Russia Gold Reserve : रूस ने सितंबर में बेचा 6.2 टन सोना, 2019 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंचा गोल्ड रिजर्व

रूस लगातार अपने सोने के भंडार में कटौती कर रहा है. सितंबर 2026 में रूस ने करीब 6.2 टन सोना बेच दिया, जिसके बाद उसका गोल्ड रिजर्व घटकर लगभग 2,264 टन रह गया. यह 2019 के आखिर के बाद सबसे निचला स्तर है. आखिर रूस को अपना सोना बेचने की जरूरत क्यों पड़ रही है?

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Russia Gold Selling : रूस का केंद्रीय बैंक लगातार 10 महीने से अपने सोने के भंडार में कटौती कर रहा है. सितंबर 2026 में करीब 6.2 टन सोना बेचने के बाद रूस का गोल्ड रिजर्व घटकर लगभग 2,264 टन रह गया है. बढ़ते बजट घाटे और सैन्य खर्च के बीच रूस के इस कदम पर दुनिया के सोना बाजार की नजर है. रूस दुनिया के सबसे बड़े सोना उत्पादक देशों में शामिल है. एक समय उसका केंद्रीय बैंक लगातार अपने गोल्ड रिजर्व में इजाफा कर रहा था, लेकिन अब तस्वीर बदलती दिख रही है. रूस ने सितंबर 2026 में करीब 6.2 टन सोना बेच दिया. यह लगातार 10वां महीना है, जब रूस के सोने के भंडार में कमी दर्ज की गई है.

बैंक ऑफ रशिया के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में रूस ने करीब 2 लाख ट्रॉय औंस सोना बेचा. इसके बाद उसका सरकारी गोल्ड रिजर्व घटकर 7.28 करोड़ ट्रॉय औंस यानी करीब 2,264 टन रह गया. यह 2019 के आखिर के बाद सबसे निचला स्तर है.

सोने की कीमत में भी गिरावट

22 अक्टूबर को 4 दिसंबर 2026 की डिलीवरी वाला सोना 1,180 अंकों की गिरावट के साथ 1,44,900 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था. ऐसे में रूस के गोल्ड रिजर्व में कटौती के साथ-साथ सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी बाजार के लिए अहम बना हुआ है. गोल्ड रिजर्व का मतलब उस सोने से है, जिसे कोई देश अपने केंद्रीय बैंक के पास सुरक्षित रखता है. यह देश की विदेशी परिसंपत्तियों और आर्थिक सुरक्षा का अहम हिस्सा होता है. जरूरत पड़ने पर सरकार इस सोने को बेचकर या इसके बदले वित्तीय संसाधन जुटाकर अपनी जरूरतें पूरी कर सकती है.

क्यों सोना बेच रहा है रूस?

रूस के सोने की बिक्री के पीछे एक अहम वजह सरकारी बजट पर बढ़ता दबाव बताया जा रहा है. जब सरकार का खर्च उसकी कमाई से ज्यादा हो जाता है, तो बजट घाटा बढ़ता है. ऐसे में सरकार को खर्च पूरे करने के लिए अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत पड़ती है. रिपोर्टों के मुताबिक, दिसंबर 2025 से रूस करीब 62 टन सोना बेच चुका है. इसे 1998 के वित्तीय संकट के बाद उसके गोल्ड रिजर्व में सबसे बड़ी लगातार कटौती बताया जा रहा है. रूस के बजट पर सैन्य और सुरक्षा खर्च का दबाव भी है. अनुमान के मुताबिक, 2026 में रूस के कुल सरकारी खर्च का करीब 38 फीसदी हिस्सा सैन्य और सुरक्षा मदों पर खर्च हो सकता है. ऐसे में सरकारी खजाने की जरूरतों को पूरा करने के लिए सोने के भंडार में कटौती एक अहम घटनाक्रम बन गई है.

गोल्ड रिजर्व की वैल्यू में भी आई गिरावट

रूस के बचे हुए सोने की कीमत सितंबर के आखिर में करीब 301.6 अरब डॉलर आंकी गई. अगस्त के आखिर में यह वैल्यू करीब 333.5 अरब डॉलर थी. हालांकि, इस गिरावट को सिर्फ सोने की बिक्री से जोड़कर देखना सही नहीं होगा. गोल्ड रिजर्व की कुल कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के भाव पर भी निर्भर करती है. अगर सोने की कीमत गिरती है, तो भंडार में सोने की मात्रा में बड़ा बदलाव न होने पर भी उसकी कुल वैल्यू कम हो सकती है.

चीन के साथ बढ़ता कीमती धातुओं का कारोबार

रूस और चीन के बीच कीमती धातुओं का व्यापार भी इस कहानी का अहम हिस्सा है. जुलाई में ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 की पहली छमाही में रूस से चीन को कीमती धातुओं के अयस्क और कंसंट्रेट्स का आयात सालाना आधार पर करीब 80 फीसदी बढ़कर लगभग 1 अरब डॉलर हो गया था. इस श्रेणी में सोना और चांदी जैसी धातुएं भी शामिल हैं. यह आंकड़ा ट्रेड डेटा मॉनिटर और चीन के कस्टम विभाग के आंकड़ों पर आधारित बताया गया था. हालांकि, निर्यात की कुल वैल्यू बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि सोने की भौतिक मात्रा भी उसी अनुपात में बढ़ी है. कीमतों में तेजी से भी व्यापार का कुल मूल्य बढ़ सकता है.

रिपोर्ट में उस समय सोने की कीमत में इस साल करीब 28 फीसदी की तेजी और पिछले 12 महीनों में स्पॉट गोल्ड में लगभग 43 फीसदी की बढ़त का भी जिक्र किया गया था.

रूस दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उत्पादक

रूस दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है, जबकि चीन पहले स्थान पर है. रूस हर साल 300 टन से ज्यादा सोने का उत्पादन करता है. रूस का केंद्रीय बैंक भी पहले सरकारी स्तर पर सोने की खरीदारी करने वाले प्रमुख संस्थानों में शामिल रहा है. हालांकि, 2022 में यूक्रेन पर रूस के पूर्ण पैमाने पर हमले के बाद से उसके केंद्रीय बैंक की सोने की खरीदारी में कमी आई है. दूसरी तरफ, चीन का केंद्रीय बैंक हाल के वर्षों में दुनिया के प्रमुख सरकारी सोना खरीदारों में शामिल रहा है.

रूस के आम नागरिक भी खरीद रहे सोना

रूस में जहां केंद्रीय बैंक अपने गोल्ड रिजर्व में कटौती कर रहा है, वहीं आम नागरिकों की सोने में दिलचस्पी भी मजबूत बनी हुई है. रिपोर्ट के मुताबिक, महंगाई और बचत की वैल्यू को लेकर चिंताओं के बीच लोग सोने को अपनी रकम सुरक्षित रखने के विकल्प के तौर पर देख रहे हैं. 2024 में रूस के आम उपभोक्ताओं ने करीब 75.6 टन सोना खरीदा था. यह रूस के सालाना सोना उत्पादन का लगभग 25 फीसदी था.

आगे क्या होगा?

रूस की सोने की बिक्री दिखाती है कि गोल्ड रिजर्व केवल निवेश या आर्थिक सुरक्षा का साधन नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर सरकारी खर्चों के लिए संसाधन जुटाने का जरिया भी बन सकता है. अब बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि रूस अपने बजट घाटे और भारी सरकारी खर्च के बीच कितने समय तक सोने के भंडार में कटौती जारी रखता है. रूस की नीतियां, चीन की सोने की मांग और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों का उतार-चढ़ाव आने वाले समय में वैश्विक गोल्ड मार्केट को प्रभावित कर सकते हैं.