10 साल के निचले स्तर के करीब Nifty का वैल्यूएशन, निवेशक फिर क्यों गायब ?

निफ्टी का पीईजी अनुपात करीब 1 और फॉरवर्ड पीई 31 फीसदी घटा है. जानिए कम मूल्यांकन के बीच कमाई, बॉन्ड यील्ड और निवेश के मौके पर क्या कहती हैं नई रिपोर्ट.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

फॉरवर्ड PE सितंबर 2024 के 24.8 गुना से 17.2 गुना हुआ

वित्त वर्ष 2027 में कंपनियों की कमाई 15 फीसदी बढ़ने की उम्मीद

ऊंची बॉन्ड यील्ड शेयरों के कम मूल्यांकन का फायदा घटा सकती है

शेयर बाजार में गिरावट के बीच निवेशकों के सामने एक अहम सवाल है. क्या निफ्टी में अब खरीदारी का मौका बन रहा है, या कम वैल्यूएशन के बावजूद बाजार में जोखिम अभी बरकरार है? निफ्टी 50 के कुछ अहम वैल्यूएशन संकेतक बाजार के पहले के मुकाबले आकर्षक होने की ओर इशारा कर रहे हैं. लेकिन सिर्फ कीमतों में गिरावट को निवेश का सही मौका मान लेना जल्दबाजी हो सकती है. असली तस्वीर कंपनियों की कमाई और भविष्य की संभावनाओं से साफ होगी.

निफ्टी का PEG Ratio करीब 1, क्या कहता है यह संकेतक?

ICICI Securities के मुताबिक, निफ्टी 50 का PEG Ratio करीब 1 पर पहुंच गया है, जो पिछले करीब 10 साल के निचले स्तरों में से एक है. PEG Ratio को समझने के लिए P/E Ratio और कंपनियों की अनुमानित कमाई की ग्रोथ को साथ देखना जरूरी है.

मान लीजिए, दो कंपनियों के शेयर अपनी सालाना कमाई के 20 गुना भाव पर कारोबार कर रहे हैं. लेकिन पहली कंपनी की कमाई 20 फीसदी और दूसरी की सिर्फ 10 फीसदी बढ़ने की उम्मीद है. ऐसे में पहली कंपनी का PEG Ratio 1 और दूसरी का 2 होगा. इस उदाहरण में पहली कंपनी का वैल्यूएशन उसकी अनुमानित ग्रोथ के मुकाबले ज्यादा आकर्षक दिखाई देता है.

हालांकि, PEG Ratio करीब 1 होने का मतलब यह नहीं कि शेयर निश्चित रूप से सस्ता है. यह अनुपात भविष्य में कमाई बढ़ने के अनुमानों पर निर्भर करता है. यदि ये अनुमान पूरे नहीं होते, तो वैल्यूएशन की तस्वीर भी बदल सकती है.

Forward P/E में करीब 31 फीसदी की गिरावट

Bajaj Asset Management के आंकड़ों के मुताबिक, निफ्टी का Forward P/E Ratio सितंबर 2024 में 24.8 गुना था, जो सितंबर 2026 में घटकर 17.2 गुना रह गया. यानी इसमें करीब 31 फीसदी की गिरावट आई है.

Forward P/E बताता है कि निवेशक अगले 12 महीनों की अनुमानित कमाई के हर 1 रुपये के लिए कितनी कीमत चुकाने को तैयार हैं. इसका कम होना संकेत देता है कि भविष्य की अनुमानित कमाई के मुकाबले शेयरों की कीमत पहले से कम हो गई है.

लेकिन कम P/E अपने आप में तेजी की गारंटी नहीं है. यदि कंपनियों की कमाई उम्मीद से कमजोर रहती है, तो मौजूदा वैल्यूएशन भी उतना आकर्षक नहीं रह जाएगा.

कमाई की ग्रोथ से मिलेगी बाजार को मजबूती?

बाजार के लिए राहत की बात यह है कि कंपनियों की कमाई में बढ़ोतरी की उम्मीद बनी हुई है. ICICI Securities के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 में निफ्टी कंपनियों की कमाई करीब 15 फीसदी बढ़ सकती है. पहली तिमाही में मुनाफे की सालाना ग्रोथ करीब 14 फीसदी रही, जबकि दूसरी तिमाही के शुरुआती अनुमानों में करीब 22 फीसदी वृद्धि की उम्मीद जताई गई है.

यदि कंपनियां इन अनुमानों के मुताबिक नतीजे देती हैं, तो मौजूदा वैल्यूएशन को सहारा मिल सकता है. इसके उलट, मांग में कमजोरी, बढ़ती लागत या मुनाफे में अपेक्षा से कम वृद्धि बाजार की रिकवरी को मुश्किल बना सकती है.

सिर्फ वैल्यूएशन नहीं, बॉन्ड यील्ड भी अहम

Nuvama Research के मुताबिक, केवल P/E Ratio के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि शेयर बाजार निवेश के लिए आकर्षक हो गया है. सरकारी बॉन्ड से मिलने वाला रिटर्न भी निवेशकों के फैसले को प्रभावित करता है. जब बॉन्ड यील्ड ऊंची होती है, तो निवेशक शेयरों में जोखिम लेने के लिए ज्यादा संभावित रिटर्न की उम्मीद कर सकते हैं.

वहीं, Bajaj Asset Management ने भी बाजार के मार्केट कैप और GDP के अनुपात को अब तक ऊंचा रहने की ओर ध्यान दिलाया है. इसका मतलब है कि वैल्यूएशन में गिरावट के बावजूद बाजार के सभी पैमाने सस्ते होने का संकेत नहीं दे रहे.

किन सेक्टर्स में बन सकते हैं अवसर?

Bajaj AMC के मुताबिक, कुछ सेक्टर्स में लंबी अवधि के अवसर नजर आ सकते हैं, लेकिन हर सेक्टर के जोखिम अलग हैं.

  • बैंकिंग: कर्ज की मांग बढ़ने से अवसर, लेकिन मार्जिन पर नजर जरूरी.

  • हेल्थकेयर और फार्मा: लंबी अवधि की मांग से सहारा मिल सकता है.

  • पावर और पावर उपकरण: बिजली की बढ़ती जरूरत से संभावनाएं.

  • ऑटो: बिक्री में सुधार के बावजूद कच्चे माल की लागत चुनौती बन सकती है.

  • IT: कमजोर मांग और AI से हो रहे बदलावों पर नजर रखना जरूरी.

  • क्या निफ्टी में खरीदारी का मौका है?

    निफ्टी का PEG Ratio करीब 1 होना और Forward P/E में गिरावट बाजार के वैल्यूएशन को पहले के मुकाबले आकर्षक दिखाते हैं. लेकिन निवेश का फैसला सिर्फ इन संकेतकों पर नहीं होना चाहिए. कंपनियों की कमाई, बॉन्ड यील्ड और आर्थिक परिस्थितियां आगे की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी.

    इसलिए कम वैल्यूएशन को संभावित अवसर के संकेत के तौर पर देखा जा सकता है, बाजार में तेजी की गारंटी के रूप में नहीं.