NSE की जांच में ब्रोकर्स की कई खामियां उजागर, MTF में नियमों की अनदेखी; क्लाइंट के पैसे और साइबर सुरक्षा पर भी सवाल
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की जांच में ब्रोकरों के स्तर पर कई खामियां सामने आई हैं. अक्टूबर 2025 से मार्च 2026 के बीच हुई जांच में पर्याप्त मार्जिन नहीं लेना, ऐसे शेयरों को खरीदने के लिए उधार देना, जिन पर ये सुविधा देने की अनुमति नहीं है. ग्राहकों के फंड के निपटान में गड़बड़ी, KYC नियमों का उल्लंघन और अनधिकृत ट्रेडिंग जैसे मामले मिले. साइबर सुरक्षा और रिकॉर्ड रखने में भी कमियां पाई गईं. NSE ने ब्रोकरों को नियमों का पालन सुनिश्चित करने को कहा है.
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न्यूज़ हाइलाइट्स
NSE की जांच में ब्रोकरों की कई खामियां उजागर
MTF में पर्याप्त मार्जिन नहीं लेने के मामले
ग्राहकों के पैसे के निपटान में गड़बड़ी
बिना अनुमति ट्रेडिंग और गारंटीड रिटर्न के वादे
NSE Broker Inspection: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने मार्जिन ट्रेडिंग, ग्राहकों के फंड, KYC और साइबर सुरक्षा से जुड़ी कई कमियों को उजागर किया है. एक्सचेंज ने अक्टूबर 2025 से मार्च 2026 के दौरान हुई जांच में ब्रोकर और ऑथराइज्ड पर्सन के स्तर पर नियमों के पालन में खामियां पाईं. शेयर बाजार में निवेश करने वाले लोगों के लिए ब्रोकर की भूमिका काफी अहम होती है. निवेशकों के पैसे, शेयरों और ट्रेडिंग से जुड़े रिकॉर्ड को सही तरीके से संभालना ब्रोकर की जिम्मेदारी है. लेकिन नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की ताजा रिपोर्ट में ऐसी कई कमियां सामने आई हैं, जिनमें ग्राहकों से पर्याप्त मार्जिन नहीं लेना, गलत शेयरों के बदले मार्जिन ट्रेडिंग की सुविधा देना और ग्राहकों के फंड के निपटान में गड़बड़ी जैसी बातें शामिल हैं.
MTF में नियमों की अनदेखी को लेकर शिकायत
NSE की जांच में मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी यानी MTF से जुड़ी कई कमियां सामने आई हैं. MTF के तहत निवेशक अपनी पूरी रकम लगाए बिना शेयर खरीद सकते हैं. बाकी रकम ब्रोकर देता है, जिसके बदले निवेशक को तय शर्तों के मुताबिक मार्जिन देना होता है और ब्रोकर को ब्याज भी चुकाना पड़ सकता है.एक्सचेंज के नियमों के मुताबिक, MTF के लिए पात्र शेयरों और तय मानकों के अनुसार मार्जिन लेना जरूरी है. लेकिन NSE ने ऐसे मामले पाए, जिनमें ब्रोकरों ने पात्रता के दायरे से बाहर के शेयरों के बदले भी MTF की सुविधा दी. कुछ मामलों में पर्याप्त मार्जिन भी नहीं लिया गया.यह मामला इसलिए अहम है क्योंकि MTF के तहत निवेशक उधार की रकम से शेयर खरीदते हैं. शेयर की कीमत गिरने पर नुकसान बढ़ सकता है और मार्जिन की कमी होने पर निवेशक को अतिरिक्त रकम जमा करनी पड़ सकती है.
तेजी से बढ़ रहा है MTF का कारोबार
मार्जिन ट्रेडिंग का आकार लगातार बढ़ रहा है. CareEdge Ratings के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 में MTF का कुल बुक साइज बढ़कर करीब 1.48 लाख करोड़ रुपये हो गया. अगस्त 2025 में यह करीब 96,000 करोड़ रुपये था.यानी एक साल में MTF का आकार काफी बढ़ा है. ऐसे में मार्जिन की सही गणना, पात्र शेयरों का चयन और ग्राहकों के जोखिम पर नजर रखना और भी जरूरी हो जाता है.
ग्राहकों के फंड और मार्जिन स्टेटमेंट में भी गड़बड़ियां
NSE ने ग्राहकों को रोजाना दिए जाने वाले मार्जिन स्टेटमेंट में देरी और गलत या अधूरी जानकारी देने जैसी कमियां भी दर्ज की हैं. इसके अलावा, एक्सचेंज को मार्जिन और मार्क-टू-मार्केट (MTM) नुकसान की वसूली से जुड़ी गलत जानकारी देने के मामले भी सामने आए.जांच में ग्राहकों के फंड का समय पर निपटान नहीं करना और उनके खातों में रखी रकम से जुड़े स्टेटमेंट में बड़ी गड़बड़ियां भी शामिल हैं. कुछ मामलों में ब्रोकरों ने ग्राहकों के उपलब्ध क्रेडिट बैलेंस से ज्यादा रकम का भुगतान किया.एक्सचेंज ने यह भी पाया कि कुछ ब्रोकरों ने शुरुआती मार्जिन की कमी के कारण लगे जुर्माने का बोझ ग्राहकों पर डाल दिया. वहीं, ग्राहकों के फंड के नियमित निपटान के समय रकम के ट्रांसफर की जानकारी SMS और ईमेल से नहीं देने की कमियां भी सामने आईं.
ऑथराइज्ड पर्सन के जरिए अनधिकृत ट्रेडिंग पर सवाल
NSE ने ऑथराइज्ड पर्सन से जुड़ी कई गड़बड़ियों को भी लिस्ट किया है. ऑथराइज्ड पर्सन वो व्यक्ति या कंपनी होती है, जो किसी रजिस्टर्ड ब्रोकर के साथ जुड़कर ग्राहकों को ट्रेडिंग सर्विसेज उपलब्ध कराने में मदद करती है.एक्सचेंज को ऐसे मामले मिले, जिनमें ऑथराइज्ड पर्सन ग्राहकों या दूसरे लोगों से पैसे ले रहे थे अथवा उन्हें भुगतान कर रहे थे. कुछ मामलों में ग्राहकों की यूजर ID और पासवर्ड का इस्तेमाल करके उनकी ओर से अनधिकृत ट्रेडिंग की गई. ग्राहकों की तरफ से खुद ट्रेड करने की अनुमति मांगने और ब्रोकरेज कमाने के लिए उनके खातों में ट्रेडिंग करने जैसी गतिविधियां भी जांच के दायरे में रहीं.इसके अलावा, तय या गारंटीड रिटर्न का वादा करना, मुनाफे में हिस्सेदारी, ग्राहकों के खाते खुद संभालना और बिना जरूरी अनुमति पोर्टफोलियो मैनेजमेंट की सेवाएं देने जैसी कमियां भी सामने आईं.NSE ने बिना मंजूरी विज्ञापन जारी करने, ग्राहकों के ऑर्डर का सबूत नहीं रखने और ऑथराइज्ड पर्सन के कार्यालय व ट्रेडिंग टर्मिनल की जानकारी में अंतर जैसी गड़बड़ियों को भी चिह्नित किया.
KYC और ग्राहकों के रिकॉर्ड में भी कमियां
एक्सचेंज की जांच में ग्राहकों के KYC दस्तावेज अधूरे होने, जरूरी जानकारी गायब रहने और निर्धारित तकनीकी प्रक्रिया का पालन नहीं करने जैसी कमियां सामने आईं. NSE ने यह भी पाया कि कुछ मामलों में ग्राहकों को उनका पूरा रजिस्ट्रेशन दस्तावेज यूनिक क्लाइंट कोड अपलोड होने के सात दिनों के भीतर मुफ्त में उपलब्ध नहीं कराया गया.इसके अलावा, ग्राहकों के मोबाइल नंबर और ईमेल से जुड़ी गलत जानकारी, लंबे समय तक ट्रेडिंग नहीं करने वाले ग्राहकों के खातों को निष्क्रिय नहीं दिखाना और एक ही ईमेल पते पर कई ग्राहकों के कॉन्ट्रैक्ट नोट भेजना भी जांच में शामिल रहा.एक्सचेंज ने ग्राहकों के ऑर्डर के सबूत, शेयरों के रिकॉर्ड, बैंक बुक, क्लाइंट लेजर और भुगतान के अनुरोधों से जुड़े दस्तावेज सही तरीके से नहीं रखने जैसी कमियां भी बताईं. डेरिवेटिव सेगमेंट में ग्राहकों की वित्तीय जानकारी के समर्थन में नए दस्तावेज नहीं रखना और जोखिम प्रबंधन की लिखित नीति का अभाव भी इसमें शामिल है.
साइबर सुरक्षा व्यवस्था में भी कमियां
NSE ने ब्रोकरों के ट्रेडिंग और प्रशासनिक सिस्टम की साइबर सुरक्षा पर भी सवाल उठाए हैं. जांच में महत्वपूर्ण डिजिटल संपत्तियों की सही पहचान नहीं करना, कमजोर पासवर्ड नीति और जरूरी सिस्टम में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन को सक्रिय या सत्यापित नहीं करना जैसी कमियां सामने आईं.इसके अलावा, डेटा लीक रोकने वाले सिस्टम का केवल निगरानी के लिए इस्तेमाल करना, फायरवॉल और सुरक्षा निगरानी व्यवस्था के साथ अधूरा तालमेल, सुरक्षा लॉग को पर्याप्त समय तक सुरक्षित नहीं रखना और विशेष अधिकार वाले यूजर अकाउंट पर कमजोर नियंत्रण जैसी समस्याएं भी दर्ज की गईं.इंटरनेट से जुड़े सिस्टम के लिए वेब एप्लिकेशन फायरवॉल लागू नहीं करने और सुरक्षित डेटा स्टोरेज से जुड़ी कमियों को भी एक्सचेंज ने चिह्नित किया है.
फंड ट्रांसफर, शेयरों की गिरवी और निगरानी से जुड़े मामले
NSE ने ग्राहकों के पूरी तरह भुगतान किए गए शेयरों को गलत खाते में गिरवी रखने, ग्राहकों के उपलब्ध बैलेंस को क्लियरिंग कॉरपोरेशन तक भेजने की प्रक्रिया में कमियां और ग्राहकों के बकाया से अधिक मूल्य के शेयरों का इस्तेमाल करने जैसे मामले भी सूचीबद्ध किए हैं.इसके अलावा, ब्रोकरों की नेटवर्थ की गणना में अंतर, कॉन्ट्रैक्ट नोट भेजने में देरी, इंटरनेट के जरिए दिए गए ऑर्डर का मूल IP एड्रेस रिकॉर्ड नहीं करना और ग्राहकों की ट्रेडिंग पर पर्याप्त निगरानी नहीं रखना भी जांच में सामने आया.एक्सचेंज ने ग्राहकों के ट्रेड के लिए फंड उपलब्ध कराने और नाबालिगों के खातों में ट्रेडिंग की अनुमति देने से जुड़े मामलों को भी चिह्नित किया है.
ब्रोकरों को व्यवस्था मजबूत करने की सलाह
NSE ने ब्रोकरों को जांच में सामने आई कमियों पर ध्यान देने और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए जरूरी सिस्टम और प्रक्रियाएं मजबूत करने को कहा है. यह सूची जांच के दौरान सामने आई आम खामियों को बताती है. इसका मतलब यह नहीं है कि हर ब्रोकर ने सभी तरह की गड़बड़ियां की हैं.निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे अपने ट्रेडिंग खाते के स्टेटमेंट, मार्जिन की जानकारी, फंड ट्रांसफर के संदेश और कॉन्ट्रैक्ट नोट नियमित रूप से जांचें. साथ ही, अपनी यूजर आईडी और पासवर्ड किसी दूसरे व्यक्ति के साथ साझा करने से बचें और गारंटीड रिटर्न का दावा करने वालों से सतर्क रहें.
