Gold-Silver: केंद्रीय बैंक खरीद रहे जमकर सोना, क्या आने वाले समय में कुछ बड़ा होने वाला है?
Gold-Silver: पिछले कुछ समय से देखा जा रहा है कि सोना गिरता जरूर है, लेकिन हर गिरावट के बाद फिर मजबूती से वापसी करता है. इसकी बड़ी वजह बताई है World Gold Council के सीईओ डेविट ने.

Gold-Silver: कमोडिटी बाजार में 27 फरवरी को सोना और चांदी ने बड़ा दांव खेला. Multi Commodity Exchange of India (MCX) पर सुबह के कारोबार में सोना करीब 900 रुपये तक उछल गया और कीमत लगभग 1 लाख 60 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गई. लेकिन असली चमक चांदी में दिखी. मार्च वायदा में चांदी एक ही दिन में 7 से 8 हजार रुपये तक चढ़ गई और दाम 2 लाख 65 हजार से लेकर 2 लाख 75 हजार रुपये प्रति किलो के दायरे में पहुंच गए. इस तेज उछाल ने निवेशकों का ध्यान फिर से कीमती धातुओं की ओर खींच लिया है.
क्यों बार-बार संभल जाता है सोना?
पिछले कुछ समय से देखा जा रहा है कि सोना गिरता जरूर है, लेकिन हर गिरावट के बाद फिर मजबूती से वापसी करता है. इसकी बड़ी वजह बताई है World Gold Council के सीईओ डेविड टेट ने. उनके मुताबिक दुनिया में बढ़ता जियोपॉलिटिकल तनाव सोने को ताकत दे रहा है. कई देशों में हालात अस्थिर हैं, बाजार में उतार-चढ़ाव तेज है और निवेशकों के बीच अनिश्चितता बनी हुई है. ऐसे माहौल में लोग ‘सेफ हेवन’ यानी सुरक्षित निवेश की तरफ भागते हैं और सोना सबसे पहले याद आता है.
सिर्फ निवेशक नहीं, केंद्रीय बैंक भी खरीद रहे हैं
टेट ने यह भी कहा कि केवल आम निवेशक ही नहीं, बल्कि कई देशों के केंद्रीय बैंक भी लगातार सोना जमा कर रहे हैं. जब कोई देश का सेंट्रल बैंक गोल्ड रिजर्व बढ़ाता है तो इसका मतलब साफ होता है कि भविष्य को लेकर सतर्कता और डॉलर पर निर्भरता कम करने की रणनीति. यह लंबी अवधि में सोने को मजबूत आधार देता है.
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चीन, भारत और जापान से बढ़ती मांग
चीन में हाल में नीतिगत ढील के बाद गोल्ड मार्केट में ज्यादा निवेशकों की एंट्री हुई है. चीन दुनिया के बड़े गोल्ड उपभोक्ताओं में शामिल है, ऐसे में वहां की मांग का असर वैश्विक कीमतों पर पड़ना तय है.
भारत में भी गोल्ड ETF का चलन तेजी से बढ़ा है. ETF के जरिए बिना फिजिकल सोना खरीदे, शेयर बाजार के माध्यम से निवेश किया जा सकता है. इससे लॉकर, मेकिंग चार्ज या सुरक्षा की चिंता नहीं रहती. मोबाइल से खरीदो और पोर्टफोलियो में गोल्ड जोड़ लो. यही सोच नई पीढ़ी को आकर्षित कर रही है.
जापान में भी पीढ़ीगत बदलाव का असर दिख रहा है. पुरानी पीढ़ी से नई पीढ़ी के पास संपत्ति जा रही है और नई पीढ़ी ज्यादा डायवर्सिफाइड निवेश पसंद करती है. उसमें सोने की हिस्सेदारी बढ़ रही है.
चेतावनी भी जरूरी
हालांकि डेविड टेट ने साफ किया कि लंबी अवधि में सोने का आधार मजबूत दिखता है, लेकिन छोटी अवधि में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है. ब्याज दरों में बदलाव, डॉलर की चाल, युद्ध जैसे हालात और वैश्विक आर्थिक संकेतक ये सब कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं. यानी सोना सुरक्षित तो है, लेकिन पूरी तरह स्थिर नहीं.
सोने का भविष्य डिजिटल
टेट ने एक और अहम बात कही कि सोने का भविष्य डिजिटल है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल एक ऐसा डेटाबेस तैयार कर रही है, जिससे यह ट्रैक किया जा सकेगा कि सोना किस खदान से निकला, कैसे रिफाइन हुआ और किस तरह बाजार तक पहुंचा. इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा.
जियोपॉलिटिकल तनाव, केंद्रीय बैंकों की खरीद, चीन और भारत से बढ़ती मांग, जापान में पीढ़ीगत बदलाव और डिजिटल पारदर्शिता ये सभी कारक सोने को सपोर्ट दे रहे हैं. लेकिन निवेशकों को यह समझना होगा कि रैली सीधी रेखा में नहीं चलेगी. झटके भी आएंगे और कीमतें ऊपर-नीचे भी होंगी. फिलहाल इतना साफ है कि सोना अब सिर्फ आभूषण नहीं, बल्कि ग्लोबल स्ट्रेटेजी का हिस्सा बन चुका है.
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