E100 Fuel को सरकार की हरी झंडी, क्या पेट्रोल कार में डाल पाएंगे 100% इथेनॉल?
सरकार ने E100 ईंधन से चलने वाली गाड़ियों के लिए नए नियमों को मंजूरी दे दी है. जानिए E100 ईंधन क्या है, क्या आपकी मौजूदा पेट्रोल कार में इसका इस्तेमाल कर सकते हैं और फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों को लेकर सरकार के इस फैसले से क्या बदलेगा.
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न्यूज़ हाइलाइट्स
E100 ईंधन के लिए सरकार ने बदले नियम
सामान्य पेट्रोल कारों में नहीं डाल सकेंगे E100
फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों के निर्माण को मिलेगा बढ़ावा
पेट्रोल की बढ़ती जरूरत और विदेशों से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार ने एक अहम कदम उठाया है. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने अब E100 ईंधन से चलने वाली गाड़ियों के लिए नियमों में बदलाव कर दिया है. 23 अक्टूबर को जारी अधिसूचना के जरिए E100 को केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में शामिल किया गया है. इससे वाहन कंपनियों के लिए ज्यादा इथेनॉल वाले ईंधन पर चलने वाली गाड़ियां बनाने और बाजार में उतारने का रास्ता साफ होगा.लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अब हर पेट्रोल कार में E100 ईंधन डाला जा सकेगा. इसके लिए गाड़ी का खास तौर पर तैयार होना और जरूरी प्रमाणन मिलना अनिवार्य होगा.
क्या है E100 ईंधन?
E100 ऐसा ईंधन है, जिसमें 100 फीसदी इथेनॉल होता है. इथेनॉल गन्ने और मक्का जैसे कृषि उत्पादों से बनाया जा सकता है. वहीं, E20 पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल और 80 फीसदी पेट्रोल होता है. सरकार पहले ही पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल मिलाने का लक्ष्य हासिल कर चुकी है. अब E100 को नियमों में शामिल करने से ज्यादा इथेनॉल वाले ईंधन पर चलने वाली गाड़ियों के विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
क्या आपकी मौजूदा पेट्रोल कार में डल सकेगा E100?
सामान्य पेट्रोल कारों में E100 या E85 ईंधन का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा. यहां तक कि E20 पेट्रोल के लिए बनी गाड़ियों में भी इन ईंधनों का इस्तेमाल तभी हो सकता है, जब गाड़ी को खास तौर पर इनके लिए तैयार किया गया हो और प्रमाणन मिला हो. E85 में लगभग 85 फीसदी इथेनॉल और 15 फीसदी पेट्रोल होता है. E100 में लगभग पूरा ईंधन इथेनॉल होता है. इन ईंधनों के लिए इंजन, ईंधन प्रणाली और दूसरे जरूरी हिस्सों को उसी हिसाब से तैयार करना पड़ता है.इसलिए वाहन मालिकों को अपनी मौजूदा कार में E100 डालने से पहले कंपनी की मंजूरी और गाड़ी के प्रमाणन की जानकारी जरूर देखनी चाहिए.
क्या होते हैं फ्लेक्स-फ्यूल वाहन?
फ्लेक्स-फ्यूल वाहन ऐसे वाहन होते हैं, जिन्हें पेट्रोल और इथेनॉल के अलग-अलग मिश्रण पर चलने के लिए तैयार किया जाता है. इनकी तकनीक सामान्य पेट्रोल कारों से अलग होती है.सरकार के नए नियमों में E85 और E100 दोनों ईंधनों को शामिल किया गया है. इससे वाहन कंपनियों को ऐसे मॉडल तैयार करने में मदद मिलेगी, जो ज्यादा मात्रा में इथेनॉल वाले ईंधन पर चल सकें.
किन कंपनियों की तैयारी?
भारत में वाहन कंपनियां फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक पर काम कर रही हैं. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, जून 2026 में मारुति सुजुकी ने वैगनआर फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल पेश किया था, जिसे E20 से E100 तक के इथेनॉल-पेट्रोल मिश्रण पर चलाने के लिए तैयार किया गया है.टोयोटा, टाटा मोटर्स और हुंडई जैसी कंपनियां भी भारतीय बाजार के लिए फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों पर काम कर रही हैं. हालांकि, अलग-अलग मॉडलों की उपलब्धता और बिक्री की तारीख कंपनी की घोषणा पर निर्भर करेगी.
सरकार ने नियमों में क्या बदलाव किए?
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन करके E100 को ईंधन के मानकों, उत्सर्जन संबंधी प्रावधानों और वाहन परीक्षण प्रक्रिया में शामिल किया है. नियमों में ये भी साफ किया गया है कि E85 और E100 का इस्तेमाल केवल उन्हीं वाहनों में होगा, जिन्हें वाहन निर्माता ने इन ईंधनों के लिए तैयार किया है और जिन्हें जरूरी प्रमाणन मिला है. इसके अलावा, संशोधन के तहत वाहन का अधिकतम सकल वजन 3,000 किलोग्राम से बढ़ाकर 3,500 किलोग्राम किया गया है.
E100 से आम लोगों को क्या फायदा?
E100 को नियमों में शामिल करने का एक बड़ा उद्देश्य भारत की कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना है. भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है. ऐसे में घरेलू स्तर पर बनने वाले इथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ने से पेट्रोल की मांग और आयात पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है.इथेनॉल के इस्तेमाल से प्रदूषण घटाने में भी मदद मिल सकती है, हालांकि वास्तविक फायदा गाड़ी के इंजन, ईंधन उत्पादन और उसके पूरे जीवनचक्र में होने वाले उत्सर्जन पर निर्भर करेगा.सरकार के मुताबिक, भारत में इथेनॉल उत्पादन की कुल क्षमता करीब 2,000 करोड़ लीटर है. तेल विपणन कंपनियों ने E20 की जरूरत पूरी करने के लिए सालाना 1,100 करोड़ लीटर से ज्यादा इथेनॉल की खरीद के लिए निविदाएं जारी की हैं.
