न मैदान, न पार्क... साधन बनी नाव! बिहार के बाढ़ प्रभावित गांव ने योग दिवस पर दुनिया को दिया अनोखा संदेश

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देशभर में आज अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जा रहा है, जहां लोग अलग-अलग जगहों पर जाकर योग कर रहे है. लेकिन इस अवसर पर बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के औराई प्रखंड में योग का एक बेहद अनोखा दृश्य देखने को मिला, जहां बाढ़ प्रभावित मधुवन प्रताप गांव के ग्रामीणों ने बागमती नदी के बीचों-बीच नाव पर बैठकर योगाभ्यास किया और लोगों को स्वस्थ जीवन का संदेश दिया.
 

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मधुवन प्रताप गांव के ग्रामीणों के लिए आज भी आवागमन का मुख्य साधन नाव ही है क्योंकि बरसात के दिनों में पूरा इलाका जलमग्न हो जाता है, इसलिए गांव के लोगों ने अपनी इसी कठिन परिस्थिति को योग दिवस की पहचान बना दिया और नाव पर योग करके एक नई मिसाल पेश की.
 

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नदी की लहरों के बीच नाव पर बैठे महिला और पुरुषों द्वारा विभिन्न योगासन और प्राणायाम किए गए. योग दिवस के इस अनोखे आयोजन ने न केवल स्थानीय लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया, बल्कि यह सशक्त संदेश भी दिया कि योग करने के लिए किसी विशेष स्थान या संसाधन की आवश्यकता नहीं होती है.
 

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योग कार्यक्रम में शामिल दीपू सहनी ने बताया कि योग शरीर और मन दोनों को स्वस्थ रखने का सबसे सरल और सुलभ माध्यम है. उन्होंने लोगों से प्रतिदिन योग करने की विशेष अपील की ताकि हर व्यक्ति खुद को पूरी तरह से चुस्त-दुरुस्त और निरोग रख सके.
 

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ग्रामीणों ने नाव पर योग करके देश और दुनिया को यह बड़ा संदेश देने का प्रयास किया है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन या विपरीत क्यों न हों, योग किसी भी हाल में और कहीं भी किया जा सकता है.
 

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ग्रामीणों का मानना है कि योग केवल बड़े मैदानों, पार्कों या आलीशान भवनों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सच्ची इच्छाशक्ति होने पर इसे कहीं भी किया जा सकता है. अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर मधुवन प्रताप गांव की यह अनोखी पहल अब चारों तरफ चर्चा का विषय बनी हुई है और लोगों को योग के प्रति जागरूक कर रही है.