ताने सहकर पैरों से लिखी अपनी तकदीर... मिलिए कटिहार की 'सुपरगर्ल' लक्ष्मी से, जो बिना हाथों के बुन रही टीचर बनने का सपना
कटिहार की लक्ष्मी दोनों हाथों से दिव्यांग होने के बावजूद अपने पैरों से लिखती है, खाना खाती है और जिंदगी के हर काम को खुद करती है. कक्षा 4 में पढ़ने वाली लक्ष्मी का सपना टीचर बनने का है. परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है और अब मां सरकार से बेटी के लिए मदद की उम्मीद कर रही है.
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पैरों से तकदीर लिख रही लक्ष्मी
"कहते हैं हौसलों की उड़ान के आगे किस्मत भी झुक जाती है..." इस कहावत को अक्षरशः सच कर दिखाया है बिहार के कटिहार जिले की एक नन्हीं मासूम ने. हसनगंज प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय भतौरिया में कक्षा 4 में पढ़ने वाली लक्ष्मी की उम्र भले ही खेलने-कूदने की हो, लेकिन जिंदगी ने उसे दोनों हाथों से दिव्यांग बनाकर एक कठिन परीक्षा में डाल दिया. हालांकि, लक्ष्मी ने हार मानने के बजाय अपने पैरों के बल इस चुनौती को हरा दिया है.
