Jio IPO या Reliance शेयर, किसमें छिपा है ज्यादा कमाई का मौका?
रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में क्यों आई तेजी? जियो के 30 हजार करोड़ रुपये के आईपीओ ने शेयर बाजार में मचाया तहलका. जानें एक्सपर्ट्स की राय, जियो का सब्सक्रिप्शन स्टेटस और निवेशकों के लिए आगे क्या है सही विकल्प
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न्यूज़ हाइलाइट्स
जियो IPO के दम पर रिलायंस में खरीदारी
जियो IPO पहले ही दिन 2.89 गुना सब्सक्राइब
Jio की लिस्टिंग से वैल्यू अनलॉकिंग की उम्मीद
शेयर बाजार में इन दिनों अगर किसी सबसे बड़े इवेंट की सबसे ज्यादा चर्चा है, तो वह है Jio Platforms का मेगा आईपीओ. ये आईपीओ महज एक घंटे के भीतर पूरा इश्यू फुल सब्सक्राइब हो गया. इस धमाकेदार शुरुआत का सीधा असर इसकी पैरेंट कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों पर भी साफ देखने को मिला है.
रिलायंस के शेयरों में शानदार रिकवरी
बुधवार को रिलायंस का शेयर करीब 3% की छलांग लगाकर 1,234 रुपये पर पहुंच गया. खास बात यह है कि पिछले हफ्ते ही यह शेयर अपने 52 हफ्ते के निचले स्तर पर फिसल गया था, जहां से अब इसमें 7% से ज्यादा की दमदार रिकवरी आ चुकी है.
जियो आईपीओ को बंपर रिस्पॉन्स
जियो प्लेटफॉर्म के आईपीओ को निवेशकों की तरफ से जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है. शुरुआती एक घंटे में ही पूरा इश्यू सब्सक्राइब होने के बाद, खबर लिखे जाने तक जियो का आईपीओ 3 गुना के करीब भर चुका था. Qualified Institutional Buyers का हिस्सा 8.75 गुना से ज्यादा सब्सक्राइब हुआ है. Non-Institutional Investors का हिस्सा 1.46 गुना भरा है.रिटेल निवेशकों का हिस्सा 0.64 गुना भर चुका है.इसके अलावा, कर्मचारियों और शेयर होल्डर्स का कोटा 1.25 गुना के करीब भर चुके हैं
रिलायंस के शेयरधारकों को कैसे मिल रहा है फायदा?
जियो के इस आईपीओ का फायदा सिर्फ जियो को ही नहीं, बल्कि उसकी पैरेंट कंपनी रिलायंस के शेयरधारकों को भी मिलता दिख रहा है. अरिहंत कैपिटल मार्केट्स के जॉइंट एमडी, अर्पित जैन के मुताबिक, रिलायंस की जियो में हिस्सेदारी पर अगर मानक 30% का होल्डिंग कंपनी डिस्काउंट भी लगा दिया जाए, तो भी उसकी अनुमानित वैल्यू करीब 4.65 लाख करोड़ रुपये बैठती है. आसान भाषा में समझें तो 'होल्डिंग कंपनी डिस्काउंट' वह कटौती है, जो किसी कंपनी की दूसरी कंपनी में हिस्सेदारी की वैल्यू आंकते समय की जाती है. इतनी बड़ी कटौती के बाद भी जियो में रिलायंस की हिस्सेदारी की वैल्यू बहुत बड़ी है. इसका मतलब साफ है कि जो निवेशक आज रिलायंस का शेयर खरीद रहे हैं, उन्हें जियो के साथ-साथ रिलायंस रिटेल, ऑयल-टू-केमिकल (O2C), न्यू एनर्जी और मीडिया जैसे विशाल कारोबारों में भी हिस्सेदारी मिल रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैल्यूएशन पर ये सभी कारोबार निवेशकों को बेहद आकर्षक वैल्यू दे सकते हैं.
एक्सपर्ट्स की क्या है राय?
जो निवेशक सीधे तौर पर भारत के डिजिटल और टेक ग्रोथ की सवारी करना चाहते हैं, उनके लिए जियो प्लेटफॉर्म्स एक फोक्स्ड विकल्प है, वहीं जो निवेशक टेक और टेलीकॉम के साथ-साथ एनर्जी और रिटेल जैसे डाइवर्सिफाइड कारोबार में निवेश चाहते हैं, उनके लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज एक मुकम्मल और सुरक्षित दांव है; हालाँकि, हर सिक्के के दो पहलू होते हैं और जहाँ बाजार में जबरदस्त उत्साह है, वहीं जानकारों का एक धड़ा थोड़ी सावधानी बरतने की सलाह भी दे रहा है.मंगल केशव फाइनेंशियल सर्विसेज के चेयरमैन, परेश भगत का मानना है कि जियो की लिस्टिंग का रोमांच काफी हद तक पहले ही रिलायंस के शेयरों में डिस्काउंट हो चुका है. उनके मुताबिक, लिस्टिंग के तुरंत बाद कोई बहुत बड़ा नया 'वैल्यू अनलॉकिंग' सरप्राइज मिलने की गुंजाइश थोड़ी कम है. हालांकि, रिलायंस का डायवर्सिफाइड बिजनेस मॉडल कंपनी को लंबी अवधि की वित्तीय स्थिरता जरूर मुहैया कराता है.
डिस्क्लेमर: ये केवल जानकारी और शिक्षा के उद्देश्य से बनाया गया है. इसमें दी गई राय, ब्रोकरेज रिपोर्ट और आंकड़े सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी पर आधारित हैं. यह किसी भी शेयर में खरीदने या बेचने की सलाह नहीं है. शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है. निवेश का कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें.
