Success Story : जेब में थे सिर्फ 8 डॉलर, अब 52,878 करोड़ रूपये की डील! कौन हैं Prem Watsa?
प्रेम वत्स से जुड़ी फेयरफैक्स इकाई को आईडीबीआई बैंक की 60.72 फीसदी हिस्सेदारी के 52,878 करोड़ रुपये के सौदे की मंजूरी मिली, लेकिन आरबीआई की मंजूरी बाकी है.
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न्यूज़ हाइलाइट्स
हैदराबाद में जन्मे वत्स ने आईआईटी मद्रास से इंजीनियरिंग पढ़ी
कनाडा में पढ़ाई के दौरान घरेलू उपकरण बेचकर अपना खर्च चलाया
सौदा पूरा होने से पहले आरबीआई की जरूरी मंजूरी बाकी है
दुनिया के मशहूर निवेशक वॉरेन बफे का नाम तो आपने सुना ही होगा. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कनाडा में भी एक ऐसे अरबपति निवेशक हैं, जिन्हें 'कनाडा का वॉरेन बफे' कहा जाता है? ये हैं प्रेम वत्स. एक वक्त था, जब प्रेम वत्स सिर्फ 8 डॉलर लेकर कनाडा पहुंचे थे. वहां पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए उन्हें एयर कंडीशनर और फर्नेस जैसे घरेलू उपकरण तक बेचने पड़े. लेकिन नौकरी से शुरू हुआ उनका सफर आगे चलकर अरबों डॉलर के कारोबारी साम्राज्य तक पहुंच गया. आज उनकी कंपनी Fairfax Financial Holdings से जुड़ी इकाई IDBI बैंक की 60.72 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के लिए 52,878 करोड़ रुपये की डील को मिली मंजूरी के बाद चर्चा में है. आखिर हैदराबाद के एक मध्यमवर्गीय परिवार से निकलकर प्रेम वत्स दुनिया के बड़े निवेशकों में कैसे शामिल हुए? उनका कारोबार क्या है और भारत में उनका कितना बड़ा निवेश है? चलिए, जानते हैं उनकी पूरी कहानी.
हैदराबाद से कनाडा तक का सफर
प्रेम वत्स का जन्म 1950 में हैदराबाद में हुआ था. उन्होंने हैदराबाद पब्लिक स्कूल से पढ़ाई की और 1971 में IIT मद्रास से केमिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की. इसके बाद वह आगे की पढ़ाई के लिए कनाडा चले गए. वहां उन्होंने वेस्टर्न ओंटारियो यूनिवर्सिटी से MBA किया. पढ़ाई के दौरान अपना खर्च चलाने के लिए उन्होंने घरेलू उपकरण बेचने का काम किया. MBA के बाद 1974 में उन्हें Confederation Life Insurance Company में नौकरी मिली. यहां उन्होंने निवेश और शेयर बाजार को करीब से समझा. इसी अनुभव ने आगे चलकर उनके कारोबारी सफर की नींव रखी.
नौकरी से Fairfax तक का सफर
1984 में प्रेम वत्स ने Hamblin Watsa Investment Counsel की शुरुआत की. इसके अगले साल उन्होंने कनाडा की एक बीमा कंपनी का नियंत्रण हासिल किया. आगे चलकर यही कारोबार Fairfax Financial Holdings के रूप में विकसित हुआ. आज Fairfax एक अंतरराष्ट्रीय बीमा और निवेश समूह है. कंपनी बीमा और रीइंश्योरेंस का कारोबार करती है और दूसरी कंपनियों में भी निवेश करती है. आसान भाषा में समझें तो बीमा कंपनी ग्राहकों से प्रीमियम लेती है. उसे भविष्य में बीमा के दावों का भुगतान भी करना होता है. इन जरूरतों को ध्यान में रखकर कंपनी अपनी पूंजी का निवेश करती है. इसी निवेश से मिलने वाला रिटर्न उसके कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद करता है. प्रेम वत्स इसी मॉडल के जरिए बीमा कारोबार के साथ निवेश और दूसरी कंपनियों को खरीदने पर भी ध्यान देते रहे.
क्यों कहते हैं कनाडा का वॉरेन बफे?
प्रेम वत्स को 'कनाडा का वॉरेन बफे' इसलिए कहा जाता है, क्योंकि वह लंबे समय के निवेश पर जोर देते हैं. वह ऐसे कारोबारों में पैसा लगाना पसंद करते हैं, जिनमें उन्हें आगे बढ़ने की संभावना दिखाई देती है. उनकी निवेश सोच पर बेंजामिन ग्राहम के विचारों का भी असर रहा. ग्राहम को वैल्यू इन्वेस्टिंग यानी सही कीमत पर अच्छे कारोबार में निवेश करने की सोच के लिए जाना जाता है. हालांकि, प्रेम वत्स और वॉरेन बफे की रणनीतियां पूरी तरह एक जैसी नहीं हैं. प्रेम वत्स की पहचान बीमा कारोबार के साथ निवेश और अधिग्रहण के जरिए Fairfax का विस्तार करने से जुड़ी है.
भारत में कहां-कहां है Fairfax का कारोबार?
भारत लंबे समय से प्रेम वत्स की निवेश रणनीति का अहम हिस्सा रहा है. Fairfax और उससे जुड़ी कंपनियों ने यहां कई क्षेत्रों में निवेश किया है. सबसे बड़ा नाम बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का है, जिसमें Fairfax India की बड़ी हिस्सेदारी है. इसके अलावा समूह का Thomas Cook India से भी जुड़ाव है. यह कंपनी ट्रैवल और उससे जुड़ी सेवाएं देती है. Sterling Holiday Resorts भी छुट्टियां बिताने और घूमने-फिरने से जुड़ी सेवाओं में काम करती है. वित्तीय सेवाओं में Fairfax का IIFL समूह से जुड़ाव है. IIFL Finance कर्ज देने का कारोबार करती है, जबकि IIFL Capital Services शेयर बाजार और वित्तीय सेवाओं से जुड़ी है. Fairfax का Go Digit में भी निवेश है, जो जनरल इंश्योरेंस के कारोबार में है. इसके अलावा समूह के निवेशों में Quess, Seven Islands Shipping और Sanmar Chemicals जैसे नाम भी शामिल रहे हैं. ये कंपनियां बिजनेस सर्विसेज, शिपिंग और केमिकल्स जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में काम करती हैं. यानी भारत में Fairfax का कारोबार सिर्फ बैंकिंग तक सीमित नहीं है. एयरपोर्ट, ट्रैवल, बीमा और वित्तीय सेवाओं तक इसका निवेश फैला हुआ है.
IDBI बैंक की 52,878 करोड़ रुपये की डील
अब बात उस सौदे की, जिसने प्रेम वत्स को फिर से सुर्खियों में ला दिया है. 14 अक्टूबर 2026 को केंद्र सरकार की कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स ने IDBI बैंक की 60.72 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की मंजूरी दी. इसमें केंद्र सरकार की 30.48 फीसदी और LIC की 30.24 फीसदी हिस्सेदारी शामिल है. Fairfax से जुड़ी कंपनी 10955230 Canada Inc. को इस सौदे के लिए मंजूरी मिली है. डील की कीमत 52,878 करोड़ रुपये है. हालांकि, सरकार की मंजूरी का मतलब यह नहीं है कि अधिग्रहण पूरा हो गया है. सौदे को पूरा करने के लिए RBI समेत जरूरी नियामकीय मंजूरियां और दूसरी प्रक्रियाएं पूरी होनी बाकी हैं. अगर यह सौदा पूरा होता है, तो Fairfax को IDBI बैंक में बहुमत हिस्सेदारी और बैंक के प्रबंधन में अहम भूमिका मिल सकती है. सरकार और LIC की संयुक्त हिस्सेदारी घटकर करीब 34 फीसदी रह जाएगी.
IDBI बैंक पहले भी बड़े बदलाव से गुजर चुका है. 2019 में LIC ने बैंक में नियंत्रण वाली हिस्सेदारी हासिल की थी. अब इस सौदे से बैंक के नियंत्रण में फिर बदलाव हो सकता है. Fairfax पहले से ही CSB बैंक में बड़ा निवेशक है. IDBI बैंक का कारोबार CSB बैंक से काफी बड़ा है. ऐसे में यह सौदा Fairfax को भारत के बैंकिंग क्षेत्र में अपना कारोबार बढ़ाने का मौका दे सकता है. लेकिन इसके लिए नियामकीय नियमों और RBI की शर्तों का पालन जरूरी होगा.
प्रेम वत्स की नेटवर्थ और निजी जिंदगी
प्रेम वत्स की संपत्ति का बड़ा हिस्सा उनके कारोबार और निवेशों से जुड़ा है. उनकी नेटवर्थ के अलग-अलग अनुमान मिलते हैं, क्योंकि शेयरों और निवेशों की कीमत बाजार के साथ बदलती रहती है. वह अपनी निजी जिंदगी को सुर्खियों से दूर रखते हैं. उनकी पत्नी का नाम नलिनी लोगानधन है और उनके तीन बच्चे हैं. भारत में व्यापार और उद्योग के क्षेत्र में योगदान के लिए 2020 में उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया था.
एक नौकरी से अंतरराष्ट्रीय कारोबारी समूह तक
प्रेम वत्स की कहानी सिर्फ 8 डॉलर से अरबों डॉलर तक पहुंचने की नहीं है. यह उस सफर की कहानी है, जिसमें उन्होंने नौकरी से निवेश की बारीकियां सीखीं, अपना कारोबार शुरू किया और बीमा के साथ निवेश को जोड़कर Fairfax को एक अंतरराष्ट्रीय समूह बनाया. अब IDBI बैंक की 52,878 करोड़ रुपये की डील उनके भारत में निवेश के सफर का बड़ा पड़ाव बन सकती है. हालांकि, सौदे का अंतिम असर जरूरी मंजूरियों और बैंक के भविष्य के प्रबंधन पर निर्भर करेगा. हैदराबाद से कनाडा तक का सफर तय करने वाले प्रेम वत्स की कहानी बताती है कि बड़े कारोबारी सफर की शुरुआत हमेशा बड़ी पूंजी से नहीं होती. कई बार मेहनत, सीखने की इच्छा और लंबे समय तक अपने लक्ष्य पर टिके रहना भी कामयाबी का रास्ता बन सकता है.
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