Equitas SFB Share: मुनाफा 803% बढ़ा, CEO ने दिया इस्तीफा तो शेयर में लग गया लोअर सर्किट ?
इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक के सीईओ पीएन वासुदेवन के इस्तीफे के बाद शेयर 18.8 फीसदी गिरा. मजबूत मुनाफे के बावजूद नए नेतृत्व और घटते मार्जिन ने चिंता बढ़ाई.
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न्यूज़ हाइलाइट्स
बैंक का कुल कारोबार एक लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचा
कुल कर्ज सालाना 30 फीसदी बढ़कर 50,669 करोड़ रुपये हुआ
सितंबर तिमाही में शुद्ध मुनाफा 218 करोड़ रुपये दर्ज हुआ
किसी बैंक के CEO का अचानक इस्तीफा आमतौर पर निवेशकों के मन में कई सवाल खड़े कर देता है. क्या बैंक की वित्तीय हालत कमजोर है? क्या खराब कर्ज बढ़ रहा है या फिर कोई गड़बड़ी सामने आई है? लेकिन Equitas Small Finance Bank के CEO पी.एन. वासुदेवन के इस्तीफे की वजह कुछ अलग थी. उनका मानना था कि उनके पद पर बने रहने से निवेशकों के मन में बनी एक धारणा बैंक की वैल्यूएशन को प्रभावित कर सकती है. उन्होंने इसी चिंता को दूर करने के लिए पद छोड़ने का फैसला किया. हालांकि, उनके इस्तीफे के बाद बैंक का शेयर चढ़ने के बजाय दो कारोबारी सत्रों में करीब 18.8 फीसदी टूट गया.
CEO के इस्तीफे के बाद शेयर में क्यों आई गिरावट?
29 अक्टूबर को इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद Equitas के शेयर में तेज बिकवाली हुई. शेयर इंट्राडे में 20 फीसदी तक गिरकर लोअर सर्किट पर पहुंच गया. हालांकि, बाद में रिकवरी आई और यह 12.22 फीसदी गिरकर 57.17 रुपये पर बंद हुआ. अगले कारोबारी सत्र में शेयर 49.20 रुपये पर खुला और 52.82 रुपये पर बंद हुआ.
यानी 65.05 रुपये के पिछले बंद भाव से दो सत्रों में शेयर करीब 18.8 फीसदी नीचे आ गया. शुक्रवार को इंट्राडे में शेयर 47.32 रुपये तक भी फिसला था, लेकिन वहां बंद नहीं हुआ.
बेटी की दूसरी कंपनी से जुड़ाव बना निवेशकों की चिंता
वासुदेवन की बेटी वर्षिणी वासुदेवन पथांगी, Unico Housing Finance की को-प्रमोटर हैं. वहीं, वासुदेवन खुद Equitas Small Finance Bank के CEO थे. इस पारिवारिक जुड़ाव को लेकर निवेशकों के मन में हितों के टकराव की आशंका थी.
वासुदेवन के मुताबिक, इस रिश्ते की जानकारी बैंक के बोर्ड और RBI को पहले ही दी गई थी. उनका कहना था कि दोनों कंपनियों के बीच कोई मौजूदा कारोबारी लेनदेन नहीं था. करीब दो साल पहले एक शॉर्ट-टर्म डिपॉजिट जरूर हुआ था, जिसे मैच्योरिटी पर चुका दिया गया था. इसके बावजूद निवेशकों के बीच बनी धारणा को लेकर चिंता बनी रही. वासुदेवन का मानना था कि उनके पद छोड़ने से यह सवाल खत्म हो सकता है.
कारोबार और मुनाफे के आंकड़े क्या बता रहे हैं?
इस्तीफे के समय बैंक के कारोबारी आंकड़े कमजोर नहीं दिख रहे थे. बैंक का कुल कारोबार एक लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका था. सितंबर 2026 तिमाही में ग्रॉस एडवांसेज सालाना आधार पर 30 फीसदी बढ़कर 50,669 करोड़ रुपये हो गए.
बैंक के वित्तीय नतीजों पर नजर डालें तो:
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नेट प्रॉफिट: ₹24.13 करोड़ से बढ़कर ₹218 करोड़.
NII: सालाना आधार पर 33 फीसदी की बढ़ोतरी.
ऑपरेटिंग प्रॉफिट: प्रोविजन से पहले 67 फीसदी बढ़ा.
प्रोविजन: पिछले साल के मुकाबले करीब 44.5 फीसदी कम.
मुनाफे में 803 फीसदी की बढ़ोतरी बड़ी दिखती है, लेकिन इसकी तुलना पिछले साल के कम आधार से भी करनी चाहिए. साथ ही, NII और ऑपरेटिंग प्रॉफिट में बढ़ोतरी बताती है कि मुख्य कारोबार ने भी बेहतर प्रदर्शन किया.
कम वैल्यूएशन की वजह क्या थी?
बैंक की वैल्यूएशन समझने के लिए P/E और P/B Ratio जैसे पैमाने देखे जा सकते हैं. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, Equitas का P/E Ratio करीब 14.5 गुना था, जबकि AU Small Finance Bank का करीब 20.2 गुना. इसी तरह Equitas का P/B Ratio करीब 1.2 गुना था, जबकि AU Small Finance Bank का 3.5 गुना से ज्यादा.
इसका मतलब है कि बाजार Equitas के मुनाफे और नेटवर्थ के मुकाबले उसे कम कीमत दे रहा था. हालांकि, सिर्फ इन अनुपातों के आधार पर कम वैल्यूएशन की वजह तय नहीं की जा सकती. बैंक की ग्रोथ, जोखिम, कमाई और निवेशकों का भरोसा भी इसमें भूमिका निभाते हैं. वासुदेवन को आशंका थी कि उनसे जुड़ी धारणा भी इस वैल्यूएशन पर असर डाल रही है.
छह साल में बैंक की वित्तीय सेहत कितनी बदली?
लंबी अवधि के आंकड़ों पर नजर डालें तो Q2 FY21 से Q2 FY27 के बीच बैंक की शुद्ध ब्याज आय यानी NII 461 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,026 करोड़ रुपये हो गई. इसी अवधि में नेट प्रॉफिट 103 करोड़ से बढ़कर 218 करोड़ रुपये और प्रोविजन से पहले ऑपरेटिंग प्रॉफिट 220 करोड़ से बढ़कर 402 करोड़ रुपये पहुंच गया.
खराब कर्ज के मोर्चे पर भी सुधार दिखा. ग्रॉस NPA 2.39 फीसदी से घटकर 2.29 फीसदी और नेट NPA 1 फीसदी से कम होकर 0.70 फीसदी रह गया.
लेकिन एक चुनौती भी है. बैंक माइक्रोफाइनेंस के मुकाबले सुरक्षित कर्ज यानी Secured Lending पर ज्यादा जोर दे रहा है. इससे कर्ज डूबने का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है, लेकिन कमाई का मार्जिन भी प्रभावित हो सकता है. इसका एक संकेत NIM में दिखता है, जो छह साल पहले के 9.02 फीसदी से घटकर 6.69 फीसदी रह गया है.
नए CEO के सामने भरोसा लौटाने की चुनौती
अब निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि वासुदेवन के बाद बैंक की कमान किसे मिलती है और नया नेतृत्व मौजूदा रणनीति को किस तरह आगे बढ़ाता है. बैंक को एक तरफ कर्ज की गुणवत्ता में सुधार बनाए रखना है, तो दूसरी तरफ घटते मार्जिन के बीच कमाई की रफ्तार भी कायम रखनी होगी.
ब्रोकरेज फर्म Motilal Oswal ने शेयर पर Buy की सलाह बरकरार रखते हुए 75 रुपये का टारगेट दिया है. करीब 50 रुपये के संदर्भ भाव पर यह लगभग 50 फीसदी की संभावित बढ़त दिखाता है. हालांकि, ब्रोकरेज का टारगेट अनुमान है, इसकी गारंटी नहीं.
निवेशकों को खास तौर पर इन तीन बातों पर नजर रखनी चाहिए:
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नए CEO की नियुक्ति और बैंक की आगे की रणनीति.
NPA में सुधार जारी रहता है या नहीं.
NIM में गिरावट के बावजूद बैंक मुनाफे की रफ्तार बनाए रख पाता है या नहीं.
Equitas की कहानी बताती है कि शेयर बाजार में सिर्फ मुनाफा बढ़ना काफी नहीं होता. निवेशकों को कंपनी के नेतृत्व, जोखिम और भविष्य की कमाई पर भी भरोसा चाहिए. इसलिए केवल शेयर की गिरावट देखकर खरीदारी का फैसला करना सही नहीं होगा. बैंक के नए नेतृत्व और आने वाली तिमाहियों के प्रदर्शन से ही यह साफ होगा कि मौजूदा कीमत पर निवेश का कितना आकर्षण है.
