बिहार में खत्म होगी शराबबंदी? बिहार तक के पॉडकास्ट में JDU के सांसद देवेश चंद्र ठाकुर के बयान ने नीतीश सरकार में मचाया हड़कंप, देखें वीडियो
सीतामढ़ी के सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने 'बिहार तक' के पॉडकास्ट में बिहार की राजनीति, शराबबंदी की विफलता और मुस्लिम-यादव वोट बैंक पर अपनी बेबाक राय रखी है. उन्होंने न केवल अपनी विकास योजनाओं का हिसाब दिया, बल्कि विरोधियों को खुली चुनौती देते हुए बिहार के पिछले 15 सालों के शासन की कड़वी सच्चाई भी उजागर की.

बिहार की राजनीति के दिग्गज नेता और सीतामढ़ी से जेडीयू सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने बिहार तक के पॉडकास्ट में कई ऐसे बयान दिए हैं, जिससे सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है. 'बिहार तक' के साथ बातचीत में ठाकुर ने न केवल शराबबंदी कानून पर सवाल उठाए, बल्कि अपने क्षेत्र के विकास और विशिष्ट समुदायों के प्रति अपने नजरिए पर बात की. पॉडकास्ट का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा वो रहा जिसमें देवेश चंद्र ठाकुर ने शराबबंदी कानून पर बात कर दी.
पॉडकास्ट में देवेश चंद्र ठाकुर ने बिहार में लागू शराबबंदी कानून पर अपनी असहमति जताई. उन्होंने कहा मैं शुरू से ही इस पॉलिसी के पक्ष में नहीं था. दुनिया में कहीं भी शराबबंदी पूरी तरह सफल नहीं हुई है. उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इरादों को नेक बताया लेकिन साथ ही जोड़ा कि भौगोलिक रूप से बिहार एक लैंड लॉक्ड राज्य है, जहां चारों तरफ से सीमाओं के जरिए शराब पहुंच जाती है. उन्होंने स्वीकार किया कि व्यावहारिक रूप से इसे पूरी तरह बैन करना संभव नहीं है.
सांसद ने बताया शराबबंदी कानून के दौरान शपथ वाला किस्सा
दरअसल, पॉडकास्ट में सांसद देवेश चंद्र ठाकुर से शराबबंदी कानून के समीक्षा की अटकलों की बात पर सवाल पूछा कि क्या इस कानून में सुधार की जरूरत है या फिर इसे बंद ही रहना चाहिए तो उन्होंने कहा कि मैं इस पॉलिसी से सहमत नहीं था ये हट जाए तो बहुत अच्छा है. सांसद ने कहा कि पूरी दुनिया के किसी भी हिस्से में पूर्ण शराबबंदी लंबे समय तक सफल नहीं रही है. उन्होंने माना कि शराब से सामाजिक समस्याएं जैसे घरेलू हिंसा, आर्थिक नुकसान और पारिवारिक विवाद बढ़ते हैं, लेकिन इसके बावजूद इसे पूरी तरह खत्म करना व्यवहारिक नहीं है.
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सांसद ने बिहार की भौगोलिक स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि राज्य चारों ओर से अन्य राज्यों से घिरा हुआ है और सीमाएं पूरी तरह सील नहीं रहतीं. ऐसे में बाहर से शराब की उपलब्धता पर पूरी तरह रोक लगाना संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर शराब की उपलब्धता को लेकर लगातार खबरें सामने आती रहती हैं.
देवेश चंद्र ठाकुर कहा कि शराबबंदी कानून लागू होने के बाद विधायकों और सांसदों को इसके समर्थन में शपथ दिलाई गई थी. लेकिन उन्होंने उस समय ये शपथ नहीं ली थी. इसके बाद उन्हें बुलाकर पूछा गया कि वे आप शपथ से क्यों गायब हो गए थे तो उनका कहना था कि कानून बिहार के लिए बनाया गया है और शपथ लेने के लिए कह रहे हैं कि मैं कभी इसका सेवन नहीं करूंगा. उन्होंने कहा कि जब तक मैं बिहार में रहूंगा तब तक नहीं करूंगा. लेकिन बाहर जाऊं तो क्या दिक्कत है आपको? इसलिए ये प्रैक्टिकल नहीं है. सच तो ये है कि यहां शराब पहले ही बिक रही है क्योंकि हमेशा ये तस्वीरें आती हैं.
हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि शराबबंदी नीति को जारी रखना या उसमें बदलाव करना पूरी तरह नेतृत्व का निर्णय है और पार्टी उस निर्णय के साथ खड़ी रहेगी. सांसद ने कहा कि नीति पर अंतिम फैसला नेतृत्व का होता है और संगठन उसी के अनुसार कार्य करता है.
मुस्लिम और यादव समाज की टिप्पणी पर ये कहा
पिछले दिनों चर्चा में रहे अपने उस बयान पर, जिसमें उन्होंने कहा था कि वे मुस्लिम और यादवों का व्यक्तिगत काम नहीं करेंगे, ठाकुर ने सफाई दी. उन्होंने कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया. सांसद ने स्पष्ट किया, "सार्वजनिक काम सबके लिए हैं क्योंकि वह सरकारी पैसा है. लेकिन जब व्यक्तिगत मदद की बात आती है, तो दुख होता है कि 30-40 साल तक उनके लिए काम करने के बाद भी चुनाव के समय वे केवल दल देखते हैं." उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि इन दोनों समाजों का कोई भी व्यक्ति आकर उनके द्वारा किए गए विकास कार्यों पर उनसे डिबेट कर सकता है.
सांसद निधि (MPLADS) के खर्च पर ये दिया जवाब
अपनी सांसद निधि (MPLADS) के खर्च पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने बताया कि सीतामढ़ी में 100 से ज्यादा हाई-टेक सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए हैं. उन्होंने कहा कि ये कैमरे पुलिस विभाग की सलाह पर रणनीतिक जगहों पर लगाए गए हैं ताकि क्राइम कंट्रोल किया जा सके. भ्रष्टाचार के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्होंने बताया कि वे राजनीति में आने से पहले ही करोड़ों रुपये अपनी जेब से समाज सेवा और गरीब बच्चियों की शिक्षा व खेल (जैसे शूटिंग राइफल्स) पर खर्च कर चुके हैं.
5 सालों की तुलना आज के बिहार से की
सांसद ने बिहार के पिछले 15 सालों (नीतीश राज से पहले) की तुलना आज के बिहार से की. उन्होंने कहा कि उस दौर में बिहार की छवि को गहरा धक्का लगा था. अब राज्य इंडस्ट्रियलाइजेशन के दौर में है. पेप्सीको जैसी बड़ी कंपनियों का आना और बंद पड़ी चीनी मिलों का दोबारा शुरू होना इस बात का प्रमाण है कि बिहार अब बदल रहा है.
पवन सिंह के राज्यसभा जाने की चर्चाओं पर ये कहा
भोजपुरी स्टार पवन सिंह के राज्यसभा जाने की चर्चाओं पर उन्होंने नपा-तुला जवाब देते हुए कहा कि यह दूसरी पार्टी का मामला है. वहीं, अगले 5 सालों में खुद को कहां देखते हैं, इस सवाल पर उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, "यह मेरे महान मतदाताओं पर निर्भर है."










