तेजस्वी यादव जाएंगे राज्यसभा? बिहार में RJD की इस रणनीति ने बढ़ाई सियासी हलचल

बिहार की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है. सूत्रों के मुताबिक आरजेडी नेता तेजस्वी यादव को राज्यसभा भेजने की तैयारी कर रही है. हालांकि, 41 विधायकों के जादुई आंकड़े को छूना उनके लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है, जिस पर सबकी नजरें टिकी हैं.

Tejashwi Yadav
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Tejashwi Yadav Rajya Sabha: बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है. सबसे बड़ी चर्चा महागठबंधन के उम्मीदवार को लेकर हो रही है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव आरजेडी की ओर से राज्यसभा के उम्मीदवार बनाए जा सकते हैं. न्यूज़ 18 और हिंदुस्तान की खबरों के हवाले से यह बात सामने आ रही है कि आरजेडी इस बार एक बड़ा सियासी प्रयोग करने के मूड में है. अगर ऐसा होता है, तो बिहार की राजनीति में यह एक बड़ा मोड़ साबित होगा.

आंकड़ों का गणित और बड़ी चुनौती

तेजस्वी यादव के लिए राज्यसभा की राह इतनी आसान नहीं दिख रही है. गणित को समझें तो एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए कम से कम 41 विधायकों के समर्थन की जरूरत होती है. मौजूदा समय में आरजेडी के पास सिर्फ 25 विधायक हैं. अगर महागठबंधन के अन्य सहयोगी दलों को जोड़ लिया जाए, तो यह संख्या 35 तक पहुंचती है. अब सवाल यह है कि बाकी के 6 विधायक कहां से आएंगे? चर्चा है कि यदि एआईएमआईएम के 5 और बीएसपी का 1 विधायक साथ दे दे, तो यह आंकड़ा 41 तक पहुंच सकता है.

दिल्ली जाने के पीछे क्या है आरजेडी की रणनीति

अगर तेजस्वी यादव राज्यसभा जाते हैं, तो सवाल उठता है कि क्या वह बिहार छोड़कर अब केंद्र की राजनीति में सक्रिय होंगे? हाल ही में उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है. विधानसभा चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन वैसा नहीं रहा जैसी उम्मीद थी, ऐसे में जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने की चुनौती अभी भी बरकरार है. जानकारों का मानना है कि राज्यसभा जाने का फैसला आरजेडी की किसी बड़ी आंतरिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है.

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पार्टी की अंदरूनी राजनीति और भविष्य

राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि क्या पार्टी के भीतर चल रहे किसी मतभेद या अंदरूनी कलह को शांत करने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है? क्या तेजस्वी खुद इस फैसले के लिए तैयार होंगे? फिलहाल यह तमाम जानकारियां सूत्रों के हवाले से हैं और अभी आधिकारिक मुहर लगना बाकी है. लेकिन तेजस्वी का राज्यसभा जाना न केवल आरजेडी बल्कि पूरे महागठबंधन के भविष्य की दिशा तय करेगा. अब देखना होगा कि क्या तेजस्वी यादव नामांकन भरते हैं और क्या वह जरूरी समर्थन जुटा पाते हैं.

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