सूर्य-गुरु की दुर्लभ युति से बना 'द्विद्वादश राजयोग', जानें किन 3 राशियों की चमकने वाली है किस्मत!
सिंह राशि में सूर्य के प्रवेश से बना 'द्विद्वादश राजयोग' 17 सितंबर तक रहेगा, जिससे मेष, सिंह और धनु राशि वालों को धन लाभ, करियर में तरक्की और भाग्योदय का जबरदस्त फायदा मिलेगा.
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17 अगस्त को ग्रहों के राजा सूर्य देव अपनी स्वराशि सिंह में विराजमान हो चुके हैं और 17 सितंबर तक इसी राशि में रहेंगे. सूर्य के इस राशि परिवर्तन के साथ ही ब्रह्मांड में एक अत्यंत शुभ और प्रभावशाली ज्योतिषीय घटना घटी है, जिसने वैदिक ज्योतिष के जानकारों का ध्यान अपनी ओर खींचा है.

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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य और देवगुरु बृहस्पति परस्पर परम मित्र माने जाते हैं. सूर्य जहां आत्मा, मान-सम्मान, ऊर्जा और नेतृत्व क्षमता का प्रतिनिधित्व करते हैं, वहीं गुरु ग्रह को ज्ञान, धर्म, समृद्धि और भाग्य का कारक माना गया है. ऐसे दो बड़े ग्रहों का शुभ प्रभाव जीवन में तरक्की के नए रास्ते खोलता है.

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सिंह राशि में सूर्य के प्रवेश करते ही सूर्य और गुरु के बीच 'द्विद्वादश राजयोग' का निर्माण हुआ है. इस स्थिति में गुरु ग्रह सूर्य से बारहवें भाव में और सूर्य ग्रह गुरु से दूसरे भाव में मौजूद हैं. ग्रहों की यह विशेष बनावट कई राशियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव और आर्थिक मजबूती लाने का संकेत दे रही है.

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इस राजयोग का सबसे शानदार असर मेष राशि के जातकों पर देखने को मिलेगा. नौकरीपेशा लोगों की कार्यशैली की सराहना होगी और पदोन्नति के साथ वेतन वृद्धि की प्रबल संभावना है. व्यापारियों को नए सौदों से बड़ा मुनाफा होगा, साथ ही अचानक धन लाभ से आपकी आर्थिक स्थिति पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो जाएगी.

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सिंह राशि के जातकों के लिए यह गोचर सीधे उनकी अपनी ही राशि में हो रहा है, जिससे उनका आत्मविश्वास और निखर कर सामने आएगा. आपके लंबे समय से अटके हुए काम अब तेजी से पूरे होंगे और रुका हुआ धन वापस मिलने के पूरे योग हैं. नए निवेश से भविष्य में बेहतरीन रिटर्न मिलेगा और परिवार में खुशहाली का माहौल रहेगा.

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धनु राशि के स्वामी स्वयं गुरु बृहस्पति हैं, इसलिए सूर्य का यह परिवर्तन आपके भाग्य के द्वार खोलने वाला साबित होगा. प्रतियोगिता परीक्षा में लगे छात्रों को कोई खुशखबरी मिल सकती है. इसके अलावा, विदेश से जुड़े कारोबार या नौकरी में बड़ी सफलता मिलने के आसार हैं, जिससे आपकी भौतिक सुख-सुविधाओं में इजाफा होगा.

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वैदिक परंपरा में माना जाता है कि जब भी कोई बड़ा राजयोग बनता है, तो सही उपायों के जरिए उसके शुभ फल को कई गुना बढ़ाया जा सकता है. सूर्य और गुरु की इस संयुक्त कृपा को प्राप्त करने के लिए दैनिक दिनचर्या में छोटे-छोटे धार्मिक बदलाव करना बेहद फलदायी माना जाता है.

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इस राजयोग का पूरा लाभ उठाने के लिए प्रतिदिन प्रातःकाल तांबे के लोटे में जल भरकर, उसमें चुटकी भर रोली और पीला फूल डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें. इसके साथ ही 'ॐ घृणिः सूर्याय नमः' और 'ॐ बृं बृहस्पतये नमः' मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप करें.
