हल्द्वानी में खड़गे की रैली के बाद 'शुद्धिकरण' पर बवाल! श्री राम सेना ने छिड़का गंगाजल, भड़की कांग्रेस ने बताया दलित-विरोधी

लीला सिंह बिष्ट

13 Aug 2026 (अपडेटेड: Aug 13 2026 11:36 AM)

उत्तराखंड के हल्द्वानी में मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद रामलीला मैदान में शुद्धिकरण यज्ञ कराया गया. श्री राम सेना ने इसे धार्मिक आस्था से जुड़ा बताया. कांग्रेस ने इसे दलित और पिछड़ा विरोधी मानसिकता बताते हुए बीजेपी को घेरा. बीजेपी ने आयोजन से किसी भी तरह का संबंध होने से इनकार किया.

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उत्तराखंड का हल्द्वानी शहर इस वक्त राजनीति का बड़ा हॉटस्पॉट बना हुआ है. रामलीला मैदान में ऐसा सियासी रायता फैला है कि समेटे नहीं सिमट रहा. मामला जुड़ा है कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली से. खड़गे साहब 8 अगस्त को हल्द्वानी आए, 'विजय शंखनाद रैली' को संबोधित किया और रवाना हो गए. लेकिन असली नाटक तो उनके जाने के बाद शुरू हुआ, जब रामलीला मैदान में 'श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास' के लोग आ धमके और उन्होंने पूरे मैदान का बकायदा 'शुद्धिकरण यज्ञ' कर डाला. इसके बाद यज्ञ की अग्नि से ज्यादा राजनीति में घी पड़ गया और कांग्रेस-बीजेपी आमने-सामने आ गईं.

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रैली खत्म होते गंगाजल लेकर पहुंचे राम सेना के सदस्य

रैली खत्म होते ही श्री राम सेना के सदस्य गंगाजल और हवन सामग्री लेकर रामलीला मैदान पहुंचे थे. संगठन का दावा है कि जिस मैदान में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की लीला का मंचन होता है, उसे पवित्र रखना बेहद जरूरी है.

उनका आरोप है कि मल्लिकार्जुन खड़गे और उनकी पार्टी के नेताओं ने अतीत में सनातन धर्म व हिंदू संगठनों पर ऐसे बयान दिए हैं जो धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं.

संगठन के मुताबिक, सनातन विरोधी विचार रखने वाले किसी नेता की रैली के बाद मैदान का शुद्धिकरण करना उनकी धार्मिक आस्था का मामला है. हालांकि, कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने सफाई दी कि उनका मकसद किसी जाति या समाज का अपमान करना कतई नहीं था.

कांग्रेस ने जताया विरोध

वहीं दूसरी ओर, यज्ञ की खबर फैलते ही कांग्रेस का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया. कांग्रेस इसे सिर्फ राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि सीधे तौर पर जातिगत भेदभाव और छुआछूत की मानसिकता से जोड़ रही है. पार्टी नेताओं का कहना है कि 8 अगस्त के मंच पर सिर्फ खड़गे साहब ही नहीं थे, बल्कि उत्तराखंड के नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा भी मौजूद थीं. कांग्रेस का सीधा आरोप है कि ये तमाम दिग्गज नेता दलित और पिछड़े वर्ग से आते हैं, इसलिए बीजेपी की शह पर यह 'शुद्धिकरण' का ढोंग रचा गया है.

इस घटना के विरोध में कांग्रेस अनुसूचित मोर्चे के कार्यकर्ताओं ने हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में प्रदर्शन करते हुए जमकर नारेबाजी की. इसके साथ ही कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इस घटना को लोकतंत्र के लिए बेहद शर्मनाक और निंदनीय बताया. उन्होंने कहा कि आधुनिक भारत में छुआछूत और जातिगत संकीर्णता के लिए कोई जगह नहीं है. गोदियाल ने नैनीताल के एसएसपी से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए.

बीजेपी ने खुद को किया अलग

मामला तूल पकड़ते ही भारतीय जनता पार्टी ने खुद को इस विवाद से तुरंत अलग कर लिया. बीजेपी के जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट ने साफ़ किया कि इस 'शुद्धिकरण यज्ञ' से पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने कहा कि न तो इस आयोजन में पार्टी का कोई पदाधिकारी शामिल था और न ही बीजेपी ऐसी गतिविधियों का समर्थन करती है. बीजेपी के मुताबिक, यह कुछ लोगों का अपना निजी या संगठन का कार्यक्रम था, जिसे बेवजह पार्टी से जोड़ा जा रहा है.

संसद में खड़गे का छलका दर्द

आजराज्यसभा की कार्यवाही के दौरान मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस पूरी घटना पर गहरा दुख जताया. उन्होंने कहा कि वे कभी अपने अनुसूचित जाति (SC) होने का मुद्दा नहीं बनाते, लेकिन इस हरकत से सीधे तौर पर उनका अपमान हुआ है.

खड़गे ने संसद में कहा, "बड़े दुःख के साथ कहना पड़ता है कि मैं हल्द्वानी के रामलीला मैदान में भाषण देने गया था. लाखों लोग वहां मौजूद थे. उस वक्त मैंने किसी समाज या किसी धर्म का नाम नहीं लिया, सिर्फ जनता की समस्याओं को उठाया. लेकिन मेरे भाषण देकर लौटने के बाद कल उन लोगों ने हवन करके उस पूरे स्टेज का शुद्धिकरण कर दिया." 

'सरकार इस कृत्य की भर्त्सना करती है': जेपी नड्डा

खड़गे के इस बयान के बाद उच्च सदन में हंगामा मच गया और कांग्रेस सांसदों ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया. मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय मंत्री और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा तुरंत खड़े हुए और सरकार का पक्ष रखा.

जेपी नड्डा ने इस घटना पर अफसोस जताते हुए कहा कि सरकार ऐसे किसी भी कृत्य का समर्थन नहीं करती और इसकी कड़े शब्दों में भर्त्सना करती है. उन्होंने सदन को भरोसा दिलाया कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाई जाएगी और जो भी दोषी होगा उस पर सख्त कार्रवाई होगी.