JIO IPO से पहले उदय कोटक को याद आया धीरूभाई अंबानी का वो दौर, जब रोशनी से जगमगा उठा था मरीन ड्राइव

जियो के प्रस्तावित 30,200 करोड़ रुपये के IPO से पहले उदय कोटक ने धीरूभाई अंबानी और रिलायंस के पुराने दिनों का एक खास किस्सा साझा किया है. उन्होंने बताया कि 18 साल की उम्र में रिलायंस के IPO के प्रचार के लिए मरीन ड्राइव को रोशनी से जगमगाते देखना उनके करियर के लिए प्रेरणा बना था.

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Jio IPO : रिलायंस के प्रस्तावित 30,200 करोड़ रुपये के IPO को लेकर दिग्गज बैंकर उदय कोटक ने करीब पांच दशक पुराना किस्सा साझा किया है. उन्होंने बताया कि 18 साल की उम्र में मुंबई के मरीन ड्राइव को रोशनी से जगमगाते देखकर उन्हें रिलायंस के IPO के बारे में पता चला था. उदय कोटक के मुताबिक, उस घटना ने उनके करियर और वित्तीय सेवाओं की दुनिया में आने की सोच को प्रभावित किया. मुंबई का मरीन ड्राइव अपनी खूबसूरत रोशनी और समंदर किनारे के नजारे के लिए जाना जाता है. लेकिन करीब पांच दशक पहले इस जगह की जगमगाहट ने दिग्गज बैंकर उदय कोटक पर गहरी छाप छोड़ी थी. उस समय उनकी उम्र महज 18 साल थी. बाद में उन्हें पता चला कि मरीन ड्राइव को रोशनी से सजाने की वजह रिलायंस के IPO का प्रचार था.

अब रिलायंस ग्रुप की कंपनी जियो के प्रस्तावित मेगा IPO के मौके पर उदय कोटक ने उस पुराने अनुभव को याद किया है. उनके लिए यह सिर्फ एक याद नहीं, बल्कि भारत के शेयर बाजार में आम निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने और रिलायंस की कारोबारी विरासत की कहानी भी है.

धीरूभाई अंबानी की सोच से प्रभावित हुए उदय कोटक

जियो के IPO को लेकर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उदय कोटक ने बताया कि मरीन ड्राइव को रोशनी से जगमगाते देखना उनके लिए एक जादुई पल था. उन्होंने कहा कि उस घटना का उनके करियर पर असर पड़ा और वित्तीय सेवाओं की दुनिया में आने की उनकी सोच को दिशा मिली. उदय कोटक ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के संस्थापक धीरूभाई अंबानी के प्रति आभार भी जताया. उनके मुताबिक, धीरूभाई ने बहुत पहले समझ लिया था कि किसी कंपनी को शेयर बाजार में लाकर आम निवेशकों को उससे जोड़ना कितना अहम है. इस सोच के तहत कंपनी में निवेश का मौका केवल बड़े कारोबारियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आम लोग भी शेयर खरीदकर कंपनी की तरक्की में हिस्सेदार बन सकते हैं.

रिलायंस की शेयर बाजार से जुड़ी कहानी करीब पांच दशक पुरानी है. साल 1977 में रिलायंस टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज ने अपना IPO पेश किया था. इस इश्यू को निवेशकों की जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली और यह सात गुना सब्सक्राइब हुआ था. सात गुना सब्सक्राइब होने का मतलब है कि कंपनी ने जितने शेयर जारी किए थे, निवेशकों ने उनके मुकाबले करीब सात गुना शेयरों के लिए आवेदन किया था. इसके बाद रिलायंस के इक्विटी शेयर 23 जनवरी 1978 को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी BSE पर लिस्ट हुए.

रिलायंस के इस IPO को भारत में शेयर बाजार के विस्तार और आम निवेशकों की भागीदारी बढ़ने के अहम पड़ावों में गिना जाता है. धीरूभाई अंबानी की रणनीति ने बड़ी संख्या में लोगों को शेयर बाजार के जरिए कंपनियों में निवेश करने का मौका दिया.

करीब 50 साल बाद जियो का मेगा IPO

अब रिलायंस ग्रुप एक बार फिर शेयर बाजार में बड़े इश्यू के साथ चर्चा में है. इस बार कंपनी का नाम जियो है. जियो का प्रस्तावित IPO करीब 30,200 करोड़ रुपये का बताया गया है. उदय कोटक ने इसे भारत का अब तक का सबसे बड़ा IPO बनने जा रहा इश्यू बताया. उनके मुताबिक, रिलायंस इंडस्ट्रीज ग्रुप करीब दो दशक बाद इस तरह के ऐतिहासिक IPO के साथ आ रहा है. इस इश्यू की अहमियत केवल इसके आकार तक सीमित नहीं है. यह रिलायंस के कारोबार में आए बदलाव को भी दिखाता है. जहां शुरुआती दौर में समूह की पहचान टेक्सटाइल जैसे पारंपरिक कारोबारों से बनी थी, वहीं आज जियो टेलीकॉम, डिजिटल सेवाओं और ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी के क्षेत्र में काम कर रहा है. इस तरह रिलायंस की शेयर बाजार से जुड़ी विरासत का नया अध्याय डिजिटल कारोबार के इर्द-गिर्द आगे बढ़ रहा है.

जियो IPO क्यों है अहम?

जियो का प्रस्तावित IPO भारत के पूंजी बाजार के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है. इससे निवेशकों को कंपनी के कारोबार और उसकी संभावनाओं को समझने का एक नया अवसर मिल सकता है. उदय कोटक ने जियो के सफर को भारत में डिजिटल बदलाव से भी जोड़ा. पिछले करीब एक दशक में देश में इंटरनेट और मोबाइल कनेक्टिविटी का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है. जियो ने इस बदलाव में अहम भूमिका निभाई है और मोबाइल सेवाओं के साथ-साथ होम ब्रॉडबैंड के क्षेत्र में भी अपनी मजबूत मौजूदगी बनाई है.

हालांकि, निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि किसी IPO का बड़ा होना अपने आप में अच्छे रिटर्न की गारंटी नहीं देता. निवेश का फैसला लेने से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति, कारोबार, वैल्यूएशन और IPO से जुड़े दस्तावेजों का अध्ययन करना चाहिए.

धीरूभाई अंबानी की विरासत से डिजिटल इंडिया तक का सफर

उदय कोटक के लिए जियो का IPO केवल एक बड़ा कारोबारी इवेंट नहीं है. यह उस दौर की याद भी है, जब धीरूभाई अंबानी ने आम निवेशकों को रिलायंस से जोड़ने की कोशिश की थी. साल 1977 में रिलायंस का IPO और करीब पांच दशक बाद जियो का प्रस्तावित IPO भारतीय शेयर बाजार के बदलते स्वरूप को दिखाते हैं. इस दौरान कारोबार, निवेश और तकनीक की दुनिया में बड़े बदलाव आए हैं. अब बाजार की नजर इस बात पर होगी कि जियो का मेगा IPO भारतीय पूंजी बाजार के इतिहास में कौन-सा नया अध्याय जोड़ता है.