Crude Oil Price : $110 के करीब पहुंचा ब्रेंट क्रूड, मिडिल ईस्ट में हमलों से बढ़ी तेल सप्लाई की चिंता

ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब बना हुआ है. मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और सऊदी अरब के ऊर्जा ठिकानों पर हमलों के दावों से सप्लाई की चिंता बढ़ी है, जबकि रूस से अतिरिक्त तेल आने की उम्मीद बाजार को प्रभावित कर रही है.

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Crude Oil Price Today : अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें मंगलवार को 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब बनी रहीं. मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और सऊदी अरब के ऊर्जा ठिकानों पर हमलों के दावों ने तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है. दूसरी तरफ, अमेरिका की ओर से रूस के ऊर्जा निर्यात पर कुछ प्रतिबंधों में ढील दिए जाने से बाजार को अतिरिक्त सप्लाई की उम्मीद है. निवेशक फिलहाल इन दोनों विपरीत संकेतों के बीच तेल की कीमतों की दिशा का आकलन कर रहे हैं.

$110 प्रति बैरल के करीब ब्रेंट क्रूड

मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का भाव 109.70 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था. इसमें 16 सेंट यानी 0.15 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई. वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड का भाव 98.72 डॉलर प्रति बैरल रहा. इसमें 18 सेंट यानी 0.18 फीसदी की तेजी आई. पिछले कारोबारी सत्र में ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर 110.70 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी. यह 20 मई के बाद इसका सबसे ऊंचा स्तर था.तेल की कीमतों में तेजी की मुख्य वजह मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव और संभावित सप्लाई बाधित होने की आशंका है. हालांकि, रूस से ज्यादा तेल और ईंधन बाजार में आने की संभावना कीमतों में तेजी को सीमित कर सकती है.

ट्रंप के फैसले से रूसी तेल की सप्लाई बढ़ने की उम्मीद

तेल बाजार में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रूस से जुड़े फैसले पर भी नजर है. रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने शुक्रवार रात एक कार्यकारी आदेश जारी कर रूस के ऊर्जा निर्यात से जुड़े कुछ अमेरिकी प्रतिबंधों और टैरिफ में छूट दी. इसमें रूसी सामान पर शुल्क और रूस के तेल-गैस की खरीद से जुड़े कुछ दंडात्मक प्रावधान शामिल थे. इस फैसले से बाजार में रूस से अतिरिक्त कच्चे तेल और ईंधन की सप्लाई बढ़ने की उम्मीद पैदा हुई है. अगर ज्यादा तेल बाजार में आता है, तो इससे सप्लाई की कमी को कुछ हद तक दूर करने में मदद मिल सकती है. हालांकि, ट्रंप ने शनिवार को कहा था कि इस मामले में अभी अंतिम फैसला घोषित नहीं किया गया है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी कहा कि अधिकारियों को स्थिति का आकलन करने के लिए और समय चाहिए. इसलिए फिलहाल रूस से अतिरिक्त सप्लाई की संभावना को पक्की स्थिति नहीं माना जा सकता.

रूस में सितंबर के दौरान बढ़ा तेल उत्पादन

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के मुताबिक, रूस का कच्चे तेल का उत्पादन सितंबर में रोजाना 65,000 बैरल बढ़कर 8.43 मिलियन बैरल प्रतिदिन हो गया. हालांकि, उत्पादन में बढ़ोतरी के बावजूद रूस का तेल उत्पादन एक साल पहले के स्तर से रोजाना करीब 870,000 बैरल कम था. रूस से अतिरिक्त सप्लाई आने की उम्मीद तेल की कीमतों पर दबाव डाल सकती है. लेकिन बाजार में कुल उपलब्ध तेल की मात्रा के साथ यह भी अहम है कि मिडिल ईस्ट से होने वाली सप्लाई कितनी सुरक्षित रहती है.

हूती हमलों के दावों से बढ़ी तेल बाजार की चिंता

कच्चे तेल की कीमतों को सहारा देने वाली दूसरी बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता है. यमन के ईरान समर्थित हूती समूह ने सोमवार को दावा किया कि उसने सऊदी अरब के ऊर्जा, हवाई अड्डे और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर कई हमले किए. जिन ठिकानों का नाम लिया गया, उनमें सऊदी अरामको की यानबू स्थित एक सुविधा, शैबा तेल क्षेत्र, रियाद का किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट और अभा एयरपोर्ट शामिल थे. हालांकि, सऊदी अधिकारियों ने तत्काल इन दावों की पुष्टि नहीं की थी. समाचार एजेंसी रॉयटर्स भी इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सकी. इसलिए इन हमलों से जुड़ी जानकारी को हूती समूह के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि स्वतंत्र रूप से पुष्ट तथ्य के रूप में.

यमन में हमले में 58 लोगों की मौत का दावा

रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार को यमन के शबवा प्रांत में सरकारी सुरक्षा बलों के एक ट्रेनिंग कैंप पर हूती समूह के हमले में 58 लोगों की मौत हुई और 200 से ज्यादा लोग घायल हुए. क्षेत्र में जारी संघर्ष और ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाए जाने की आशंका ने तेल बाजार में जोखिम बढ़ा दिया है. तेल कारोबारियों को चिंता है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ता है, तो तेल उत्पादन, भंडारण या परिवहन से जुड़ी सुविधाएं प्रभावित हो सकती हैं. इससे वैश्विक बाजार में तेल की उपलब्धता घटने और कीमतें बढ़ने का खतरा पैदा हो सकता है.

कच्चे तेल की कीमतों पर आगे क्या असर पड़ेगा?

फिलहाल तेल बाजार में दो विपरीत ताकतें काम कर रही हैं. एक तरफ, रूस से अतिरिक्त तेल और ईंधन की सप्लाई बढ़ने की संभावना है. इससे बाजार में उपलब्धता बढ़ सकती है और कीमतों पर दबाव आ सकता है. दूसरी तरफ, मिडिल ईस्ट में तनाव और सऊदी अरब के ऊर्जा ठिकानों पर हमलों के दावों ने सप्लाई बाधित होने की आशंका बढ़ा दी है. इससे तेल की कीमतों को सहारा मिल रहा है.यही वजह है कि अतिरिक्त रूसी सप्लाई की उम्मीद के बावजूद ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब बना हुआ है. आगे कीमतों की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि रूस से अतिरिक्त सप्लाई को लेकर अमेरिकी नीति क्या रहती है और मिडिल ईस्ट में तनाव कितना बढ़ता है. यदि सप्लाई बाधित होने का खतरा बढ़ता है, तो कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव बना रह सकता है. इसके उलट, बाजार में वास्तविक रूप से अतिरिक्त तेल आने और क्षेत्रीय तनाव कम होने पर कीमतों को राहत मिल सकती है.

भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों के लिए कच्चे तेल की ऊंची कीमतें अहम हैं. लंबे समय तक तेल महंगा रहने से आयात बिल, पेट्रोल-डीजल की कीमतों और महंगाई पर दबाव पड़ सकता है. हालांकि, घरेलू ईंधन की कीमतों पर असर रुपये की विनिमय दर, टैक्स और सरकारी या तेल कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीति पर भी निर्भर करता है.