उत्तराखंड: जुबिन नौटियाल के पिता रामशरण ने बीजेपी छोड़ थामा कांग्रेस का हाथ, चकराता सीट पर सियासी समीकरण बदले

राजू झा

• 08:49 AM • 20 Oct 2026

बॉलीवुड गायक जुबिन नौटियाल के पिता और कद्दावर नेता रामशरण नौटियाल ने बीजेपी से नाराजगी के चलते इस्तीफा देकर कांग्रेस पार्टी का दामन थाम लिया है.

जुबीन नौटियाल के पिता Ramsharan Nautiyal
जुबीन नौटियाल के पिता Ramsharan Nautiyal
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बॉलीवुड के मशहूर सिंगर जुबिन नौटियाल की आवाज के दीवाने तो पूरी दुनिया में हैं, लेकिन आज हम बात कर रहे हैं उनके पिता रामशरण नौटियाल की, जो इन दिनों उत्तराखंड की राजनीति के गलियारों में चर्चा का केंद्र बने हुए हैं. रामशरण नौटियाल ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से लंबे समय से चल रही नाराजगी के बाद आखिरकार पार्टी छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया है.

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यह सियासी फेरबदल ऐसे समय में हुआ है जब उत्तराखंड की राजनीति में सरगर्मी तेज है. देहरादून जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष रह चुके रामशरण नौटियाल ने कुछ समय पहले ही पार्टी में उचित सम्मान न मिलने का आरोप लगाते हुए बीजेपी से इस्तीफा दिया था. साल 2014 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल होने वाले नौटियाल की घर वापसी से सूबे की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है.

इन दिग्गजों की मौजूदगी में हुई कांग्रेस में वापसी

उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, एआईसीसी (AICC) की जनरल सेक्रेटरी कुमारी शैलजा और उत्तराखंड विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य की मौजूदगी में रामशरण नौटियाल ने आधिकारिक रूप से कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण की. जानकारों का मानना है कि उत्तराखंड की सियासत में खासा प्रभाव रखने वाले नौटियाल का यह कदम बीजेपी के लिए एक बड़ा झटका और कांग्रेस के लिए संजीवनी साबित हो सकता है.

संपत्ति और राजनीतिक कद

रामशरण नौटियाल उत्तराखंड के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं. साल 2022 के विधानसभा चुनावों के दौरान दाखिल चुनावी हलफनामे के मुताबिक, वह देहरादून जिले के सबसे अमीर उम्मीदवारों में से एक थे. उनके पास करीब 20 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति है, जबकि उनके ऊपर लगभग 1.08 करोड़ रुपये का कर्ज भी है. इसके अलावा, सुरक्षा कारणों से उनके पास साल 2006 में खरीदी गई एक रिवॉल्वर भी है.

उन्होंने 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के टिकट पर चकराता सीट से ताल ठोकी थी. उस चुनाव में उन्हें 27,417 वोट मिले थे, जबकि उनके सामने खड़े कांग्रेस के दिग्गज नेता प्रीतम सिंह को 36,853 वोट हासिल हुए थे.

क्या है चकराता सीट का सियासी गणित?

चकराता विधानसभा सीट (एसटी) उत्तराखंड की सबसे चर्चित और हाई-प्रोफाइल सीटों में शुमार है. इस सीट को कांग्रेस का 'अभेद्य किला' कहा जाता है, जहां बीजेपी आज तक कमल खिलाने में नाकाम रही है. राज्य गठन (2000) के बाद से हुए सभी पांचों विधानसभा चुनावों (2002 से 2022 तक) में सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस के प्रीतम सिंह ही जीत दर्ज करते आए हैं. इतना ही नहीं, प्रीतम सिंह से पहले उनके पिता स्वर्गीय गुलाब सिंह भी इसी क्षेत्र से 8 बार उत्तर प्रदेश विधानसभा के विधायक रह चुके हैं.

चकराता सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है, जहां मुख्य रूप से जौनसारी समुदाय चुनावी दिशा तय करता है. यहां चौहान, सिंह (तोमर/रणा) और अन्य स्थानीय उप-जातियां बहुसंख्यक हैं. पारंपरिक रूप से यहां मुकाबला दो बड़े गुटों के बीच रहता है—एक जो प्रीतम सिंह के परिवार के प्रति वफादार है और दूसरा गुट जो बदलाव चाहता है (जो पहले मुन्ना सिंह चौहान या बीजेपी के पाले में था).

बीजेपी की अंतर्कलह और नया समीकरण

बीजेपी लंबे समय से चकराता क्षेत्र में अंदरूनी कलह से जूझ रही है. पार्टी के भीतर विकास नगर विधायक मुन्ना सिंह चौहान और उनके परिवार (मधु चौहान) का बढ़ता प्रभाव रामशरण नौटियाल को रास नहीं आ रहा था, जिसके चलते दोनों नेताओं के बीच खींचतान जगजाहिर थी. नौटियाल के जाने के बाद अब बीजेपी के पास स्थानीय स्तर पर प्रीतम सिंह को कड़ी टक्कर देने वाले मजबूत और सर्वमान्य चेहरे का अकाल पड़ गया है.

दूसरी तरफ, गायक जुबिन नौटियाल की भारी लोकप्रियता का फायदा भी उनके परिवार को मिलता रहा है. क्षेत्र के युवाओं का एक बड़ा वर्ग रामशरण नौटियाल से जुड़ा हुआ है, जिससे युवा वोटर्स का झुकाव भी कांग्रेस की तरफ बढ़ सकता है.

अब देखना यह दिलचस्प होगा कि साल 2027 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले रामशरण नौटियाल के कांग्रेस में आने के बाद, वह क्षेत्र के सबसे ताकतवर कांग्रेस विधायक प्रीतम सिंह के साथ किस तरह तालमेल बिठाते हैं. फिलहाल, चकराता का चुनावी मैदान कांग्रेस के पक्ष में काफी मजबूत नजर आ रहा है और बीजेपी के लिए यहां सेंध लगाना बेहद चुनौती भरा होने वाला है.

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