5 फरवरी ये वो तारीख थी जिस दिन साधु ब्रजेश दास हरिद्वार के एक आश्रम से लापता हुए. 10 फरवरी को हरिद्वार के भगवानपुर थाने में उनकी गुमशुदगी दर्ज कराई गई. इसके बाद मामले में उत्तराखंड पुलिस एक्टिव हुई. साधु की खोजबीन के लिए पुलिस ने सर्विलांस का सहारा लिया. पुलिस को साधु के मोबाइल की लोकेशन बागपत में मिली. शुरुआत में ये सिर्फ एक लापता व्यक्ति का मामला लगा. लेकिन जैसे जैसे जांच आगे बढ़ी और पुलिस ने कड़ियां जोड़नी शुरू कीं तो पूरा मामला ही पलट गया. जांच में साधु और एक महिला के बीच संबंधों और फिर हत्या की बाद पता चली. क्या है पूरा मामला ये जानिए के लिए पढ़िए पूरी खबर...
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ऐसे खुला आखिरी लोकेशन का राज
दरअसल, जांच में उत्तराखंड पुलिस सर्विलांस का सहारा लिया. इसमें पता चला कि ब्रजेश की लास्ट लोकेशन का पता चला. साधु को उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के गांगनौली गांव में ट्रेस किया गया. इस दौरान ये भी खुलासा हुआ कि साधु की आखिरी बातचीत बागपत की ही रहने वाली एक शशि नामक महिला से हुई थी. पुलिस की टीम शशि तक पहुंची. उससे सख्ती से पूछताछ की गई. पूछताछ में उसने जो राज उगले उस सुनकर पुलिस भी सन्न रह गई.
महिला के साथ संबंधों की बात आई सामने
पूछताछ के दौरान पता चला कि साधु ब्रजेश और शशि एक दूसरे को जानते थे. दोनों के बीच काफी संबंध भी थे. पता चला कि 5 फरवरी को ब्रजेश दास शशि से मिलने उसके घर पहुंचे थे. बताया जा रहा है कि जब दोनों आपत्तिजनक स्थिति में थे तभी महिला का पति संजीव अचानक वहां आ गया. अपनी आंखों के सामने ये मंजर देख संजीव ने अपना आपा खो दिया और पास रखी कुल्हाड़ी से साधु पर ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए. इस दौरान साधु को इतनी गहरी चोट लबर कि मौके पर ही उसकी मौत हो गई.
लाश को ठिकाने लगाने की रची साजिश
हत्या करने के बाद संजीव ने अपने भाई जोगेंद्र को मौके पर बुला लिया. दोनों ने मिलकर सबूत मिटाने के इरादे से लाश को पास की कृष्णा नदी में फेंक दिया. उन्हें लगा कि पानी के बहाव के साथ सब कुछ खत्म हो जाएगा. लेकिन पुलिस की सतर्कता ने उनकी योजना पर पानी फेर दिया. अब पुलिस ने नदी से शव बरामद कर लिया है और हत्या में इस्तेमाल हुई कुल्हाड़ी भी जब्त कर ली है. फिलहाल पुलिस ने संजीव, उसकी पत्नी शशि और भाई जोगेंद्र को गिरफ्तार किया है.
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