Gold-Silver Price Today : ट्रंप की पार्टी की हार के बाद सोने-चांदी में तूफानी तेजी, MCX पर सोना ₹2,500 और चांदी ₹5,575 महंगी

अमेरिकी मिडटर्म चुनावों में डोनल्ड ट्रंप की पार्टी को झटका लगने के बाद सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिली. COMEX पर सोना 4,017 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गया, जबकि चांदी 51 डॉलर के ऊपर निकल गई. MCX पर सोना 2,500 रुपये उछलकर 1,41,990 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 5,575 रुपये बढ़कर 1,85,499 रुपये प्रति किलो पहुंच गई.

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अमेरिकी मिडटर्म चुनावों में राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की पार्टी को बड़ा झटका लगा है. चुनाव में विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत के बाद अंतरराष्ट्रीय और भारतीय कमोडिटी बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिली. चुनाव नतीजे सामने आने के तुरंत बाद दोनों कीमती धातुओं के दाम उछल गए. अंतरराष्ट्रीय बाजार से लेकर भारत के वायदा बाजार तक सोना और चांदी हरे निशान में कारोबार करते नजर आए.

हालांकि, इससे पहले सोने और चांदी की कीमतों पर लगातार दबाव बना हुआ था. दोनों धातुएं अपने रिकॉर्ड हाई से काफी नीचे आ चुकी थीं. ऐसे में सवाल है कि अमेरिकी चुनाव के नतीजों से सोने-चांदी की कीमतों को इतना बड़ा सपोर्ट क्यों मिला? और क्या यह तेजी आगे भी जारी रह सकती है?

अमेरिकी चुनाव में ट्रंप की पार्टी को झटका, सोने-चांदी में तेजी

अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के नतीजों में विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने सीनेट में 51 सीटें और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में 218 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया. इस राजनीतिक बदलाव का असर वैश्विक बाजारों में भी दिखाई दिया.

अंतरराष्ट्रीय बाजार यानी COMEX पर सोने की कीमत करीब 2 फीसदी उछलकर 76 डॉलर की तेजी के साथ 4,017 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गई. वहीं, चांदी में करीब 3.03 फीसदी की तेजी आई और इसकी कीमत 51 डॉलर प्रति औंस के ऊपर निकल गई.

भारतीय वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर भी तेजी का असर साफ दिखाई दिया.

सुबह 11:45 बजे तक MCX पर सोना 1.73 फीसदी यानी 2,500 रुपये महंगा होकर 1,41,990 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया. दूसरी तरफ, चांदी की कीमत में 3.10 फीसदी की तेजी दर्ज की गई. यह 5,575 रुपये उछलकर 1,85,499 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई.

ट्रंप की हार से सोने-चांदी की कीमतों को कैसे मिला सपोर्ट?

कमोडिटी बाजार के जानकारों के मुताबिक, अमेरिकी चुनाव में ट्रंप की पार्टी को मिली हार ने बाजार की उम्मीदों और राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित किया है.

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस नतीजे के बाद मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध को खत्म करने की कोशिशों को गति मिल सकती है. युद्ध से जुड़ी अनिश्चितता और वैश्विक सप्लाई पर पड़ने वाले असर को लेकर बाजार में पहले से चिंता बनी हुई थी.

ऐसे में चुनाव नतीजों के बाद संभावित भू-राजनीतिक बदलावों को लेकर निवेशकों ने अपनी रणनीति बदली. इसका असर सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं की कीमतों में तेजी के रूप में दिखाई दिया.

हालांकि, बाजार में तेजी के पीछे सिर्फ एक राजनीतिक घटनाक्रम को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता. निवेशकों की धारणा, डॉलर की चाल, ब्याज दरों की उम्मीदें और वैश्विक तनाव जैसे कई कारक भी सोने-चांदी की कीमतों को प्रभावित करते हैं.

भारत में सोने की मांग 2020 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच सकती है

सोने की कीमतों में तेजी के बीच भारत में इसकी मांग को लेकर एक अलग तस्वीर सामने आई है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल यानी WGC ने अपनी नई रिपोर्ट में अनुमान लगाया है कि साल 2026 में भारत में सोने की कुल मांग करीब 650 मीट्रिक टन रह सकती है.

अगर यह अनुमान सही साबित होता है, तो 2020 के बाद यह भारत में सोने की सबसे कम सालाना मांग होगी.

आपको याद होगा कि 2020 में कोरोना महामारी के कारण देशभर में लॉकडाउन लगा था. दुकानें बंद थीं, शादियां टल गई थीं और बाजार में खरीदारी लगभग ठप हो गई थी. उस समय सोने की मांग में बड़ी गिरावट आई थी.

लेकिन 2026 में स्थिति अलग है. इस बार मांग में कमजोरी की बड़ी वजह कोरोना जैसी महामारी नहीं, बल्कि सोने की रिकॉर्ड ऊंची कीमतें और आम लोगों के बजट पर बढ़ता दबाव है.

सितंबर तिमाही में सोने की मांग 29% घटी

WGC के आंकड़ों के मुताबिक, 2026 के शुरुआती नौ महीनों में भारत में जूलरी की मांग कमजोर रही है. इसका असर पूरे साल की कुल मांग पर पड़ सकता है.

जुलाई से सितंबर 2026 के बीच भारत में सोने की कुल मांग सालाना आधार पर 29 फीसदी घटकर 162.5 मीट्रिक टन रह गई.

इस दौरान जूलरी की मांग में 20 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. यानी ऊंची कीमतों के कारण लोगों ने सोने के गहनों की खरीदारी कम कर दी.

लेकिन निवेश के लिए सोना खरीदने वालों की संख्या में भी कमजोरी देखने को मिली. सितंबर तिमाही में निवेश के उद्देश्य से सोने की मांग 40 फीसदी घट गई.

इससे साफ है कि सोने की ऊंची कीमतों का असर सिर्फ जूलरी खरीदने वालों पर नहीं, बल्कि निवेशकों पर भी पड़ रहा है. जो लोग सोने को निवेश का अच्छा विकल्प मानकर खरीदारी करते थे, वे भी फिलहाल सतर्क नजर आ रहे हैं.

सोने की कीमतें बढ़ने के बावजूद मांग कमजोर क्यों?

भारत में सोने की मांग पर ऊंची कीमतों का सीधा असर पड़ रहा है. जब सोना रिकॉर्ड स्तर के आसपास पहुंचता है, तो आम खरीदार के लिए गहने खरीदना महंगा हो जाता है.

इसके अलावा, रोजमर्रा के खर्च और घरेलू बजट पर बढ़ते दबाव के कारण भी लोग सोने की खरीदारी टाल सकते हैं. जूलरी खरीदने वाले कई ग्राहक कम वजन के गहने खरीदते हैं या फिर खरीदारी के लिए कीमतों में गिरावट का इंतजार करते हैं.

निवेश के मामले में भी ऊंची कीमतें एक चुनौती बन सकती हैं. जिन निवेशकों को लगता है कि कीमतें पहले ही काफी बढ़ चुकी हैं, वे नई खरीदारी करने से बच सकते हैं.

यही वजह है कि भारत में सोने की मांग के आंकड़ों में कमजोरी दिखाई दे रही है.

क्या सोने-चांदी की तेजी आगे भी जारी रहेगी?

अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के नतीजों के बाद सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार उछाल जरूर आया है. लेकिन इस तेजी का आगे जारी रहना कई बातों पर निर्भर करेगा.

मिडिल ईस्ट में युद्ध को लेकर आगे क्या घटनाक्रम होता है, अमेरिकी डॉलर की चाल कैसी रहती है और ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदें किस दिशा में जाती हैं, इन सभी का असर कीमती धातुओं पर पड़ सकता है.

इसके अलावा, भारत में सोने की मांग में कमजोरी भी बाजार के लिए एक अहम संकेत है. फिलहाल कीमतों में तेजी और मांग में गिरावट, दोनों तरह के रुझान दिखाई दे रहे हैं.

इसलिए निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे सिर्फ एक दिन की तेजी देखकर जल्दबाजी में फैसला न लें. सोने और चांदी में निवेश से पहले अपनी जोखिम उठाने की क्षमता, निवेश की अवधि और पोर्टफोलियो में इनके हिस्से को ध्यान में रखना चाहिए.

आने वाले दिनों में वैश्विक राजनीति और आर्थिक हालात किस तरफ जाते हैं, इससे तय होगा कि सोने-चांदी की यह तेजी आगे कितनी टिक पाती है.

 

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