SBI का मुनाफा 14% बढ़ा, फिर शेयर में क्यों आई गिरावट? जानिए बैंक के नतीजों की पूरी कहानी

SBI के सितंबर तिमाही के नतीजों में बैंक का मुनाफा 14.3 फीसदी बढ़कर 23,038 करोड़ रुपये पहुंच गया। ब्याज से होने वाली कमाई में भी करीब 15 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. लेकिन ऑपरेटिंग प्रॉफिट में गिरावट और ने कई सवाल खड़े किए हैं. आखिर शानदार मुनाफे के बावजूद SBI के शेयर में कमजोरी क्यों आई? बैंक की एसेट क्वालिटी, NIM और आगे कमाई की संभावनाओं को इस रिपोर्ट में समझिए.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

SBI का मुनाफा 14.3 फीसदी बढ़ा

NII में 14.7 फीसदी की मजबूत ग्रोथ

ऑपरेटिंग प्रॉफिट में 1.4 फीसदी की गिरावट

अच्छे नतीजों के बावजूद शेयर में कमजोरी

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने सितंबर तिमाही में शानदार मुनाफा दर्ज किया है. जुलाई-सितंबर तिमाही में बैंक का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 14.3 फीसदी बढ़कर 23,038 करोड़ रुपये पहुंच गया. पिछले साल इसी तिमाही में बैंक ने 20,160 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था. वहीं, बैंक की ब्याज से होने वाली कमाई में भी करीब 15 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.पहली नजर में SBI के नतीजे काफी मजबूत दिखाई देते हैं. लेकिन जब इन आंकड़ों को थोड़ा गहराई से देखते हैं तो तस्वीर कुछ अलग नजर आती है.

SBI की दूसरी तिमाही के नतीजे कैसे रहे?

सितंबर तिमाही में SBI की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) सालाना आधार पर 14.7 फीसदी बढ़कर 49,143 करोड़ रुपये हो गई. NII का मतलब है कि बैंक को कर्ज पर ब्याज से जितनी कमाई होती है, उसमें से जमा पर दिया जाने वाला ब्याज घटाने के बाद जो रकम बचती है.हालांकि, बैंक का ऑपरेटिंग प्रॉफिट सालाना आधार पर 1.4 फीसदी घटकर 26,937 करोड़ रुपये रह गया. पिछले साल इसी तिमाही में यह 27,311 करोड़ रुपये था.यहां ध्यान देने वाली बात है कि बैंक का नेट प्रॉफिट बाजार के अनुमान से ज्यादा रहा, लेकिन ऑपरेटिंग प्रॉफिट उम्मीद से कम रहा. इससे पता चलता है कि बैंक के सामान्य कारोबार से होने वाली कमाई में उतनी तेजी नहीं आई, जितनी नेट प्रॉफिट के आंकड़े से दिखाई देती है.

हिस्सेदारी बेचने से बढ़ा मुनाफा

SBI के मुनाफे को समझने के लिए उसकी असाधारण कमाई पर भी नजर डालना जरूरी है. इस तिमाही में बैंक ने SBI Funds Management में अपनी करीब 6.3 फीसदी हिस्सेदारी बेची. इस सौदे से बैंक को करीब 7,288 करोड़ रुपये का प्री-टैक्स फायदा हुआ.पिछले साल की सितंबर तिमाही में भी बैंक को Yes Bank में हिस्सेदारी बेचने से 4,593 करोड़ रुपये की असाधारण कमाई हुई थी.इसके अलावा NSE में हिस्सेदारी बेचने से SBI को टैक्स के बाद करीब 2,410 करोड़ रुपये का फायदा हुआ. हालांकि, यह रकम बैंक के मुनाफे में शामिल नहीं की गई, बल्कि कैपिटल रिजर्व में जोड़ी गई.इसका मतलब है कि SBI का मुनाफा बढ़ा जरूर है, लेकिन इसमें हिस्सेदारी बेचने से हुई एकमुश्त कमाई का भी योगदान रहा. ऐसी कमाई हर तिमाही नहीं होती. इसलिए बैंक की असली कारोबारी मजबूती समझने के लिए नियमित कमाई पर नजर रखना जरूरी है.

अच्छे नतीजों के बावजूद शेयर पर दबाव क्यों?

SBI के मजबूत मुनाफे के बावजूद शेयर में कमजोरी की तीन बड़ी वजहें हैं.

  • बैंक का ऑपरेटिंग प्रॉफिट 1.4 फीसदी घटकर 26,937 करोड़ रुपये रह गया. यह बाजार के अनुमान से भी काफी कम था. निवेशक बैंक की नियमित कमाई को ज्यादा अहमियत देते हैं, क्योंकि इससे पता चलता है कि उसका रोजमर्रा का कारोबार कितना मजबूत है.
  • SBI Funds Management में हिस्सेदारी बेचने से बैंक को करीब 7,288 करोड़ रुपये का फायदा हुआ. इस कमाई ने मुनाफे को बढ़ाने में मदद की. लेकिन निवेशक जानते हैं कि इस तरह की कमाई हर तिमाही दोहराई नहीं जा सकती.
  • बैंक की Other Income यानी ब्याज से अलग दूसरे स्रोतों से होने वाली कमाई में सालाना आधार पर करीब 24 फीसदी की गिरावट आई. हालांकि, कम प्रोविजनिंग यानी खराब कर्ज के लिए कम रकम अलग रखने से बैंक के मुनाफे को सहारा मिला.यही वजह है कि निवेशकों ने सिर्फ मुनाफे के आंकड़े को देखकर प्रतिक्रिया नहीं दी. बाजार की चिंता यह है कि क्या SBI आने वाली तिमाहियों में अपने सामान्य कारोबार से भी इतनी ही अच्छी ग्रोथ दिखा पाएगा.

SBI की एसेट क्वालिटी में सुधार

नतीजों में कुछ ऐसे आंकड़े भी हैं जो बैंक के लिए राहत की बात हैं. SBI के खराब कर्ज यानी NPA में सुधार हुआ है.सितंबर तिमाही में बैंक का ग्रॉस NPA घटकर 1.39 फीसदी रह गया, जो जून तिमाही में 1.47 फीसदी था. वहीं, नेट NPA भी 0.38 फीसदी से घटकर 0.36 फीसदी पर आ गया.इसके अलावा बैंक का घरेलू नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) बढ़कर 3.11 फीसदी हो गया. पिछली तिमाही के मुकाबले इसमें 11 बेसिस पॉइंट का सुधार हुआ है.NIM बताता है कि बैंक अपने जमा और कर्ज के कारोबार से कितना ब्याज मार्जिन कमा रहा है. इसमें सुधार बैंक की कमाई के लिए सकारात्मक संकेत है.

आगे SBI के शेयर में कितनी गुंजाइश?

SBI के सितंबर तिमाही के नतीजे मिले-जुले रहे हैं. मुनाफे और ब्याज से होने वाली कमाई में अच्छी बढ़ोतरी हुई है. NPA में भी सुधार आया है. लेकिन ऑपरेटिंग प्रॉफिट में गिरावट और एकमुश्त कमाई का बड़ा योगदान कुछ सवाल खड़े करता है.SBI के शेयर में आगे की तेजी इस बात पर निर्भर करेगी कि बैंक हिस्सेदारी बेचने से होने वाली कमाई के बिना भी अपने नियमित कारोबार से मुनाफे में अच्छी बढ़ोतरी बनाए रख पाता है या नहीं.
 

डिस्क्लेमर: ये केवल जानकारी और शिक्षा के उद्देश्य से बनाया गया है. इसमें दी गई राय, ब्रोकरेज रिपोर्ट और आंकड़े सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी पर आधारित हैं. यह किसी भी शेयर में खरीदने या बेचने की सलाह नहीं है. शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है. निवेश का कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें.