सीएम पुष्कर सिंह धामी के एक इशारे से गरमाई उत्तराखंड की सियासत, क्या आईएएस दीपक रावत रखेंगे राजनीति में कदम?

राजू झा

• 09:51 AM • 05 Nov 2026

IAS Deepak Rawat: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के एक मजाकिया बयान के बाद आईएएस दीपक रावत की राजनीति में एंट्री को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. क्या 2007 बैच के अधिकारी दीपक रावत VRS लेकर बीजेपी के टिकट पर 2027 का विधानसभा चुनाव लड़ेंगे? जानिए कौन हैं दीपक रावत और क्या है पूरे विवाद की वजह.

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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का एक हालिया वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का बड़ा केंद्र बन गया है. इस वीडियो में सीएम धामी जब हल्द्वानी के हेलीपैड पर उतरते हैं, तो उनके साथ कुमाऊं कमिश्नर और चर्चित आईएएस अधिकारी दीपक रावत भी मौजूद होते हैं. वीडियो में सीएम धामी मुस्कुराते हुए कमिश्नर दीपक रावत की तरफ इशारा करते हुए कहते हैं कि 'कमिश्नर साहब को भी कुछ सालों में ऐसे ही आना है'. सीएम के इस हल्के-फुल्के और मजाकिया अंदाज वाले बयान के बाद से राज्य की राजनीतिक गलियारों में कयासों का दौर शुरू हो गया है.

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राजनीति में एंट्री के कयास और नेताओं की बढ़ी बेचैनी

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सीएम धामी के इस बयान का मतलब यह निकाला जा रहा है कि आने वाले समय में दीपक रावत प्रशासनिक सेवा छोड़कर एक राजनेता के रूप में हेलीकॉप्टर से एंट्री कर सकते हैं. उत्तराखंड में साल 2027 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं, और चर्चाएं तेज हैं कि वे स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के टिकट पर चुनावी मैदान में उतर सकते हैं. इस वायरल वीडियो के सामने आने के बाद कुमाऊं क्षेत्र (विशेषकर लालकुआं और कालाढूंगी जैसी सीटों) के टिकट की आस लगाए बैठे कई नेताओं की धड़कनें और बेचैनी काफी बढ़ गई है.

कौन हैं आईएएस दीपक रावत?

2007 बैच के उत्तराखंड कैडर के आईएएस अधिकारी दीपक रावत देश के सबसे तेजतर्रार और लोकप्रिय अफसरों में शुमार किए जाते हैं. वे वर्तमान में कुमाऊं कमिश्नर के साथ-साथ सीएम पुष्कर सिंह धामी के सचिव की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं. सोशल मीडिया पर उनकी फैन फॉलोइंग काफी तगड़ी है और उनके फील्ड विजिट्स के वीडियो अक्सर वायरल होते रहते हैं. एक इंटरव्यू के दौरान दीपक रावत ने खुद खुलासा किया था कि बचपन में पढ़ाई-लिखाई में औसत रहने वाले वे एक समय पर 'कबाड़ी' (स्क्रैब डीलर) बनना चाहते थे, क्योंकि उन्हें इस पेशे में नई-नई जगहों को एक्सप्लोर करने का रोमांच नजर आता था. मसूरी में जन्मे और दिल्ली के हंसराज कॉलेज से पढ़ाई करने वाले दीपक रावत ने यूपीएससी की कठिन परीक्षा पास कर सिविल सेवा में कदम रखा था.

अब यदि वे प्रशासनिक सेवा छोड़कर राजनीति में कदम रखते हैं, तो यह उत्तराखंड के राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है.

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