गोल्डमैन सैक्स का बड़ा अलर्ट! तेल की सप्लाई में आई भारी रुकावट, जानें बढ़ती कीमतों से कितना खाली होगा आपका जेब
मिडिल ईस्ट में तनाव के चलते गोल्डमैन सैक्स ने कच्चे तेल के $100 प्रति बैरल पार करने की चेतावनी दी है. जबकि कुवैत ने सप्लाई बाधित होने के कारण उत्पादन घटा दिया है.

Oil Crisis 2026: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और युद्ध के बीच वैश्विक तेल बाजार से एक डराने वाली खबर सामने आ रही है. दुनिया के सबसे बड़े निवेश बैंकों में से एक गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) ने चेतावनी दी है कि अगर खाड़ी देशों में जारी टकराव जल्द नहीं थमा तो कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर सकती हैं.
कुवैत ने क्यों घटाया तेल उत्पादन?
इस संकट की सबसे बड़ी वजह सप्लाई चेन का बाधित होना है. खाड़ी के प्रमुख तेल उत्पादक देश कुवैत ने शनिवार को घोषणा की कि उसने अपने कच्चे तेल का उत्पादन और रिफाइनिंग आउटपुट कम करना शुरू कर दिया है. इसका मुख्य कारण 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़' में जहाजों की आवाजाही ठप होना है. यह समुद्री रास्ता दुनिया की कुल तेल सप्लाई का लगभग 20% हिस्सा संभालता है लेकिन ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण टैंकर कंपनियां अब जोखिम लेने को तैयार नहीं हैं.
तेजी से उछल रही हैं कीमतें
सप्लाई में आ रही इस बाधा के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है:
यह भी पढ़ें...
- WTI क्रूड: महज एक हफ्ते में 35% से ज्यादा महंगा हुआ है.
- ब्रेंट क्रूड: करीब 28% की छलांग लगाकर $93 प्रति बैरल के पास पहुंच गया है.
संकट सिर्फ तेल तक सीमित नहीं है. दुनिया के सबसे बड़े LNG निर्यातकों में से एक कतर ने भी हालिया हमलों के बाद गैस उत्पादन रोक दिया है, जिससे ऊर्जा बाजार पर दोहरा दबाव बन गया है.
भारत के लिए कितनी बड़ी है चुनौती?
भारत अपनी जरूरत का लगभग 88% कच्चा तेल आयात करता है जिसमें कुवैत की हिस्सेदारी करीब 3% है. हालांकि यह हिस्सा छोटा दिखता है, लेकिन वैश्विक स्तर पर कीमतों में होने वाली हर $10 की बढ़ोतरी भारत के आयात बिल में 13 से 15 अरब डॉलर का अतिरिक्त बोझ डाल देती है. अगर मिडिल ईस्ट का यह संकट लंबा खिंचता है तो भारत के लिए यह ऊर्जा संकट के साथ-साथ महंगाई का एक नया दौर शुरू कर सकता है.
ये भी पढ़ें: LPG के बाद क्या पेट्रोल-डीजल के बढ़ेंगे दाम? केंद्र सरकार ने बताया पूरा प्लान










