Jio Platforms IPO ने रचा इतिहास! ₹7.4 लाख करोड़ की बोली, निवेशकों में मची होड़

मुकेश अंबानी की कंपनी Jio Platforms के IPO ने भारतीय शेयर बाजार में तहलका मचा दिया. करीब ₹30,188 करोड़ के इस मेगा IPO ने एक-दो नहीं, बल्कि 13 बड़े रिकॉर्ड और नए बेंचमार्क अपने नाम किए. IPO खुलने के महज 100 मिनट के भीतर पूरा इश्यू सब्सक्राइब हो गया, जबकि आवेदन करने वालों की संख्या 1.38 करोड़ के पार पहुंच गई.

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Jio Platforms IPO
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सोचिए, शेयर बाजार में कोई आईपीओ आए और उसमें निवेश करने के लिए लोग इतनी बड़ी संख्या में टूट पड़ें कि सिर्फ 100 मिनट के भीतर पूरा इश्यू भर जाए. आवेदन करने वालों की संख्या 1 करोड़ 38 लाख के पार पहुंच जाए. और निवेशकों की तरफ से कुल मांग का आंकड़ा 7.4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाए. जी हां, हम बात कर रहे हैं मुकेश अंबानी की कंपनी Jio Platforms के मेगा आईपीओ की. इस आईपीओ ने भारतीय शेयर बाजार में ऐसा धमाल मचाया है कि एक-दो नहीं, बल्कि 13 बड़े रिकॉर्ड और नए बेंचमार्क अपने नाम कर लिए हैं. लेकिन यहां एक बात समझना जरूरी है. 7.4 लाख करोड़ रुपये की मांग का मतलब यह नहीं है कि जियो ने इतनी रकम जुटा ली. यह निवेशकों की तरफ से आई कुल मांग है. कंपनी का इश्यू करीब 30,188 करोड़ रुपये का था.

रिकॉर्ड नंबर 1: भारत का सबसे बड़ा आईपीओ

सबसे पहले बात करते हैं जियो के आईपीओ के आकार की. Jio Platforms का आईपीओ करीब 30,188 करोड़ रुपये का रहा. इसके साथ ही इसने 2024 में आए Hyundai Motor India के करीब 27,870 करोड़ रुपये के आईपीओ को पीछे छोड़ दिया और भारत का सबसे बड़ा आईपीओ बन गया. जियो के इश्यू का घोषित आकार 30,213 करोड़ रुपये था. यह रकम 1,119 रुपये प्रति शेयर के ऊपरी प्राइस बैंड के आधार पर थी. कर्मचारियों को मिलने वाली छूट को ध्यान में रखने के बाद अंतिम इश्यू वैल्यू करीब 30,188 करोड़ रुपये रही.

रिकॉर्ड नंबर 2: पूरा आईपीओ नए शेयरों का

जियो के आईपीओ की दूसरी बड़ी खासियत यह रही कि इसमें पूरा इश्यू नए शेयर जारी करके लाया गया. कंपनी ने करीब 27 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी किए. इसमें मौजूदा निवेशकों की तरफ से पुराने शेयर बेचने का ऑफर यानी Offer for Sale शामिल नहीं था. आसान भाषा में समझिए. कई आईपीओ में कंपनी नए शेयर जारी करती है और पुराने निवेशक भी अपने शेयर बेचते हैं. लेकिन जियो के इस इश्यू में मौजूदा शेयरधारकों, जैसे रिलायंस इंडस्ट्रीज, मेटा और गूगल ने आईपीओ के जरिए अपने शेयर नहीं बेचे. कंपनी की योजना है कि इस इश्यू से मिलने वाली रकम में से 27,500 करोड़ रुपये तक का इस्तेमाल Reliance Jio Infocomm के कर्ज को चुकाने या पहले से भुगतान करने में किया जाए. बची हुई रकम सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए इस्तेमाल की जाएगी.

रिकॉर्ड नंबर 3: आम निवेशकों की तरफ से ₹4.9 लाख करोड़ की मांग

अब आते हैं उस आंकड़े पर, जो किसी को भी हैरान कर सकता है. जियो के आईपीओ में आम निवेशकों और दूसरे सार्वजनिक निवेशकों की तरफ से करीब 4.90 लाख करोड़ रुपये की बोलियां आईं. यह अपने समय का भारतीय आईपीओ बाजार में सबसे बड़ा सार्वजनिक मांग का आंकड़ा रहा. इससे पहले LG Electronics India के आईपीओ में करीब 4.39 लाख करोड़ रुपये की मांग दर्ज की गई थी. जियो के आईपीओ में सार्वजनिक निवेशकों के लिए करीब 19.75 करोड़ शेयर उपलब्ध थे, जबकि निवेशकों ने लगभग 438.26 करोड़ शेयरों के लिए बोली लगाई. कुल मिलाकर इश्यू 22.19 गुना सब्सक्राइब हुआ. इसका मतलब है कि उपलब्ध शेयरों के मुकाबले निवेशकों ने 22 गुना से ज्यादा मांग दिखाई.

रिकॉर्ड नंबर 4: बड़े संस्थागत निवेशकों ने भी लगाई बड़ी बोली

जियो के आईपीओ में सबसे मजबूत मांग क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स यानी QIB कैटेगरी से आई. इस कैटेगरी में म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियां, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक और दूसरे बड़े संस्थागत निवेशक शामिल होते हैं. इन निवेशकों की तरफ से करीब 3.87 लाख करोड़ रुपये की बोलियां आईं. यह पहले बताए गए करीब 3.86 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड से भी ज्यादा था. QIB कैटेगरी अपने लिए आरक्षित शेयरों के मुकाबले 70.55 गुना सब्सक्राइब हुई. यानी बड़े संस्थागत निवेशकों ने जियो के आईपीओ में जबरदस्त दिलचस्पी दिखाई.

रिकॉर्ड नंबर 5: रिलायंस के शेयरधारकों ने भी खूब लगाई बोली

जियो के आईपीओ में रिलायंस इंडस्ट्रीज के मौजूदा शेयरधारकों के लिए भी अलग कैटेगरी रखी गई थी. इस कैटेगरी में निवेशकों ने करीब 19,000 करोड़ रुपये की बोलियां लगाईं. यह जनवरी 2026 में Bharat Coking Coal के आईपीओ में दर्ज करीब 9,350 करोड़ रुपये के पिछले रिपोर्टेड रिकॉर्ड से काफी ज्यादा था. जियो ने पात्र रिलायंस शेयरधारकों के लिए 2,500 करोड़ रुपये तक के शेयर आरक्षित किए थे. इस कैटेगरी को 7.60 गुना सब्सक्रिप्शन मिला.

रिकॉर्ड नंबर 6: पहली बार एक करोड़ से ज्यादा आवेदन

अब बात करते हैं आवेदन की संख्या की. जियो के आईपीओ में 1.38 करोड़ से ज्यादा आवेदन मिले. इसके साथ ही इसने Waaree Energies के करीब 97.33 लाख आवेदनों के पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया. यह भारत का पहला आईपीओ बना, जिसमें आवेदनों की संख्या एक करोड़ के पार पहुंची. यह आंकड़ा इसलिए भी अहम है, क्योंकि जियो का इश्यू पहले के कई बड़े आईपीओ के मुकाबले काफी बड़ा था. इसके बावजूद निवेशकों की भागीदारी ने नया रिकॉर्ड बना दिया.

रिकॉर्ड नंबर 7: रिटेल निवेशकों की सबसे ज्यादा भागीदारी

इस आईपीओ में छोटे यानी रिटेल निवेशकों ने भी जोरदार दिलचस्पी दिखाई. रिपोर्ट किए गए आंकड़ों के मुताबिक, रिटेल निवेशकों की तरफ से 1.05 करोड़ से ज्यादा आवेदन आए. यह इस कैटेगरी के लिए नया रिकॉर्ड था. रिटेल निवेशकों ने करीब 25,867 करोड़ रुपये की बोलियां लगाईं. रिटेल कैटेगरी 2.72 गुना सब्सक्राइब हुई. इस आईपीओ में न्यूनतम आवेदन 12 शेयरों का था. ऊपरी इश्यू प्राइस 1,119 रुपये के हिसाब से इसके लिए करीब 13,428 रुपये लगाने पड़ते थे. यानी छोटे निवेशकों के बीच भी जियो के आईपीओ को लेकर काफी उत्साह था.

रिकॉर्ड नंबर 8: शेयरधारक कैटेगरी में 21 लाख से ज्यादा आवेदन

जियो के आईपीओ में पात्र रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरधारकों की तरफ से भी 21 लाख से ज्यादा आवेदन आए. यह कैटेगरी उन निवेशकों के लिए थी, जो पहले से रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरधारक थे और निर्धारित पात्रता पूरी करते थे. इससे पता चलता है कि जियो के आईपीओ में सिर्फ नए निवेशकों ने ही नहीं, बल्कि रिलायंस के मौजूदा निवेशकों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया.

रिकॉर्ड नंबर 9 और 10: बड़े निवेशकों की दोनों कैटेगरी में रिकॉर्ड आवेदन

जियो के आईपीओ में हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल यानी HNI निवेशकों की भी भारी भागीदारी रही. छोटे HNI निवेशकों की कैटेगरी में 5.75 लाख से ज्यादा आवेदन आए. यह पहले के करीब 4,99,825 आवेदनों के बेंचमार्क से ज्यादा था. इस कैटेगरी में 2 लाख रुपये से ज्यादा और 10 लाख रुपये तक के आवेदन आते हैं. छोटे HNI निवेशकों की कैटेगरी 10.22 गुना सब्सक्राइब हुई और बोलियों की रकम करीब 13,900 करोड़ रुपये रही. वहीं, बड़े HNI निवेशकों की कैटेगरी में 3.5 लाख से ज्यादा आवेदन आए. यह पहले बताए गए करीब 2,71,403 आवेदनों के आंकड़े से ज्यादा था. 10 लाख रुपये से अधिक के आवेदन वाली इस कैटेगरी में करीब 43,200 करोड़ रुपये से ज्यादा की बोलियां आईं. यह कैटेगरी 15.89 गुना सब्सक्राइब हुई.

रिकॉर्ड नंबर 11: सिर्फ 100 मिनट में पूरा आईपीओ सब्सक्राइब

जियो के आईपीओ का एक और बड़ा रिकॉर्ड इसकी रफ्तार रही. 21 अक्टूबर को इश्यू खुलने के करीब 100 मिनट के भीतर यह पूरा सब्सक्राइब हो गया. यानी निवेशकों ने उपलब्ध शेयरों के बराबर मांग महज कुछ घंटों में पूरी कर दी. QIB कैटेगरी में करीब 5,500 करोड़ रुपये के शेयरों के बराबर मांग शुरुआती 10 मिनट में ही पूरी हो गई थी. पहले कारोबारी दिन के अंत तक पूरा आईपीओ 3.16 गुना सब्सक्राइब हो चुका था. इसमें संस्थागत निवेशकों की मांग ने अहम भूमिका निभाई.

रिकॉर्ड नंबर 12: कुल मांग ₹7.4 लाख करोड़, एंकर निवेशकों से ₹2.5 लाख करोड़ की दिलचस्पी

अब आते हैं सबसे ज्यादा चर्चा में रहे आंकड़े पर. जियो के आईपीओ में एंकर निवेशकों और सार्वजनिक इश्यू के जरिए कुल मांग करीब 7.4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई. इसमें एंकर बुक में करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये की दिलचस्पी शामिल थी. हालांकि, एंकर निवेशकों को आखिरकार करीब 8,110 करोड़ रुपये के शेयर आवंटित किए गए. यह ध्यान रखना जरूरी है कि 7.4 लाख करोड़ रुपये की रकम कुल मांग को दिखाती है, कंपनी की जुटाई गई रकम को नहीं. एंकर निवेशकों को शेयर आवंटित करने के लिए 212 निवेशक खातों और योजनाओं को चुना गया. इनमें वैश्विक एसेट मैनेजर, सॉवरेन वेल्थ फंड, घरेलू म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियां और पेंशन फंड शामिल थे.

अन्य निवेशक कैटेगरी में HNI निवेशकों ने करीब 57,109 करोड़ रुपये, रिटेल निवेशकों ने करीब 25,867 करोड़ रुपये, रिलायंस के पात्र शेयरधारकों ने करीब 19,000 करोड़ रुपये और कर्मचारियों ने 1,500 करोड़ रुपये से ज्यादा की बोलियां लगाईं. इन चारों कैटेगरी की कुल मांग एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रही. कर्मचारियों की कैटेगरी में भी दो लाख से अधिक आवेदन मिले.

रिकॉर्ड नंबर 13: 100 अरब डॉलर से ज्यादा वैल्यूएशन की ओर

इस आईपीओ से जुड़ा आखिरी बड़ा दावा जियो की वैल्यूएशन को लेकर है. रिपोर्ट के मुताबिक, जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ वैल्यूएशन 100 अरब डॉलर से ज्यादा होने की दिशा में है. ऐसा होने पर यह दुनिया की उन चुनिंदा कंपनियों में शामिल होगी, जिन्होंने आईपीओ के समय इतनी बड़ी इक्विटी वैल्यूएशन हासिल की. रिपोर्ट में Meta, Alibaba और SpaceX जैसी कंपनियों का उदाहरण दिया गया है. हालांकि, इस तरह की तुलना करते समय कंपनियों के मूल्यांकन, समय और आईपीओ की संरचना को ध्यान में रखना जरूरी है.

आखिर जियो के आईपीओ ने क्या साबित किया?

जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ ने दिखाया कि भारत के प्राथमिक बाजार में बड़े इश्यू के लिए भी निवेशकों की भारी मांग जुट सकती है. इश्यू का आकार, 1.38 करोड़ से ज्यादा आवेदन, QIB कैटेगरी की 70.55 गुना मांग और सिर्फ 100 मिनट में पूरा सब्सक्रिप्शन होना इसकी बड़ी मिसाल हैं. लेकिन एक बात याद रखिए. आईपीओ का बहुत ज्यादा सब्सक्राइब होना इस बात की गारंटी नहीं है कि लिस्टिंग के बाद शेयर की कीमत बढ़ेगी ही. लिस्टिंग के बाद शेयर का प्रदर्शन कंपनी की वैल्यूएशन, वित्तीय नतीजों, बाजार की स्थिति और निवेशकों की मांग पर निर्भर करेगा. यानी जियो ने आईपीओ के कई रिकॉर्ड जरूर तोड़े हैं, लेकिन निवेशकों के लिए असली परीक्षा अब कंपनी के कारोबार और शेयर के प्रदर्शन से होगी.