सच सामने आया कि दलेर मेहंदी असल में पिछले दो साल से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं और हाल में उनकी बहुत बड़ी सर्जरी हुई है. कमजोरी के कारण मंच पर ठीक से खड़े होने और चलने में भी असहज महसूस कर रहे थे जिसे मंत्री ने नशा समझ लिया. कुल मिलाकर, शराब पीने और जनता को बेवकूफ बनाने के संगीन आरोपों से शुरू हुआ यह सियासी और संगीतमय हंगामा अब इस सच पर आकर सिमट गया है कि दलेर मेहंदी नशे में नहीं, बल्कि गंभीर रूप से बीमार थे.

जो लोग आज दलेर मेहंदी की हालत पर सवाल उठा रहे हैं, शायद वे उनकी जिंदगी के कड़े संघर्ष से वाकिफ नहीं हैं. 18 अगस्त 1967 को पटना में जन्मे दलेर का परिवार गुरबानी और कीर्तन गायक रहा. दादा, नाना, माता-पिता सभी शास्त्रीय संगीत की दुनिया में थे. 5 साल की उम्र में दलेर की भी ही रागों और शबद की तालीम शुरू हो गई थी. चर्चित कहानी ये है कि शास्त्रीय गायकी का ऐसा जुनून जागा कि पटियाला घराने की गायकी सीखने के लिए महज 11 साल की उम्र में घर से भाग गए. गोरखपुर पहुंचे और वहां उस्ताद राहत अली खान साहिब की शागिर्दी में दो साल तक हारमोनियम, तानपुरा और शास्त्रीय गायकी के कड़े गुर सीखे. कड़े रियाज ने एक साधारण बच्चे को आगे चलकर देश का सबसे बड़ा पॉप आइकॉन बना दिया. ये ट्रांसफॉर्मेशन ही दलेर मेहंदी के करियर की सबसे इंटरेस्टिंग कहानी है.

परवेज मेहंदी को लेकर दलेर की दीवानगी

दलेर मेहंदी के नाम की रोचक कहानियां हैं. हमेशा से दलेर मेहंदी नहीं थे. कहानी ये है कि दलेर के जन्म से पहले उनके माता-पिता ने जौहर महमूद इन गोवा फिल्म में एक्टर प्रेमनाथ को डाकू दलेर सिंह के रोल में देखा था. न जाने क्या बात कि बेटे का नाम दलेर रख दिया. जब दलेर संगीत की दुनिया में कदम रख रहे थे, तो मशहूर गजल गायक परवेज मेहंदी के बहुत बड़े फैन बन गए. परवेज मेहंदी को लेकर दलेर की दीवानगी और संगीत के प्रति उनके लगाव को देखते हुए, उनके बड़े भाई शमशेर ने  नाम के आगे 'मेहंदी' सरनेम जोड़ दिया. इस तरह 'डाकू' के किरदार से मिला नाम और 'उस्ताद' के नाम से मिला सरनेम मिलकर बन गया 'दलेर मेहंदी', जो आगे चलकर पूरी दुनिया में 'किंग ऑफ भांगड़ा बना.

अब सवाल उठता है कि पटियाला घराने की क्लासिकल म्यूज़िक सीखने वाला यह कलाकार अचानक पॉप की दुनिया में कैसे आ गया? इसके पीछे रिजेक्शन और अमेरिका की सड़कों पर चली एक टैक्सी की बेहद दिलचस्प कहानी है. दलेर मेहंदी शुरुआत में एक शुद्ध गजल गायक बनना चाहते थे. गजलें रिकॉर्ड कराने के लि म्यूजिक कंपनी से रिजेक्ट हुए तो बड़े भाई के पास अमेरिका चले गए, जहां सैन फ्रांसिस्को के बर्कले में टैक्सी चलाने लगे. उसी टैक्सी ने हमेशा के लिए दलेर को बदल दिया. 


किसी दिन अमेरिका के मशहूर रॉक बैंड द ग्रेटफुल डेड के कंसर्ट के लिए फैंस की दीवानगी देखी और उसी समय ठान लिया कि क्लासिकल नहीं गाएंगे. कुछ ऐसा कुछ करेंगे कि उनका कंसर्ट भी इतना ही विशाल और धमाकेदार हो. दलेर भारत लौटे. पंजाबी फोक म्यूजिक की अपने हिसाब से रीइन्वेंट करके भांगड़ा पॉप का बिल्कुल नया जॉनर ईजाद कर दिया. 

दलेर मेहंदी ने जो तहलका मचाया, उसने म्यूज़िक इंडस्ट्री का इतिहास हमेशा के लिए बदल दिया. साल 1995 में जब उनका पहला पॉप एल्बम 'बोलो ता रा रा' बाज़ार में आया, तो नॉन फिल्मी कैटेगरी में देश का सबसे बड़ा हिट साबित हुआ. उस एल्बम की रिकॉर्ड 2 करोड़ से ज़्यादा कॉपियां बिकीं, जिसने रातों-रात उन्हें पूरे देश में इंडी-पॉप का बेताज बादशाह बना दिया. इसके बाद साल 1997 में 'दर्दी रब रब' और 'हो जाएगी बल्ले बल्ले' जैसी बैक-टू-बैक ब्लॉकबस्टर हिट्स ने उनके नाम के आगे 'डॉलर मेहंदी' का तमगा लगा दिया. 

1998 में आया उनका आइकॉनिक गाना

सफलता का कारवां यहीं नहीं रुका, साल 1997 में ही उन्होंने महानायक अमिताभ बच्चन के साथ फिल्म 'मृत्युदाता' के गाने 'ना ना ना रे' में स्क्रीन शेयर की, जो बॉलीवुड में उनका पहला बड़ा धमाका था. इसके ठीक बाद साल 1998 में आया उनका आइकॉनिक गाना 'तुनक तुनक तुन', जिसका म्यूज़िक वीडियो उस दौर के रिकॉर्ड तोड़ ढाई करोड़ रुपये के भारी बजट से बना था. दलेर किंग ऑफ भांगड़ा पॉप' कहलाने लगे.

जब दलेर पूरी तरह से स्ट्रगल कर रहे थे तब अमरजीत मेहंदी से शादी हो गई. जैसे-जैसे दलेर कामयाबी के शिखर पर पहुंचे, उनके और अमरजीत के बीच आपसी मतभेद और दूरियां बढ़ने लगीं, जिसके बाद दोनों ने आपसी सहमति से अपनी राहें हमेशा के लिए अलग कर लीं.

कहानी में नया मोड़ साल 1994 में आया, जब दलेर मेहंदी की मुलाकात तरनप्रीत कौर (जिन्हें दुनिया 'निक्की मेहंदी' के नाम से जानती है) से हुई. तरनप्रीत उस समय एक बड़ी इवेंट मैनेजमेंट कंपनी संभाल रही थीं और उन्होंने ही दलेर मेहंदी के करियर का सबसे पहला मेगा शो आयोजित करवाया था. पहले दोनों के बीच बिजनेस पार्टनरशिप हुई, जिसने दलेर के पहले एल्बम 'बोलो ता रा रा' को ब्लॉकबस्टर बनाने में बड़ी भूमिका निभाई. 

लगभग 18 साल तक एक-दूसरे के बेहद करीब रहने और काम करने के बाद, दलेर मेहंदी ने 2013 में तरनप्रीत कौर से दूसरी शादी रचाई. आज तरनप्रीत न सिर्फ उनकी जीवनसंगिनी हैं, बल्कि उनके म्यूजिक लेबल की सीईओ (CEO) भी हैं, जो हर कानूनी और व्यक्तिगत मुसीबत में दलेर मेहंदी के साथ चट्टान की तरह खड़ी दिखाई देती हैं.


दलेर मेहंदी खुद भी बने और छोटे भाई अमरीक सिंह को भी मीका सिंह बनाया. मीका सिंह के नाम कई हिट सॉन्ग्स हैं लेकिन बड़ी चर्चा रही राखी सावंत के किस करने के विवाद की. बहरहाल मीका सिंह ने करियर की शुरुआत दलेर मेहंदी के ही ग्रुप से की थी. शुरुआती दिनों में वे दलेर पाजी के लाइव शोज़ और कंसर्ट्स में पीछे खड़े होकर गिटार बजाया करते थे. दोनों भाइयों के बीच गुरु-शिष्य और गहरी दोस्ती का रिश्ता रहा है. मीका का सोलो नाम तब बना जब पहला एल्बम 'सावन में लग गई आग हिट हुआ. 

दोनों भाइयों ने मिलकर प्रोफेशनली कई गानों में धमाल मचाया. दलेर मेहंदी को भांगड़ा-पॉप का किंग माना गया, वहीं मीका सिंह ने 'मौजा ही मौजा', 'धिंका चिका' और 'सुबह होने ना दे' जैसे अनगिनत ब्लॉकबस्टर गानों के दम पर बॉलीवुड प्लेबैक सिंगिंग पर राज किया. दोनों की पर्सनल और प्रोफेशनल केमिस्ट्री इतनी बेमिसाल है कि स्वभाव से थोड़े आक्रामक दिखने वाले मीका सिंह, बड़े भाई दलेर के सामने हमेशा एक आज्ञाकारी छोटे भाई की तरह नजर आते हैं. यही वजह है कि जब भी किसी एक पर आंच आती है, तो दूसरा चट्टान की तरह खड़ा हो जाता है, जैसा कि हाल ही में उत्तराखंड विवाद में मीका के तीखे तेवरों से पूरी दुनिया ने देखा.

दलेर मेहंदी पर उंगुली उठी तो मीका सिंह ने गरजकर जवाब दिया

इस विवाद में भी सबसे बड़ी ढाल बनकर खड़े हुए उनके छोटे भाई और मशहूर सिंगर मीका सिंह. दलेर मेहंदी पर उंगुली उठी तो मीका सिंह ने गरजकर जवाब दिया कि मैंने अपनी पूरी जिंदगी में अपने भाई को कभी शराब हाथ लगाते नहीं देखा. अगर कोई भी शख्स यह साबित कर दे कि दलेर मेहंदी ने कभी शराब पी है, तो मैं आज ही सिंगिंग छोड़ दूंगा.

दलेर मेहंदी खुद कई इंटरव्यूज में बता चुके हैं कि उन्होंने अपने गुरु की कसम खाई थी कि वह कभी शराब को हाथ नहीं लगाएंगे और पूरी जिंदगी वे इस कसम पर कायम रहे. मीका ने मंत्री से सार्वजनिक माफी की मांग की है और कहा है कि अगर मंत्री माफी मांगते हैं, तो वह खुद उत्तराखंड आकर बिल्कुल 'फ्री में शो' करने को तैयार हैं.

सफलता के सातवें आसमान पर उड़ रहे दलेर मेहंदी के करियर में इसके बाद साल 2003 में एक ऐसा भयानक तूफान आया, जिसने उनकी पूरी साख को हिलाकर रख दिया. उन पर और उनके भाई शमशेर सिंह पर 'कबूतरबाजी' यानी इलीगल इमिग्रेशन का गंभीर आरोप लगा. आरोप था कि वे 1998 और 1999 में अपने म्यूज़िक ट्रूप के सदस्यों के रूप में पेश करके करीब 10 लोगों को अवैध रूप से अमेरिका और कनाडा ले गए और मोटी रकम लेकर उन्हें वहीं छोड़ दिया. उसी आरोप में दलेर जेल भी गए. सितंबर 2022 में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट से उनकी सजा पर रोक लगने के बाद उन्हें जमानत मिल गई. भले ही कानूनन उन्हें राहत मिल गई हो, लेकिन इस एक विवाद ने सालों तक उनके चमकते करियर और छवि पर एक बहुत बड़ा दाग लगा दिया था.

बड़े विवाद और कानूनी झटकों के बाद दलेर मेहंदी के करियर में वो दौर आया, जब उन्होंने एक बार फिर अपनी बेमिसाल आवाज के दम पर फिल्म इंडस्ट्री में धमाकेदार वापसी की. उन्होंने साबित किया कि भले ही उन पर कितने भी आरोप लगे हों, लेकिन उनकी आवाज का जादू कोई नहीं छीन सकता. एसएस राजामौली की ऐतिहासिक फिल्म 'बाहुबली 2' का मशहूर गाना 'जियो रे बाहुबली दलेर मेहंदी का सबसे ताजा धमाका है. उत्तराखंड के मेले में हुई घटना ने उनकी सेहत और परफॉर्मेंस पर फिर से सवाल खड़े किए हों, लेकिन बॉलीवुड से लेकर देश भर के फैंस आज भी उनके साथ खड़े हैं. इंडी-पॉप के इस किंग ने यह साफ कर दिया है कि उतार-चढ़ाव चाहे जितने भी आएं, उनका 'तुनक-तुनक' का सफर थमने वाला नहीं है.

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