Bihar MLC Election: बिहार विधान परिषद की 8 सीटों के चुनाव का पूरा समीकरण, जानिए किस सीट पर किसकी स्थिति मजबूत और कहां फंसा पेंच

Bihar MLC Election 2026: बिहार विधान परिषद की 8 सीटों पर 23 अक्टूबर को मतदान और 27 अक्टूबर को मतगणना होगी. पटना स्नातक से लेकर कोसी स्नातक सीट तक जानिए कहां JDU, BJP, RJD, कांग्रेस और जन सुराज की स्थिति मजबूत मानी जा रही है, किन उम्मीदवारों के सामने कड़ी चुनौती है और कहां मुकाबले में पेंच फंसा है.

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Bihar MLC Election 2026
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बिहार विधान परिषद की 8 सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए प्रचार-प्रसार का शोर अब थम गया है. इन सीटों पर कल यानी 23 अक्टूबर को मतदान होगा, जबकि वोटों की गिनती और नतीजों की घोषणा 27 अक्टूबर को की जाएगी. इस बार के एमएलसी चुनाव को लेकर राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट तेज है, क्योंकि इस चुनाव में सीमित मतदाताओं (टीचर्स और ग्रेजुएट वोटर्स) के बावजूद राजनीतिक दलों और निर्दलीय दिग्गजों ने पूरी ताकत झोंक दी है. इसी बीच वरिष्ठ पत्रकार अरुण पांडे ने बिहार तक से खास बातचीत की. इस विश्लेषण के अनुसार, इस बार का यह चुनाव किसी आम विधान परिषद चुनाव की तरह नहीं बल्कि विधानसभा चुनाव जैसा लड़ा जा रहा है. विस्तार से जानिए 8 सीटों का समीकरण.

1. पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र

उम्मीदवार: इस सीट से जदयू के मुख्य प्रवक्ता और पूर्व मंत्री नीरज कुमार मैदान में हैं. वहीं राजद ने दिलीप कुमार और जनसुराज ने अनुज सिंह को मैदान में उतारा है. इसके अलावा अन्य पार्टियों ने भी उम्मीदवार उतारे हैं.

समीकरण और चुनौती: यह सीट इस चुनाव की सबसे हॉट सीटों में शुमार रही है. मोकामा से जदयू विधायक अनंत सिंह ने पार्टी लाइन से हटकर खुलकर जन सुराज समर्थित उम्मीदवार के पक्ष में मोर्चा खोला और सत्ताधारी दल के भीतर अंतर्कलह को उजागर कर दिया. इसके बावजूद, संगठनात्मक पकड़ और सत्तारूढ़ दल के प्रभाव के चलते नीरज कुमार को टक्कर देने के लिए विपक्षी उम्मीदवारों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी.

2. पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र 

उम्मीदवार: बीजेपी के कद्दावर और अनुभवी नेता नवल किशोर यादव एक बार फिर मैदान में हैं, जिनका मुकाबला राजद के डॉ. संजीव और कांग्रेस के उम्मीदवारों से है. वहीं जनसुराज ने दिव्या ज्योति को अपना उम्मीदवार बनाया है. 

समीकरण: नवल किशोर यादव इस क्षेत्र से लगातार जीतते आ रहे हैं. विपक्षी दलों की तमाम कोशिशों के बावजूद शिक्षकों के बीच उनकी मजबूत पैठ और जमीनी पकड़ के कारण उनकी स्थिति काफी मजबूत आंकी जा रही है.

3. सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र

उम्मीदवार: जदयू की ओर से पुष्कर आनंद मैदान में हैं, वहीं जन सुराज से अफाक अहमद और राजद से जयराम यादव ताल ठोक रहे है.

समीकरण: पारंपरिक रूप से यह क्षेत्र मजबूत राजनीतिक उठापटक का केंद्र रहा है. यहां बागी उम्मीदवारों के बैठने और स्थानीय समीकरणों के बदलने से मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है, जहां सभी दलों को अपनी जीत बरकरार रखने के लिए पसीना बहाना पड़ा है.

4. तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र

उम्मीदवार: सीपीआई के संजय कुंवर सिंह और एनडीए (बीजेपी) समर्थित उम्मीदवार के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिला है.

समीकरण: देवेश चंद्र ठाकुर के लोकसभा सांसद बनने के बाद खाली हुई इस सीट पर वामदल और एनडीए के बीच सीधी टक्कर रही है, जहां ग्रामीण और शिक्षक मतदाताओं का रुख हार-जीत तय करेगा.

5. तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र 

उम्मीदवार: निर्दलीय उम्मीदवार बंसीधर बृजवासी के सामने जदयू के अभिषेक झा और राजद से डॉ. रश्मि विनायक गौतम मैदान में हैं. वहीं जनसुराज ने डॉ. विमोहन कुमार और कांग्रेस ने रजनीकांत पाठक को उम्मीदवार बनाया है.

समीकरण: स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ रखने वाले निर्दलीय उम्मीदवार बंसीधर बृजवासी को टक्कर देना सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हुआ है.

6. दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र 

उम्मीदवार: इस सीट पर कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मंत्री मदन मोहन झा अपनी सीट बचाने के लिए मैदान में हैं. जदयू से डॉ. घनश्याम राय और राजद से कुमर राउत को अपना कैंडिडेट बनाया है.

समीकरण: महागठबंधन के भीतर सीट तालमेल के पेंच और राजद-कांग्रेस के अलग-अलग लड़ने के कारण मदन मोहन झा के सामने अपनी सीट बचाए रखना एक बेहद कठिन चुनौती बन गया है.

7. दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र

उम्मीदवार: बीजेपी समर्थित और साधन-संपन्न माने जाने वाले सर्वेश कुमार मैदान में हैं. राजद ने अनिल कुमार झा और जनसुराज ने डॉ. मोहम्मद इम्तियाज नूरानी को उम्मीदवार बनाया है.

समीकरण: इस सीट पर एनडीए का पलड़ा शुरुआती दौर से ही भारी नजर आया है, और संगठनात्मक मजबूती के चलते यहां एनडीए की स्थिति मजबूत मानी जा रही है.

8. कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र

उम्मीदवार: यहां बीजेपी के सीटिंग एमएलसी एन.के. यादव मैदान में हैं. वहीं राष्ट्रीय जनता दल से नितेश कुमार, कांग्रेस से मनोज कुमार जायसवाल और जन सुराज से रजनीश रंजन मैदान  में है. 

समीकरण: एन.के. यादव के सामने इस बार जन सुराज पार्टी, कांग्रेस और राजद के संयुक्त प्रहार से कड़ी चुनौती खड़ी हो गई है, जिससे उन्हें अपनी सीट सुरक्षित रखने के लिए भारी संघर्ष करना पड़ा है.

धनबल और व्यक्तिगत प्रभाव का चुनाव

विशेषज्ञों का मानना है कि लगभग 5 लाख से अधिक मतदाताओं वाले इस स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में व्यक्तिगत संपर्क और धनबल की भूमिका काफी अहम होती है. इस बार जन सुराज पार्टी भी सभी 8 सीटों पर अपनी किस्मत आजमा रही है, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय और बेहद कड़ा हो गया है. महागठबंधन के भीतर भी कई सीटों पर दोस्ताना या आमने-सामने की लड़ाई देखने को मिल रही है. अब देखना यह होगा कि 23 अक्टूबर को पड़ने वाले वोट किसके पक्ष में जाते हैं और 27 अक्टूबर को आने वाले नतीजे किसके सिर पर ताज सजाते हैं.

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