Saguri Pul Viral Video: विकास के तमाम दावों के बीच ग्रामीण इलाकों की जमीनी हकीकत आज भी कई गंभीर सवाल खड़े करती है. उत्तराखंड के पौड़ी जिले के थलीसैंण क्षेत्र से सामने आई एक बानगी इसकी पूरी कहानी बयां करती है. यहां डोरिया और कैन्यूर गांव के बीच स्थित सगुड़ी पुल साल 2016 में टूट गया था. करीब दस साल बीत जाने के बाद भी इस पुल का पुनर्निर्माण नहीं हो पाया है, जिसके कारण आज भी लोगों को अपनी जान हथेली पर रखकर आवाजाही करनी पड़ रही है. अब इस टूटे पुल का एक वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इस वीडियाे में एक महिला अपने बच्चे को पीठ पर बैठाकर पुल पार करती हुई दिख रही है.
ADVERTISEMENT
वायरल वीडियो में दिखी खतरनाक तस्वीर
वायरल फुटेज में एक महिला अपनी पीठ पर छोटी बच्ची को बांधकर बहुत सावधानी से क्षतिग्रस्त लोहे के पुल के मलबे पर चलती दिख रही है. पुल के नीचे तेज बहता पानी और बड़े-बड़े पत्थर साफ नजर आ रहे हैं. वीडियो रिकॉर्ड कर रही एक युवती कहती है कि देखिए कैसे चाची जी बच्चे को उस पार ले जा रही हैं. बच्ची को भी डर लग रहा होगा, लेकिन चाची जी काफी हिम्मत रखकर उसे पार कराने की कोशिश कर रही हैं.
छात्रा ने एक अन्य वीडियो में कसा तंज
इसी मामले से जुड़ा एक और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें एक कॉलेज की युवती तंज कसते हुए नजर आती है. युवती कहती है कि आखिरकार मेहनत रंग लाई है और सगुड़ी का पुल बनकर तैयार हो चुका है. वह व्लॉगर के अंदाज में कहती है कि वे जब फर्स्ट ईयर में थी तब से लेकर अब फाइनल ईयर में पहुंच जाने तक रास्ता वही देख रही है. वह व्यंग्य करते हुए नेताओं और प्रधान जी का धन्यवाद करती है कि उन्होंने इतना अच्छा पुल बनाया है. युवती अपील करती है कि इस वीडियो को ज्यादा से ज्यादा शेयर किया जाए ताकि यह प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री तक पहुंचे, क्योंकि आज भी उनके गांव में बुनियादी सुविधाएं नहीं सुधरी हैं.
चार सौ परिवारों की मुसीबत और प्रशासन की चुप्पी
पुल न होने की वजह से ग्रामीण को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए करीब पांच किलोमीटर की एक्स्ट्रा दूरी तय करनी पड़ रही है. ऐसे में इस लंबे फेर से बचने के लिए लोग मजबूरी में इसी खतरनाक रास्ता चुनने को मजबूर हैं. हालांकि बरसात में पानी बढ़ने पर यहां से निकलना और भी मुश्किल हो जाता है. हालांकि, इन दिनों पानी कम है. ऐसे में ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर इससे आर पार का रास्ता तय कर रहे हैं.
बता दें सगुड़ी पुल का निर्माण न होने से इलाके के करीब चार सौ परिवार सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं. इस दौरान सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों, कॉलेज के छात्रों और थलीसैंण बाजार आने-जाने वाले आम लोगों को उठानी पड़ रही है. राजकीय इंटर कॉलेज और डिग्री कॉलेज के विद्यार्थियों को लंबा चक्कर काटकर पढ़ाई के लिए पहुंचना पड़ता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि समय पर पुल बन गया होता तो समय की बचत के साथ सफर भी सुरक्षित होता.
ग्रामीणों और नेताओं की चेतावनी
कांग्रेस के थलीसैंण ब्लॉक अध्यक्ष विजय बिष्ट के मुताबिक, साल 2016 से ही लोग लगातार इसके पुनर्निर्माण की मांग कर रहे हैं. कई आंदोलन भी हो चुके हैं. प्रशासन ने डीपीआर तैयार कर निर्माण का भरोसा जरूर दिया था, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ. वहीं, पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष राजकुमार ने इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया है. उनका कहना है कि दस साल बीत जाने के बाद भी पुल न बनना इस बात का सबूत है कि ग्रामीण इलाकों में आज भी विकास नदारद है. अब लोगों को सिर्फ आश्वासनों की नहीं बल्कि ठोस कार्रवाई की सख्त जरूरत है.
यह भी पढ़ें: पौड़ी: जिस गांव से देश को मिले NSA अजीत डोभाल, वहां टिन शेड में पढ़ने को मजबूर बच्चे.. आखिर कब बनेगा स्कूल?
ADVERTISEMENT


