भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों का मोहभंग! 65 अरब डॉलर निकाले, ग्लोबल रेस में क्यों पिछड़ रहा भारत?
विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 65 अरब डॉलर निकाले. जानिए आकाश प्रकाश के मुताबिक भारत में FPI बिकवाली, घटते MSCI वेटेज और AI की चुनौती की 5 बड़ी वजहें.
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न्यूज़ हाइलाइट्स
विदेशी निवेशकों ने निकाले 65 अरब डॉलर
डॉलर टर्मे में भारतीय शेयरों का प्रदर्शन कमजोर
MSCI इंडेक्स में भारत की हिस्सेदारी घटी
AI की दौड़ में भारत पीछे रह गया
भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों की दूरी बढ़ रही है. सितंबर 2024 के बाद से विदेशी निवेशक करीब 65 अरब डॉलर निकाल चुके हैं. जाने-माने निवेशक आकाश प्रकाश ने बिजनेस स्टैंडर्ड के अपने लेख में इस पर चिंता जताई है. उनके मुताबिक, सवाल सिर्फ बिकवाली का नहीं, बल्कि ग्लोबल निवेशकों की प्राथमिकता में भारत की घटती अहमियत का भी है.
विदेशी निवेशकों की बेरुखी क्यों?
आकाश प्रकाश के मुताबिक, सितंबर 2024 के बाद भारतीय शेयर डॉलर में करीब 25 फीसदी टूटे, जबकि उभरते बाजारों के इंडेक्स करीब 50 फीसदी चढ़े. विदेशी निवेशकों के पास मौजूद भारतीय शेयरों की बाजार कीमत भी करीब 930 अरब डॉलर से घटकर 675 अरब डॉलर रह गई है. इसमें शेयरों की कीमतों में बदलाव का असर भी शामिल है.MSCI Emerging Markets Index में भारत का वजन सितंबर 2024 के करीब 21 फीसदी से घटकर लगभग 10 फीसदी रह गया है. प्रकाश के मुताबिक, कई ग्लोबल फंड अब भारत में अपने बेंचमार्क के मुकाबले कम निवेश कर रहे हैं.
AI की दौड़ में भारत पीछे?
विदेशी निवेशकों की बदलती पसंद की एक वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का बढ़ता कारोबार है. चिप और AI से जुड़ी मांग का फायदा ताइवान और दक्षिण कोरिया की कंपनियों को मिल रहा है.प्रकाश के मुताबिक, TSMC, सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और SK Hynix का MSCI इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स में संयुक्त वजन करीब 30 फीसदी है, जो भारत के वजन का लगभग तीन गुना है. इससे ग्लोबल निवेश में टेक्नोलॉजी कंपनियों की बढ़ती अहमियत का पता चलता है.
भारत के लिए पांच बड़ी चुनौतियां
1. ग्लोबल इंडेक्स में भारत का घटता वजन: भारत का वजन कम होने से कुछ फंड मैनेजरों के लिए यहां कम निवेश रखने का जोखिम भी घट जाता है. ऐसे में भारत में अलग से बड़ी रकम लगाने की जरूरत पहले जैसी नहीं रह जाती.
2. डॉलर में कम रिटर्न: प्रकाश के मुताबिक, भारतीय शेयरों का पिछले 20 साल का सालाना रिटर्न रुपये में करीब 10.5 फीसदी रहा. लेकिन रुपये की कमजोरी और टैक्स के असर को शामिल करने पर विदेशी निवेशकों का डॉलर में रिटर्न काफी कम रह जाता है. ये रिटर्न करीब 6 फीसदी रह जाता है. ये हर निवेशक का वास्तविक रिटर्न नहीं.
3. टैक्स का असर: विदेशी निवेशकों के लिए कैपिटल गेन टैक्स और दूसरे कर लंबी अवधि के रिटर्न को प्रभावित करते हैं. प्रकाश के मुताबिक, टैक्स के कारण अनुमानित सालाना रिटर्न में करीब 2 फीसदी अंक तक की कमी आ सकती है.
4. नियमों और कंप्लायंस से जुड़ी चिंताएं: लेख के मुताबिक, भारत की नियामकीय व्यवस्था और कुछ सर्विस प्रोवाइडर्स के कामकाज को लेकर ग्लोबल निवेशकों की रिस्क और कंप्लायंस टीमों में चिंताएं हैं. ये निवेशकों की धारणा से जुड़ा मुद्दा है, न कि सभी विदेशी फंडों की एक जैसी राय.
5. AI और रिसर्च में भारत की भूमिका: प्रकाश का मानना है कि AI के दौर में भारत के सामने चुनौती है. भारतीय बाजार में बैंकिंग, IT सेवाओं और घरेलू खपत से जुड़ी कंपनियों का बड़ा योगदान है, जबकि AI से जुड़े चिप और तकनीकी कारोबार का फायदा कुछ दूसरे एशियाई बाजारों को ज्यादा मिल रहा है. भारत में इनोवेशन और रिसर्च एंड डेवलपमेंट यानी R&D को मजबूत करना इस अंतर को कम करने के लिए अहम हो सकता है.
क्या बदल सकती है तस्वीर?
प्रकाश के मुताबिक, भारत न तो वैल्यू निवेशकों को पर्याप्त सस्ता दिखता है और न ही ग्रोथ निवेशकों को इसकी कमाई की रफ्तार काफी तेज लगती है. हालांकि, अत्यधिक निराशा कभी-कभी बाजार में पलटाव का संकेत भी बन सकती है.भारतीय बाजार को विदेशी निवेशकों का भरोसा दोबारा जीतने के लिए कंपनियों की कमाई, उचित वैल्यूएशन और तकनीक व रिसर्च में निवेश पर ध्यान देना होगा.
कौन हैं आकाश प्रकाश?
आकाश प्रकाश जाने-माने निवेशक हैं और सिंगापुर की इंवेस्टमेंट मैनेजमेंट कंपनी Amansa Capital के CEO हैं. उन्हें भारतीय शेयर बाजार में 30 साल से ज्यादा का अनुभव है और वे वैश्विक निवेश रणनीतियों के जानकार माने जाते हैं. वे शेयर बाजार, निवेश और अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर लेख लिखते हैं.
