3.25 का फिटमेंट फैक्टर, 7% इंक्रीमेंट... वेतन आयोग से क्या चाहते हैं कर्मचारी संगठन? दिल्ली में कर्मचारी संगठनों ने शुरू किया महामंथन
आठवें वेतन आयोग को लेकर NC-JCM की निर्णायक बैठक शुरू. फिटमेंट फैक्टर 3.68, न्यूनतम वेतन 54,000, 5-7% इंक्रीमेंट, OPS और 20% अंतरिम राहत की बड़ी मांगें. जानिए कर्मचारियों की जेब में कितना बढ़ेगा पैसा.

आठवें वेतन आयोग के लिए सरकार की कंसल्टेशन की पहल शुरू हो चुकी है. सरकार ने हर कर्मचारी को मौका दिया है अपना पक्ष रखने का. कर्मचारी संगठनों ने भी सरकार से की जाने वाली मांगों के लिए महामंथन शुरू किया है. आज से कर्मचारी संगठनों के NC-JCM National Council-Joint Consultative Machinery की वो निर्णायक बैठक शुरू हुई है, जो तय करेगी कि देश के एक करोड़ कर्मचारियों की जेब में कितना पैसा आएगा. कर्मचारी संगठनों ने सरकार के सामने मांगों का ऐसा 'चक्रव्यूह' रचा है जिसे तोड़ना वित्त मंत्रालय के लिए आसान नहीं होगा. क्या ये सिर्फ वेतन वृद्धि है या सरकार के खिलाफ एक बड़ा अल्टीमेटम?
आज की बैठक कोई सामान्य चर्चा नहीं, बल्कि आर-पार की जंग है. NC-JCM के सचिव शिव गोपाल मिश्रा की अध्यक्षता में 8वें वेतन आयोग की ड्राफ्टिंग कमेटी की वो बैठक शुरू हो चुकी है, जिसके बाद कर्मचारियों की मांगें सीधे आठवें वेतन आयोग की अध्यक्ष जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की मेज पर होंगी. ये बैठक 1 घंटे या 2 घंटे की नहीं, बल्कि पूरे एक हफ्ते चलेगी.
सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक का एक ही मकसद है- 'एक देश, एक मांग पत्र'. अलग-अलग मंत्रालयों की सैकड़ों मांगों को छांटकर एक Common Memorandum) तैयार किया जाएगा. अगले 7 दिनों तक कमेटी के सदस्य दिल्ली में ही रहेंगे और हर पे-लेवल, हर भत्ते और पेंशन की बारीकी से समीक्षा करेंगे.
सबसे बड़ी मांग- फिटमेंट फैक्टर
सबसे बड़ी मांग है कि फिटमेंट फैक्टर 3.68 किया जाए. सरकार क्या सोच रही है, इसकी कोई भनक किसी को नहीं है. कर्मचारी संगठनों की दलील है कि आज महंगाई के दौर में 18,000 की सैलरी कुछ नहीं है. इसे बढ़ाकर कम से कम 54,000 किया जाना चाहिए. वेतन आयोग तो हर 10 साल में बनता है, लेकिन हर साल सरकार 3 इंक्रीमेंट देती है. कर्मचारी संगठनों को आगे 3 परसेंट का इंक्रीमेंट मंजूर नहीं. कम से कम 5% या 7 % की मांग है. वेतन आयोग के साथ-साथ पुरानी पेंशन स्कीम OPS लागू करने की भी है. मांग है कि जब तक वेतन आयोग अपनी रिपोर्ट नहीं देता, तब तक कर्मचारियों को 20% अंतरिम राहत (Interim Relief) दी जाए ताकि महंगाई की मार कम हो सके. 30 साल की सेवा में 5 गारंटीड प्रमोशन (6, 12, 18, 24 और 30 साल पर) देने की मांग की गई है.
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भारत सरकार के पांच मंत्रालयों में कुल कर्मचारियों का लगभग 90% हिस्सा काम करता है. रेलवे में करीब 13 लाख कर्मचारी काम करते हैं जिसमें सबसे ज्यादा पद लेवल 1 और 2 के हैं. फिर नंबर आया है गृह मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और पोस्टल का. दिल्ली वाली बैठक में ये सारे मंत्रालयों के संगठन मिलकर एक मांगों का एक फाइनल ड्राफ्ट बनाएंगे जो सरकार तक जाएगा. संगठन कह तो रहे हैं कि 3.00 या 3.25 से नीचे फिटमेंट फैक्टर पर समझौता नहीं करेंगे लेकिन होना वही है जो वेतन आयोग और सरकार तय करेगा.
भारत सरकार में सबसे ज्यादा पद ग्रुप 'सी' (Group 'C') श्रेणी के अंतर्गत आते हैं, जो मुख्य रूप से पे मैट्रिक्स के लेवल 1 से लेवल 5 के बीच होते हैं. केंद्र सरकार के कुल नियमित कर्मचारियों में से लगभग 69% कर्मचारी ग्रुप 'सी' पदों पर हैं. 7वें वेतन आयोग के बाद ज्यादातर ग्रुप 'डी' पदों को अपग्रेड कर ग्रुप 'सी में शामिल किया गया था. केंद्र सरकार के लगभग 95% से 97% कर्मचारी नॉन गैजेटेड कैटेगरी में आते हैं. केवल 3% से 5% कर्मचारी ही Gazetted या ग्रुप 'ए' पदों पर होते हैं. इसलिए सबसे ज्यादा फोकस इस बात पर है कि लोअर लेवल पर कर्मचारियों की मिनिमम सैलरी में बड़ा जंप जाए. बेसिक मिनिमम सैलरी 50 हजार के पार हो जाए.
8वें वेतन आयोग के पास अपनी फाइनल रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 से 24 महीने का समय है. वेतन आयोग ने कर्मचारियों को मौका दिया है कि वो अपनी बात 16 मार्च तक ऑनलाइन पहुंचा सकते हैं. रिपोर्ट चाहे जब आए, सरकार ने कहा हुआ है कि वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से ही लागू होगा. कर्मचारियों को एरियर के साथ पेमेंट किया जाएगा. रिपोर्ट लागू देरी करने में जितनी देरी होगी सरकार को करोड़ों रुपये का एरियर देना भारी पड़ सकता है.
आयोग का प्राथमिक काम केंद्र सरकार के कर्मचारियों के मौजूदा वेतन ढांचे, भत्तों और अन्य सुविधाओं की समीक्षा करना है. इसमें न्यूनतम वेतन (Minimum Pay) और फिटमेंट फैक्टर को महंगाई के मौजूदा स्तर के हिसाब से फिर से परिभाषित करना शामिल है. आयोग को यह मैंडेट दिया गया है कि वह उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI-IW) का विश्लेषण करे. इसका उद्देश्य ये पक्का करना है कि वेतन वृद्धि इतनी हो कि कर्मचारी महंगाई की मार झेल सकें और उनका जीवन स्तर बेहतर हो सके.
आयोग को रिटायर्ड कर्मचारियों (पेंशनभोगियों) की पेंशन संरचना की समीक्षा करने का भी निर्देश है. इसमें ग्रेच्युटी, फैमिली पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों को समय के अनुकूल बनाने का सुझाव देना शामिल है. 8वें वेतन आयोग के मैंडेट में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि वेतन वृद्धि को केवल 'वरिष्ठता' के आधार पर न रखकर 'प्रदर्शन' (Performance) के साथ जोड़ा जाए, ताकि सरकारी सेवाओं की दक्षता बढ़े. आयोग को यह भी देखना होगा कि उसकी सिफारिशों का सरकार के Fiscal Deficit और बजट पर क्या असर पड़ेगा. सिफारिशें ऐसी होनी चाहिए जो व्यावहारिक हों और सरकार के विकास कार्यों के बजट को प्रभावित न करें.
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