NIFT पासआउट, UCLA से पढ़ाई... जानें कौन हैं देहरादून में पेड़ कटाई के विरोध में सिर मुंडवाने वाली महिला 'माना'

राजू झा

21 Jul 2026 (अपडेटेड: Jul 21 2026 11:08 AM)

भानियावाला-जालीग्रांट-ऋषिकेश (NH-7) मार्ग चौड़ीकरण के लिए 4,300 से अधिक पेड़ों की कटाई और एलीफेंट कॉरिडोर के नुकसान को लेकर स्थानीय लोगों का तीखा विरोध शुरू हुआ था.

सिर मुंडवा वायरल हुई महिला
सिर मुंडवा वायरल हुई महिला
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उत्तराखंड के भानियावाला-जालीग्रांट-ऋषिकेश मार्ग के चौड़ीकरण परियोजना के लिए हजारों पेड़ों की कटाई के खिलाफ चल रहा जनआंदोलन अब रंग लाता दिख रहा है. स्थानीय निवासियों और पर्यावरण प्रेमियों के तीखे विरोध और विपक्ष के नेता राहुल गांधी के दखल के बाद उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने पेड़ों की कटाई पर फिलहाल रोक लगा दी है.

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सिर मुंडवाकर महिला ने जताया अनोखा विरोध

इस पूरे विरोध प्रदर्शन के दौरान सोशल मीडिया पर एक महिला का भावुक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें वह पेड़ों की कटाई के विरोध में अपना सिर मुंडवाए रोती हुई नजर आईं. महिला का कहना था, "पेड़ बोल नहीं सकते, जो पृथ्वी का श्रृंगार हैं उन्हें मत काटो. अगर सरकार उन्हें गंजा कर रही है, तो औरतों को भी अपने सिर मुंडवा लेने चाहिए. हम मरते दम तक पेड़ों को कटने नहीं देंगे."

कौन हैं ये महिला?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिर मुंडवाने वाली इस महिला का नाम मानवी अनुषा है, जिन्हें 'माना' के नाम से जाना जाता है. मानवी एक वैदिक ज्योतिषी, फिल्ममेकर और डिजाइनर हैं. वो दिल्ली से 'आऊ माना फाउंडेशन' चलाती हैं और ऋषिकेश के लक्ष्मण झूला के पास उनका आश्रम है. उन्होंने निफ्ट (NIFT) से ग्रेजुएशन किया है, कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी (UCLA) से पढ़ाई की है और मार्केटिंग में एमबीए हैं.

राहुल गांधी से मुलाकात और सरकार का फैसला

प्रदर्शनकारियों ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से भी मुलाकात कर अपनी पीड़ा साझा की. लोगों ने राहुल गांधी को बताया कि यह क्षेत्र एक एलीफेंट कॉरिडोर है और सड़क निर्माण के नाम पर जंगलों को उजाड़ा जा रहा है. राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारियों की बातें ध्यान से सुनीं और इस मुद्दे को संसद (पार्लियामेंट) में उठाने तथा मदद का भरोसा दिया.

राहुल गांधी के आश्वासन और स्थानीय लोगों के लगातार बढ़ते विरोध के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने के निर्देश दिए. सीएम धामी का कहना है कि प्राकृतिक विरासत, जनभावनाएं और राज्य का विकास तीनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं और अधिकारियों को स्थानीय लोगों व विशेषज्ञों से नए सिरे से बातचीत करने के निर्देश दिए गए हैं.

क्या है पूरी परियोजना और क्यों छिड़ा विवाद?

भानियावाला-जालीग्रांट-ऋषिकेश 4/6 लेन प्रोजेक्ट (NH-7) लगभग 20 किलोमीटर लंबी एक प्रमुख सड़क चौड़ीकरण परियोजना है. जिसे हाइब्रिड एनुटी मॉडल के तहत लगभग 743 करोड़ की लागत से तैयार किया जा रहा है. विवाद की मुख्य वजह इस प्रोजेक्ट के लिए 4,300 से अधिक पेड़ों (जिसमें से करीब 3,000 पेड़ पहले ही काटे जा चुके हैं) की कटाई और एलीफेंट कॉरिडोर (हाथी गलियारे) व स्थानीय पर्यावरण को पहुंचने वाला नुकसान है. जहां एक ओर NHAI का तर्क है कि जालीग्रांट एयरपोर्ट, चारधाम यात्रा और रोजाना गुजरने वाले 18,000 से अधिक वाहनों के ट्रैफिक दबाव तथा तीखे मोड़ों के कारण सड़क चौड़ीकरण बेहद जरूरी है; वहीं दूसरी ओर स्थानीय निवासी और पर्यावरण कार्यकर्ता हाथी गलियारे के विनाश, वन्यजीवों के खतरे और प्रकृति के नुकसान को देखते हुए पेड़ों की अंधाधुंध कटाई का कड़ा विरोध कर रहे हैं और बिना पेड़ काटे वैकल्पिक रास्ता निकालने की मांग कर रहे हैं.