शारदा सिन्हा जैसे चाहतीं थी वैसे ही हुई विदाई, बेटे अंशुमन ने किया मां की आखिरी ख्वाहिश का खुलासा!
शारदा सिन्हा अपनी अंतिम सांसों तक संगीत के प्रति समर्पित रहीं. उनका प्रसिद्ध गीत, “सैय्या निकस गए मैं न लड़ी थी,” उनकी अंतिम रियाज़ का हिस्सा बना, जिसमें उन्होंने भारतीय समाज की स्त्री की पीड़ा को व्यक्त किया.
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Sharda Sinha: लोक संगीत की प्रतिष्ठित गायिका शारदा सिन्हा अब पंचतत्व में विलीन हो गई हैं. उनकी आवाज और लोक संस्कृति में योगदान उन्हें अमर बना चुका है. बेटे अंशुमान सिन्हा ने मां को मुखाग्नि दी और उनकी इच्छा के अनुसार, अंतिम विदाई के समय छठ पर्व के अवसर पर पटना के घाट पर उनकी अंतिम यात्रा संपन्न हुई. अंशुमान ने कहा कि शारदा जी का गीत, “पटना के घाट पर देबै अरधिया हे छठी मैया,” इस विदाई को और भी विशेष बना गया, जो उनकी मां की गहरी आस्था को दर्शाता है.