Closing Auction पर उठ रहे सवाल, भारत में क्यों नहीं चल रहा Global मॉडल?
एनएसई का नया सीएएस शुरू हुए एक हफ्ता हुआ है, लेकिन कम भागीदारी, कमजोर लिक्विडिटी और कैश-डेरिवेटिव समय के गैप से सही बंद भाव पर सवाल उठ रहे हैं.
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न्यूज़ हाइलाइट्स
बंद भाव सूचकांकों, म्यूचुअल फंड और डेरिवेटिव सेटलमेंट के लिए अहम है
जिमीट मोदी बोले, सिर्फ नीलामी से सही कीमत तय नहीं होगी
भारत में सीएएस का हिस्सा कारोबार का सिर्फ 1.9 प्रतिशत है
NSE का नया Closing Auction Session यानी CAS शुरू हुए एक हफ्ता हो चुका है. इसे लाने का मकसद दिन की आखिरी कीमत को ज्यादा transparent और representative बनाना है. लेकिन शुरुआत के बाद अब एक अहम सवाल उठ रहा है - क्या भारत में CAS उसी तरह प्रभावी हो पाएगा, जैसा दुनिया के बड़े बाजारों में closing auctions काम करते हैं? या फिर यहां सबसे बड़ी चुनौती auction के design की नहीं, बल्कि उसमें हिस्सा लेने वाले investors और institutions की होगी?
