RBI के गोल्ड रिजर्व की वैल्यू लगातार दूसरे हफ्ते घटी, 880 टन सोना होने के बावजूद क्यों आई गिरावट? जानिए पूरी डिटेल
RBI के गोल्ड रिजर्व की वैल्यू लगातार दूसरे सप्ताह घटी है. 30 अक्टूबर 2026 को समाप्त सप्ताह में सोने के भंडार की कीमत 559 मिलियन डॉलर घटकर 102.591 अरब डॉलर रह गई.
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RBI Gold Reserves: भारतीय रिजर्व बैंक के सोने के भंडार की कीमत एक सप्ताह में 559 मिलियन डॉलर घटकर 102.591 अरब डॉलर रह गई है. इससे पहले वाले सप्ताह में भी 2.65 अरब डॉलर की गिरावट आई थी. हालांकि, गोल्ड रिजर्व की वैल्यू घटने का मतलब यह नहीं है कि RBI ने सोना बेच दिया है. जानिए क्या है इस गिरावट की वजह और भारत के विदेशी मुद्रा भंडार का ताजा हाल.
सोने को दुनिया भर के केंद्रीय बैंक आर्थिक संकट और वैश्विक अनिश्चितता के समय एक अहम सुरक्षित संपत्ति मानते हैं. यही वजह है कि भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI भी अपने विदेशी मुद्रा भंडार का एक हिस्सा सोने के रूप में रखता है. लेकिन हाल के आंकड़ों में RBI के गोल्ड रिजर्व की वैल्यू में लगातार दूसरे सप्ताह गिरावट दर्ज की गई है.
RBI के 30 अक्टूबर 2026 को समाप्त सप्ताह के आंकड़ों के मुताबिक, भारत के सोने के भंडार की वैल्यू 559 मिलियन डॉलर घटकर 102.591 अरब डॉलर रह गई. इससे पहले वाले सप्ताह में भी गोल्ड रिजर्व की वैल्यू में 2.650 अरब डॉलर की बड़ी कमी आई थी.
लगातार दो सप्ताह से गोल्ड रिजर्व की वैल्यू घटने के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या RBI ने सोना बेचना शुरू कर दिया है या फिर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में गिरावट का असर दिखाई दे रहा है?
RBI के पास कितना सोना है?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि गोल्ड रिजर्व की वैल्यू घटने का मतलब यह नहीं है कि RBI ने अपने सोने का भंडार कम कर दिया है. सोने की कीमतों में गिरावट आने से भी उसके कुल भंडार की डॉलर में कीमत कम हो सकती है.
मार्च 2026 के आखिर तक RBI के पास कुल 880.52 टन सोना था. यह भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार का करीब 16.7 फीसदी हिस्सा था.
केंद्रीय बैंक सोना इसलिए रखते हैं, क्योंकि वैश्विक आर्थिक संकट, वित्तीय अस्थिरता और दूसरी अनिश्चित परिस्थितियों में यह एक अहम रिजर्व एसेट के तौर पर काम आ सकता है. दुनिया भर में सोने की स्वीकार्यता होने के कारण इसे विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने का भी एक जरिया माना जाता है.
इसलिए सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट आने पर RBI के पास मौजूद सोने की वैल्यू घट सकती है, भले ही उसके पास सोने की मात्रा में कोई बदलाव न हुआ हो.
SDR और IMF रिजर्व में भी हुआ बदलाव
सोने के अलावा RBI के विदेशी मुद्रा भंडार के दूसरे हिस्सों में भी बदलाव देखने को मिला है.
30 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में भारत के Special Drawing Rights यानी SDR में 47 मिलियन डॉलर की कमी आई. इसके बाद SDR भंडार घटकर 18.558 अरब डॉलर रह गया. इससे पहले वाले सप्ताह में इसमें 27 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई थी.
वहीं, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF के पास रखे भारत के रिजर्व में 3 मिलियन डॉलर की मामूली बढ़ोतरी हुई. इसके साथ यह बढ़कर 4.790 अरब डॉलर हो गया. इससे पहले वाले सप्ताह में इसमें 4 मिलियन डॉलर की गिरावट आई थी.
लगातार आठवें सप्ताह घटा भारत का विदेशी मुद्रा भंडार
अब बात भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार की. RBI की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, 30 अक्टूबर 2026 को समाप्त सप्ताह में देश का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 2.691 अरब डॉलर घटकर 717.056 अरब डॉलर रह गया.
इससे पहले वाले सप्ताह में भी विदेशी मुद्रा भंडार में 1.269 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई थी. यानी भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार आठवें सप्ताह घटा है.
विदेशी मुद्रा भंडार में सबसे बड़ा हिस्सा Foreign Currency Assets यानी FCA का होता है. इस सप्ताह FCA में 2.088 अरब डॉलर की कमी आई और यह घटकर 591.118 अरब डॉलर रह गया.
रुपये को संभालने के लिए डॉलर बेचता है RBI
विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट की एक वजह रुपये को सहारा देने के लिए RBI की ओर से डॉलर की बिक्री भी हो सकती है.
जब डॉलर के मुकाबले रुपये पर दबाव बढ़ता है, तो रिजर्व बैंक विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर बेचकर रुपये की गिरावट को नियंत्रित करने की कोशिश करता है. बाजार में डॉलर की उपलब्धता बढ़ने से रुपये को सहारा मिल सकता है. हालांकि, इस प्रक्रिया में RBI के विदेशी मुद्रा भंडार पर असर पड़ता है.
क्या RBI ने सोना बेचना शुरू कर दिया है?
फिलहाल उपलब्ध आंकड़ों से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि गोल्ड रिजर्व की वैल्यू में गिरावट का कारण RBI की ओर से सोने की बिक्री है. सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बदलाव भी इसकी वैल्यू को प्रभावित कर सकता है.
मार्च 2026 के आखिर तक RBI के पास 880.52 टन सोना मौजूद था. ऐसे में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर उसके भंडार की कुल वैल्यू पर पड़ना स्वाभाविक है.
आने वाले हफ्तों में सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमतों, रुपये की चाल और विदेशी मुद्रा भंडार के आंकड़ों पर नजर रहेगी. इनसे यह समझने में मदद मिलेगी कि RBI के रिजर्व में आगे क्या बदलाव आते हैं.
