PK के लिए गठबंधन की राह आसान नहीं? जनसुराज के सामने ये बड़ी चुनौतियां
बिहार की राजनीति में 'जन सुराज' के ज़रिए तीसरे विकल्प के रूप में उभर रहे प्रशांत किशोर (PK) के लिए पारंपरिक राजनीतिक दलों के साथ गठबंधन करना इतना आसान होगा. प्रशांत किशोर अगर गठबंधन की राजनीति में आते हैं तो उन्हें कौन-कौन सी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. समझिए विस्तार से.
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Prashant Kishor
बिहार की राजनीति दशकों से दो मुख्य ध्रुवों राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले गठबंधनों के इर्द-गिर्द घूमती रही है. इस पारंपरिक समीकरण को चुनौती देते हुए ‘जन सुराज’ के ज़रिए खुद को तीसरे विकल्प के रूप में स्थापित कर रहे प्रशांत किशोर (PK) ने राज्य के सियासी माहौल को काफी गर्मा दिया है. "व्यवस्था परिवर्तन" और "जमीनी बदलाव" के नारे के साथ आगे बढ़ रहे पीके के सामने सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यही है कि क्या वे अकेले दम पर बिहार का सियासी किला फतह कर पाएंगे, या फिर उन्हें भी उसी गठबंधन की राजनीति का रुख करना पड़ेगा जिसे वे लगातार खारिज करते आए हैं? बिहार की गठबंधन राजनीति में प्रशांत किशोर की एंट्री कितनी कठिन होगी और उन्हें किन-किन बड़ी चुनौतियों से होकर गुज़रना पड़ेगा.
