Jio Platforms IPO Allotment: शेयर नहीं मिले तो क्या करें? जानिए Reliance का शेयर खरीदने से लेकर लिस्टिंग तक के विकल्प

Jio Platforms के मेगा आईपीओ में रिटेल कैटेगरी को 2.72 गुना सब्सक्रिप्शन मिला. ऐसे में कई निवेशकों को शेयर अलॉट नहीं हुए होंगे. अगर आपने भी आवेदन किया था, लेकिन आपको शेयर नहीं मिले, तो आपके पास आगे निवेश के दूसरे विकल्प हो सकते हैं.

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Jio Platforms IPO Allotment Status: जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में आवेदन करने वाले निवेशकों के लिए अलॉटमेंट का इंतजार खत्म हो चुका है. अगर आपको इस मेगा आईपीओ में शेयर नहीं मिले हैं, तो निराश होने की जरूरत नहीं है. निवेशकों के पास रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर खरीदने या जियो प्लेटफॉर्म्स की लिस्टिंग के बाद उसमें निवेश करने जैसे विकल्प मौजूद हैं.

शेयर बाजार में इन दिनों Jio Platforms के मेगा आईपीओ की खूब चर्चा है. निवेशकों के बीच इस इश्यू को लेकर जबरदस्त दिलचस्पी देखने को मिली. रिटेल कैटेगरी में आईपीओ को 2.72 गुना सब्सक्रिप्शन मिला. यानी इस कैटेगरी में जितने शेयर उपलब्ध थे, उनसे ज्यादा आवेदन आए.

ऐसे में हर निवेशक को शेयर मिलना संभव नहीं है. आईपीओ में शेयरों का अलॉटमेंट तय नियमों के मुताबिक किया जाता है. रिटेल कैटेगरी में मांग उपलब्ध शेयरों से ज्यादा होने पर पात्र आवेदकों के बीच लॉटरी आधारित प्रक्रिया से अलॉटमेंट हो सकता है. इसलिए आवेदन करने वाले सभी निवेशकों को शेयर मिलना जरूरी नहीं है.

अगर आपने भी Jio Platforms IPO के लिए आवेदन किया था, लेकिन आपके खाते में शेयर अलॉट नहीं हुए हैं, तो आपके पास आगे निवेश करने के कुछ विकल्प हैं.

Jio Platforms IPO Allotment Status: ऐसे चेक करें अपना स्टेटस

अगर आपने जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में पैसा लगाया था, तो सबसे पहले अपना अलॉटमेंट स्टेटस चेक करें. इसके लिए आप BSE, NSE या आईपीओ के रजिस्ट्रार KFin Technologies की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं.

वहां संबंधित आईपीओ का नाम चुनकर मांगी गई जानकारी भरनी होगी. इसमें पैन नंबर, आवेदन संख्या या डीमैट खाते से जुड़ी जानकारी मांगी जा सकती है. विवरण जमा करने के बाद आपको पता चल जाएगा कि आपके नाम पर शेयर अलॉट हुए हैं या नहीं.

शेयर नहीं मिले तो क्या Reliance Industries में निवेश कर सकते हैं?

जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में शेयर नहीं मिलने पर एक विकल्प रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों पर विचार करना हो सकता है. इसकी वजह यह है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज की जियो प्लेटफॉर्म्स में हिस्सेदारी है. जियो के कारोबार और उसकी वैल्यू में बढ़ोतरी का असर रिलायंस की हिस्सेदारी के मूल्य पर भी पड़ सकता है.

अरिहंत कैपिटल मार्केट्स के जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर अरपित जैन के मुताबिक, रिलायंस की जियो प्लेटफॉर्म्स में हिस्सेदारी पर 30 फीसदी का स्टैंडर्ड होल्डिंग कंपनी डिस्काउंट लगाने के बाद भी उसकी अनुमानित वैल्यू करीब 4.65 लाख करोड़ रुपये बैठती है.

क्या होता है होल्डिंग कंपनी डिस्काउंट?

आसान भाषा में समझें तो जब किसी कंपनी के पास दूसरी कंपनी की हिस्सेदारी होती है, तो निवेशक उस हिस्सेदारी की अनुमानित वैल्यू पर कुछ कटौती करके आकलन कर सकते हैं. इसे होल्डिंग कंपनी डिस्काउंट कहा जाता है.

ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि होल्डिंग कंपनी के शेयर की बाजार कीमत हमेशा उसकी दूसरी कंपनियों में मौजूद हिस्सेदारी की कुल अनुमानित वैल्यू के बराबर नहीं होती.

रिलायंस इंडस्ट्रीज में निवेश करने का मतलब सिर्फ जियो प्लेटफॉर्म्स के कारोबार में अप्रत्यक्ष हिस्सेदारी हासिल करना नहीं है. रिलायंस के कारोबार में रिटेल, ऑयल-टू-केमिकल्स, न्यू एनर्जी और मीडिया जैसे क्षेत्र भी शामिल हैं.

इसलिए रिलायंस का शेयर उन निवेशकों के लिए एक विकल्प हो सकता है, जो डिजिटल और टेलीकॉम कारोबार के साथ-साथ कई दूसरे क्षेत्रों में भी निवेश करना चाहते हैं. हालांकि, निवेश से पहले कंपनी की वैल्यूएशन, वित्तीय प्रदर्शन और अपने जोखिम उठाने की क्षमता को समझना जरूरी है.

Jio Platforms की लिस्टिंग के बाद भी खरीद सकते हैं शेयर

अगर आप सीधे जियो प्लेटफॉर्म्स में निवेश करना चाहते हैं और आईपीओ में आपको शेयर नहीं मिले हैं, तो दूसरा विकल्प लिस्टिंग के बाद शेयर खरीदने का है.

शेयर बाजार में लिस्टिंग के बाद कंपनी के शेयर एक्सचेंज पर कारोबार करने लगते हैं. इसके बाद निवेशक अपने ब्रोकर के जरिए बाजार में उपलब्ध कीमत पर शेयर खरीद या बेच सकते हैं.

लेकिन यहां एक जरूरी बात समझनी चाहिए. आईपीओ में शेयर जिस कीमत पर मिलते हैं, लिस्टिंग के बाद बाजार में उनका भाव उससे ज्यादा या कम हो सकता है. भारी मांग के कारण शेयर ऊंचे भाव पर खुल सकता है, लेकिन लिस्टिंग के बाद कीमत गिरने का जोखिम भी रहता है.

इसलिए केवल आईपीओ में शेयर नहीं मिलने की वजह से जल्दबाजी में ऊंची कीमत पर खरीदारी करना सही रणनीति नहीं हो सकती. अगर आपका नजरिया लंबी अवधि का है, तो कंपनी की कमाई, कारोबार की संभावनाओं, प्रतिस्पर्धा और वैल्यूएशन का आकलन करके ही फैसला लें.

Jio Platforms IPO: पैसा कब अनब्लॉक होगा?

जिन निवेशकों को आईपीओ में शेयर नहीं मिले हैं, उनके लिए आवेदन के दौरान ब्लॉक की गई रकम को लेकर भी सवाल हो सकता है.

आमतौर पर आईपीओ में ASBA या UPI के जरिए आवेदन करने पर पैसा तुरंत खाते से डेबिट नहीं होता, बल्कि अलॉटमेंट प्रक्रिया पूरी होने तक ब्लॉक रहता है. अगर शेयर अलॉट नहीं होते हैं, तो संबंधित रकम अनब्लॉक कर दी जाती है. वास्तविक समय बैंक, ब्रोकर और भुगतान व्यवस्था के अनुसार अलग हो सकता है.

इस आईपीओ के लिए उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, जिन निवेशकों को शेयर नहीं मिले, उनकी ब्लॉक की गई रकम 27 अक्टूबर 2026 से अनब्लॉक होने की प्रक्रिया में आनी थी. जिन निवेशकों को शेयर अलॉट हुए, उनके शेयर भी 27 अक्टूबर 2026 को डीमैट खाते में क्रेडिट किए जाने थे. अपने आवेदन का सटीक स्टेटस जानने के लिए रजिस्ट्रार और बैंक या ब्रोकर की ओर से जारी अपडेट जरूर देखें.

शेयर डीमैट खाते में क्रेडिट होने के बाद निवेशक लिस्टिंग के दिन बाजार खुलने पर उन्हें बेचने या अपने पास रखने का फैसला कर सकते हैं.

Jio Platforms IPO नहीं मिला तो क्या करें?

जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में शेयर नहीं मिलना निवेश के सभी रास्ते बंद होने जैसा नहीं है. निवेशक चाहें तो लिस्टिंग के बाद जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयरों पर विचार कर सकते हैं या रिलायंस इंडस्ट्रीज के जरिए उसके व्यापक कारोबार में निवेश का विकल्प देख सकते हैं.

हालांकि, दोनों विकल्प अलग-अलग हैं. जियो प्लेटफॉर्म्स में निवेश का फोकस डिजिटल और टेलीकॉम कारोबार पर होगा, जबकि रिलायंस इंडस्ट्रीज में निवेश करने पर कई क्षेत्रों में फैले कारोबार का जोखिम और संभावनाएं दोनों शामिल होंगे.

निष्कर्ष: किसी भी शेयर को सिर्फ इसलिए न खरीदें कि आईपीओ में अलॉटमेंट नहीं मिला. निवेश से पहले कंपनी की वैल्यूएशन, वित्तीय स्थिति और लंबी अवधि की संभावनाओं का आकलन करें. शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है.