Gold ETF में लगातार 13वें हफ्ते आया पैसा, चीन और अमेरिका के निवेशकों ने बढ़ाया निवेश; ₹1.45 लाख के स्तर पर सोने का सपोर्ट

गोल्ड ETF में लगातार 13वें हफ्ते शुद्ध निवेश आया है. चीन और अमेरिका के निवेशकों ने सबसे ज्यादा योगदान दिया. जानिए सोने की कीमतों, ETF निवेश, अहम सपोर्ट लेवल और आगे के आउटलुक से जुड़ी पूरी जानकारी.

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Gold ETF Inflows : सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद गोल्ड ETF में निवेशकों का भरोसा बना हुआ है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) के आंकड़ों के मुताबिक, गोल्ड ETF में लगातार 13वें हफ्ते नेट इनफ्लो दर्ज किया गया. पिछले हफ्ते निवेशकों ने गोल्ड ETF में करीब 1.91 अरब डॉलर का शुद्ध निवेश किया. चीन और अमेरिका के निवेशकों ने इसमें अहम योगदान दिया. वहीं, सोने की कीमतें अपने रिकॉर्ड हाई से 25 फीसदी से ज्यादा नीचे आ चुकी हैं.

गोल्ड ETF में लगातार 13वें हफ्ते नेट इनफ्लो

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, पिछले हफ्ते फिजिकल गोल्ड से समर्थित ETF में करीब 2.3 अरब डॉलर का निवेश आया. हालांकि, इसी दौरान निवेशकों ने करीब 479 मिलियन डॉलर की निकासी भी की. इसके बाद गोल्ड ETF में शुद्ध निवेश लगभग 1.91 अरब डॉलर रहा.

यह लगातार 13वां हफ्ता है, जब गोल्ड ETF में निवेश निकासी से ज्यादा रहा. इससे संकेत मिलता है कि कीमतों में गिरावट और अस्थिरता के बावजूद निवेशक सोने में निवेश के अवसर तलाश रहे हैं.

विशेषज्ञों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 4,200 डॉलर प्रति औंस से नीचे रहने के कारण कुछ निवेशकों को इसमें खरीदारी का मौका दिख रहा है. बाजार में 4,000 डॉलर प्रति औंस के आसपास सोने को अहम सपोर्ट मिलने की उम्मीद भी जताई जा रही है.

सोने की कीमत में गिरावट, फिर भी निवेशकों का भरोसा कायम

मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत करीब 4,145 डॉलर प्रति औंस रही. यह पिछले एक महीने में 4 फीसदी से ज्यादा नीचे थी, जबकि पिछले एक हफ्ते में इसमें करीब 0.5 फीसदी की गिरावट आई.

Aspect Bullion & Refinery के CEO दर्शन देसाई के मुताबिक, सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, हालांकि हाल में कीमतों ने कुछ रिकवरी भी दिखाई है. अमेरिका में महंगाई, ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें, डॉलर की चाल और बॉन्ड यील्ड सोने की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक बने हुए हैं. इसके अलावा, भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी बाजार में अनिश्चितता बढ़ा रहे हैं.

Augmont की चीफ रिसर्च ऑफिसर रेनिशा चेनानी के मुताबिक, पिछले हफ्ते सोने की कीमत एक सीमित दायरे में रही. अमेरिका में महंगाई के ऊंचे आंकड़ों ने दिसंबर में फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरें बढ़ाए जाने की आशंका को मजबूत किया. बाजार में दिसंबर में दरें बढ़ने की संभावना करीब 90 फीसदी आंकी जा रही थी, जबकि अमेरिका की 10 साल की बॉन्ड यील्ड 5.1 फीसदी से ऊपर रही. इससे सोने की कीमतों में तेजी सीमित रही.

चीन और अमेरिका के निवेशकों ने गोल्ड ETF में लगाया पैसा

पिछले हफ्ते गोल्ड ETF में निवेश के मामले में अमेरिका और चीन के निवेशक सबसे आगे रहे.

  • अमेरिका: करीब 1 अरब डॉलर का निवेश.

  • चीन: करीब 498 मिलियन डॉलर का निवेश.

  • ब्रिटेन: करीब 237 मिलियन डॉलर का निवेश.

  • जापान: करीब 141.8 मिलियन डॉलर का निवेश.

  • फ्रांस: करीब 44 मिलियन डॉलर की निकासी.

  • साल 2026 में अब तक एशिया और यूरोप गोल्ड ETF में निवेश के बड़े स्रोत रहे हैं. एशियाई निवेशकों ने कुल 18.38 अरब डॉलर का निवेश किया, जबकि यूरोप से 17.62 अरब डॉलर का निवेश आया.

    देशों के हिसाब से चीन सबसे आगे रहा. यहां गोल्ड ETF में साल की शुरुआत से अब तक निवेश 10.41 अरब डॉलर तक पहुंच गया. ब्रिटेन में यह आंकड़ा 9.8 अरब डॉलर और अमेरिका में 5.22 अरब डॉलर रहा.

    भारत में गोल्ड ETF में साल-दर-तारीख निवेश करीब 4.7 अरब डॉलर रहा, जो दिए गए आंकड़ों के अनुसार देशों में चौथा सबसे बड़ा आंकड़ा है. हालांकि, भारत के लिए साप्ताहिक निवेश के आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं.

    इसके अलावा, स्विट्जरलैंड में 3.56 अरब डॉलर, जर्मनी में 2.42 अरब डॉलर, फ्रांस में 1.77 अरब डॉलर और जापान में 1.06 अरब डॉलर का निवेश दर्ज किया गया.

    सोने के लिए ₹1.45 लाख से ₹1.51 लाख तक अहम दायरा

    एक्सपर्ट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के लिए 3,950 से 4,200 डॉलर प्रति औंस का दायरा अहम है. भारतीय रुपये में यह लगभग ₹1,45,500 से ₹1,51,000 प्रति 10 ग्राम के स्तर के बराबर बताया गया है. कोठारी के अनुसार, त्योहारों के दौरान मांग और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी से कीमतों में गिरावट आने पर खरीदारी को सहारा मिल सकता है. धनतेरस के करीब आने के साथ घरेलू मांग पर भी निवेशकों की नजर रहेगी. हालांकि, यह सपोर्ट का अनुमान है, कीमतों की गारंटी नहीं. अंतरराष्ट्रीय सोने के भाव, डॉलर-रुपये की विनिमय दर और घरेलू टैक्स व अन्य लागतों के कारण भारत में वास्तविक कीमतें अलग हो सकती हैं.

    सोना अपने रिकॉर्ड हाई से 25% से ज्यादा नीचे

    साल 2024 से जनवरी 2026 के बीच सोने की कीमतों में जोरदार तेजी आई थी. इसके पीछे अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद, भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका के दूसरे देशों के साथ व्यापारिक विवाद जैसे कारण थे. इस दौरान सोने की कीमत बढ़कर 5,608 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई. लेकिन 28 फरवरी को ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से सोने ने अपनी तेजी का 25 फीसदी से ज्यादा हिस्सा गंवा दिया.सोने की कीमतों में गिरावट के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं. महंगाई की चिंता, बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और ऊंची ब्याज दरों की आशंका ने सोने पर दबाव डाला है. इसके अलावा, कुछ निवेशकों ने कीमती धातुओं के बजाय कच्चे तेल में निवेश का रुख किया है. वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर बनी निराशा ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया है.

    आगे किन बातों पर रहेगी बाजार की नजर?

    आने वाले दिनों में अमेरिकी हाउसिंग डेटा, बेरोजगारी भत्ते के साप्ताहिक दावे, शुरुआती PMI आंकड़े और फेडरल रिजर्व के अधिकारियों की टिप्पणियां सोने की कीमतों के लिए अहम रहेंगी. 28 अक्टूबर के फेडरल रिजर्व फैसले से पहले ब्याज दरों को लेकर संकेतों पर खास नजर रहेगी. कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी सोने की दिशा को प्रभावित कर सकता है.

    दर्शन देसाई के मुताबिक, अगर डॉलर कमजोर होता है और बॉन्ड यील्ड नीचे आती है, तो सोने की कीमतों को सहारा मिल सकता है. इसके उलट, महंगाई की चिंता बढ़ने और ब्याज दरें ऊंची रहने की आशंका से सोने में और गिरावट आ सकती है. कुल मिलाकर, गोल्ड ETF में लगातार 13वें हफ्ते शुद्ध निवेश यह दिखाता है कि निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है. लेकिन सोने की कीमतें अभी भी महंगाई, डॉलर, बॉन्ड यील्ड और फेडरल रिजर्व के फैसलों से प्रभावित हो रही हैं. निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि ETF में लगातार निवेश आने का मतलब यह नहीं है कि सोने की कीमतें आगे जरूर बढ़ेंगी.