Charchit Chehra: कौन हैं अभिषेक सिंह जो संभालेंगे अनंत सिंह की राजनीतिक विरासत?
Charchit Chehra: सुप्रीम कोर्ट ने दुलारचंद यादव हत्याकांड में बाहुबली अनंत सिंह की जमानत रद्द कर दी है, जिससे उन्हें बेटी की शादी के बाद 1 दिसंबर 2026 तक हर हाल में सरेंडर करना होगा.
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बिहार में अनंत सिंह ऐसे बाहुबली नेता हैं जिनकी चर्चा राजनीति से ज्यादा रुआब की होती रही है. पटना में बग्गी की सवारी करके, घर में अजगर पालकर अनंत सिंह हमेशा मीडिया और पब्लिक अटेंशन पाते रहे. लेकिन ये सब था उस दौर में जब मोकामा में छोटे सरकार कहे जाते थे अनंत सिंह. अक्टूबर में ऐसी कई तारीखें आईं जो अनंत सिंह के साम्राज्य के पतन की गवाह बन गई हैं. बिहार में पूरा MLC चुनाव अनंत सिंह, अनंत सिंह के शोर में होता रहा लेकिन अब जो हुआ है वो तो अनंत सिंह के रुआब को मिट्टी में मिलाने जैसा है. पहले MLC चुनाव में उनकी पसंद का उम्मीदवार जेडीयू के हाथों हारा. फिर जेडीयू ने पार्टी से निकाला और अब सुप्रीम कोर्ट ने जमानत रद्द करके सरेंडर करने का आदेश दे दिया है.
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच ने दुलारचंद यादव हत्याकांड केस में अनंत सिंह की जमानत रद्द करते हुए बड़ा झटका दिया है. कहा कि गंभीर आपराधिक इतिहास वाले व्यक्ति को राहत नहीं दी जा सकती. हालांकि, घर में बेटी की 25 नवंबर को होने वाली शादी के मद्देनजर कोर्ट ने थोड़ी मानवीय मोहलत जरूर दी है, लेकिन आदेश बिल्कुल साफ है- शादी की रस्में खत्म होते ही, यानी 1 दिसंबर 2026 तक 'छोटे सरकार अनंत सिंह' को हर हाल में सरेंडर करना होगा और वापस जेल जाना होगा.
राजनीतिक हिंसा में दुलारचंद यादव नाम के व्यक्ति की मौत
पिछले साल अक्टूबर में बिहार में चुनाव प्रचार के दौरान मोकामा में राजनीतिक हिंसा में दुलारचंद यादव नाम के व्यक्ति की मौत हो गई. परिवार का आरोप था कि उन्हें पहले गोली मारी गई और फिर गाड़ी से कुचल दिया गया. अनंत सिंह को मुख्य आरोपी बनाकर नवंबर 2025 में जेल भेज दिया गया. हालांकि, जेल में रहते हुए भी उन्होंने चुनाव जीता तो मार्च में पटना हाईकोर्ट से जमानत हासिल करके बाहर आ गए लेकिन आजादी ज्यादा दिनों तक टिकी नहीं. दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. अब कोई और उम्मीद बची नहीं क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने ही हाईकोर्ट से मिली जमानत रद्द करते हुए जेल जाने का आदेश दिया है.
साल 1961 में पटना के बाढ़ में चंद्रदीप सिंह के घर अनंत सिंह का जन्म हुआ. स्कूल तो गए, लेकिन उनका मन किताबों से ज्यादा मोकामा के टाल इलाके की जमीनी लड़ाइयों में लगता था. अनंत सिंह खुद कई इंटरव्यू में स्वीकार कर चुके हैं कि वो पढ़े-लिखे नहीं हैं और उन्हें ठीक से हस्ताक्षर करना भी नहीं आता.
अनंत सिंह के बड़े भाई दिलीप सिंह का मोकामा में सिक्का चलता था, जो लालू यादव की सरकार में मंत्री भी बने. दिलीप सिंह के विरोधी गुटों से निपटने की जिम्मेदारी धीरे-धीरे छोटे भाई अनंत सिंह ने संभाल ली.
एके-47 की गूंज, जमीनी विवादों पर फैसले और इलाके के जातीय समीकरणों के दम पर अनंत सिंह ने मोकामा में समानांतर सरकार चलानी शुरू कर दी. लोग अदालतों के बजाय अपनी फरियाद लेकर अनंत सिंह के दरवाजे पर आने लगे, जहां 'ऑन द स्पॉट' फैसले होते थे. यहीं से उनके नाम के आगे 'छोटे सरकार' और 'बाहुबली' का ऐसा टैग लगा, जो आज तक नहीं हटा. उनके खिलाफ हत्या, रंगदारी और अपहरण के करीब 38 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हुए.
घोड़े की सवारी का शौक रखते हैं
घोड़े की सवारी का शौक रखने वाले, अजगर पालने वाले और हाथों में सरेआम हथियार लहराने वाले अनंत सिंह बिहार की राजनीति का वो सच हैं, जिसे न तो कोई दल छोड़ पाता है और न पूरी तरह अपना पाता है. चुनाव कोई भी हो, हवा किसी भी पार्टी की हो, मोकामा में जीतता वही है जिसे 'छोटे सरकार' का आशीर्वाद मिले.
आरजेडी शासन में अनंत सिंह के परिवार का राजनीतिक दबदबा मोकामा में स्थापित हो चुका था. आगे लालू यादव और अनंत सिंह के रिश्ते खराब भी हुए लेकिन वक्त ने ऐसी पलटी मारी कि 2020 के विधानसभा चुनाव में लालू यादव की पार्टी आरजेडी ने ही अनंत सिंह को लालटेन के सिंबल पर चुनाव लड़ाया और अनंत सिंह ने जेल में रहते हुए भी जीत हासिल की थी.
नीतीश कुमार और अनंत सिंह का रिश्ता 'दोस्ती और दुश्मनी' की एक लंबी स्क्रिप्ट जैसा है. साल 2004 के लोकसभा चुनाव में जब नीतीश कुमार बाढ़ संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे थे, तब अनंत सिंह ने उनके लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी. इसके बाद साल 2005 में जब बिहार में सत्ता बदली, तो नीतीश कुमार ने अनंत सिंह को जेडीयू का टिकट दिया और वो पहली बार मोकामा के विधायक बने.
एक वक्त था जब नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद सिपहसालारों में अनंत सिंह गिने जाते थे. लेकिन साल 2015 के आते-आते आपराधिक मामले में नाम आने के बाद नीतीश ने उनसे दूरी बना ली. लंबे अंतराल के बाद 2025 में अनंत सिंह ने फिर से घर वापसी की और जेडीयू के टिकट पर चुनाव जीता, लेकिन जेडीयू नेता नीरज कुमार से उनकी पुरानी अदावत और विधान परिषद चुनाव में बगावत के चलते पार्टी ने उन्हें बाहर का रास्ता साफ कर दिया.
छुपी नहीं है अनंत सिंह की सियासी और आपराधिक दास्तान
बाहुबली अनंत सिंह की सियासी और आपराधिक दास्तान तो सब जानते हैं, लेकिन परिवार की चर्चा उतनी नहीं हुई. अनंत सिंह की शादी नीलम देवी से हुई जो सामान्य परिवार से थी. शुरुआत में घरेलू महिला की तरह घर तक सीमित रहीं, लेकिन जब-जब अनंत सिंह पर कानूनी संकट आया या वो जेल गए, नीलम देवी ने ढाल बनकर न सिर्फ उनका घर संभाला बल्कि उनके राजनीतिक साम्राज्य की कमान अपने हाथों में ले ली. आज नीलम देवी खुद बिहार की राजनीति में स्थापित चेहरा हैं और मोकामा से विधायक भी रह चुकी हैं.
खुद भले ही कभी ठीक से स्कूल का मुंह न देख पाए हों, लेकिन बाहुबली अनंत सिंह ने अपने बच्चों को अपराध की परछाई से दूर रखकर देश और दुनिया की सबसे बेहतरीन शिक्षा दिलाई है. अनंत सिंह और नीलम देवी के तीन बेटे हैं—अभिषेक सिंह, अंकित सिंह और अभिनव सिंह. इनमें से अभिषेक और अंकित दोनों जुड़वां भाई हैं, जिनका जन्म 13 मार्च 2003 को हुआ. हूबहू एक जैसी दाढ़ी, हेयरकट और चेहरे की बनावट वाले इन जुड़वां भाइयों ने देहरादून के स्कूल से शुरुआती पढ़ाई करने के बाद, नोएडा की एमिटी यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन पूरा किया है. आगे दोनों भाई पढ़ने लंदन चले गए. तीसरे बेटे अभिनव सिंह दिल्ली में पढ़ाई कर रहे हैं.
हथियारों की गूंज से दूर रहने वाले ये बच्चे अब मोकामा के नए राजनीतिक उत्तराधिकारी बनने की ओर अग्रसर हैं. बड़े बेटे अभिषेक सिंह ने सक्रिय राजनीति में कदम रख दिया है. अनंत सिंह ने खुद घोषणा की थी कि वे अपनी राजनीतिक विरासत बड़े बेटे अभिषेक को सौंपेंगे. हाल ही में मोकामा के इलाकों में जब तनाव की स्थिति बनी, तो अभिषेक सिंह को कुर्ता-पायजामा पहनकर जनता के बीच दिखे. हालांकि कोर्ट के आदेश के बाद अनंत सिंह खुद इतने आहत हैं कि राजनीति से संन्यास लेने की भी चेतावनी दे रहे.
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