दिवाली से पहले चांदी में आई तेज़ गिरावट, क्या जल्द ही 1 किलो चांदी का भाव 10 ग्राम सोने के बराबर आ जाएगा?

चांदी रिकॉर्ड स्तर से 57 फीसदी गिर चुकी है. जानें मौजूदा भाव, सोना-चांदी अनुपात और वे वजहें, जिनसे 1 किलो चांदी का भाव 10 ग्राम सोने के करीब आ सकता है.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

दिसंबर वायदा चांदी 10,500 रुपये गिरकर 1,78,900 रुपये पर बंद हुई

सोने का वायदा भाव 4,347 रुपये घटकर 1,38,419 रुपये रहा

सोना-चांदी का रेशियो जनवरी में 50 से नीचे था, अब 79 पर

सोने और चांदी की कीमतों में आई तेज गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. हालांकि, इस गिरावट में सबसे ज्यादा नुकसान चांदी को हुआ है. जनवरी 2026 में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद चांदी की कीमत अब तक करीब 57 फीसदी टूट चुकी है. इस गिरावट के बीच एक दिलचस्प सवाल खड़ा हो गया है. क्या आने वाले समय में 1 किलो चांदी की कीमत 10 ग्राम सोने के बराबर हो सकती है?

यह सवाल इसलिए अहम है क्योंकि सोने और चांदी के भाव के बीच का अंतर लगातार कम हो रहा है. हालांकि, यह कोई तय अनुमान नहीं है. मौजूदा कीमतों और गोल्ड-सिल्वर रेशियो के आधार पर सामने आई एक संभावित स्थिति है.

सोने और चांदी के भाव में कितना रह गया अंतर?

शुक्रवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर चांदी का दिसंबर वायदा भाव करीब 10,500 रुपये गिरकर 1,78,900 रुपये प्रति किलो पर बंद हुआ. वहीं, सोने का वायदा भाव 4,347 रुपये की गिरावट के साथ 1,38,419 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया.

इस तरह 1 किलो चांदी और 10 ग्राम सोने की कीमत के बीच अंतर घटकर करीब 40,500 रुपये रह गया है.

अगर सोने की कीमत मौजूदा स्तर पर स्थिर रहती है, तो चांदी को करीब 22.6 फीसदी और गिरना होगा. इसके बाद 1 किलो चांदी का भाव करीब 1,38,400 रुपये तक आ सकता है. इस स्तर पर दोनों की कीमत लगभग बराबर हो जाएगी.

क्या होता है गोल्ड-सिल्वर रेशियो?

सोने और चांदी की कीमतों के इस गणित को समझने के लिए गोल्ड-सिल्वर रेशियो को समझना जरूरी है. यह अनुपात बताता है कि एक औंस सोना खरीदने के लिए कितने औंस चांदी की जरूरत होगी.

  • जनवरी 2026 में यह अनुपात 50 से नीचे चला गया था.

  • अब बढ़कर करीब 79 पर पहुंच गया है.

  • अगर यह 100 तक पहुंचता है, तो 1 किलो चांदी और 10 ग्राम सोने की कीमत लगभग बराबर हो सकती है.

  • यह अनुपात अप्रैल 2025 में 100 के पार भी पहुंच चुका है. यानी ऐसा पहले भी हुआ है, हालांकि इसका दोबारा होना तय नहीं है.

    चांदी की कीमतों में इतनी बड़ी गिरावट क्यों?

    चांदी की कीमतों में गिरावट के पीछे कई वैश्विक वजहें हैं. अमेरिका में महंगाई बढ़ने की आशंका के चलते ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कमजोर हुई है. कच्चे तेल की कीमत 117 डॉलर प्रति बैरल के पार रहने से महंगाई का दबाव बढ़ा है. ऐसे में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरें बढ़ाने की आशंका भी बाजार को परेशान कर रही है.

    इसके अलावा, अमेरिकी शेयर बाजार में टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली ने भी दबाव बढ़ाया है. AI पर कंपनियों के भारी खर्च से कितना रिटर्न मिलेगा, इसे लेकर निवेशकों के बीच चिंता है. इसके चलते कई निवेशकों को नुकसान पूरा करने या मार्जिन कॉल की स्थिति संभालने के लिए सोना और चांदी जैसे एसेट्स भी बेचने पड़े.

    चांदी पर सोने के मुकाबले ज्यादा दबाव की एक बड़ी वजह इसकी मांग का स्वरूप भी है. चांदी की करीब आधी मांग औद्योगिक इस्तेमाल से आती है. इसलिए आर्थिक विकास धीमा पड़ने की आशंका बढ़ने पर इसकी मांग प्रभावित हो सकती है. दूसरी तरफ, सोने को दुनिया के केंद्रीय बैंकों की खरीदारी का भी सहारा मिलता है.

    क्या चांदी में अभी और गिरावट आ सकती है?

    आगे भी चांदी के लिए चुनौतियां बनी हुई हैं. Metals Focus के मुताबिक, चांदी की सप्लाई को लेकर पहले जो कमी थी, वह काफी हद तक कम हुई है. लंदन के भंडार में चांदी का स्टॉक करीब चार साल के उच्च स्तर पर पहुंच गया है. वहीं, इस साल सिल्वर ETF से करीब 6 करोड़ औंस की निकासी हुई है. एजेंसी को 2027 में चांदी का वैश्विक बाजार घाटे से निकलकर सरप्लस में जाने की उम्मीद है.

    HSBC ने भी 2027 के लिए चांदी की औसत कीमत का अनुमान घटाकर 64 डॉलर प्रति औंस कर दिया है.

    हालांकि, चांदी की कीमत का 1 लाख 38 हजार रुपये तक पहुंचना निश्चित नहीं है. यह गणना इस शर्त पर आधारित है कि सोने का भाव मौजूदा स्तर पर बना रहे. सोने की कीमत में बदलाव होने पर यह स्तर भी बदल जाएगा.

    इसलिए निवेशकों को सिर्फ बड़ी गिरावट देखकर खरीदारी का फैसला नहीं करना चाहिए. चांदी की औद्योगिक मांग, डॉलर, अमेरिकी ब्याज दरों और गोल्ड-सिल्वर रेशियो पर नजर रखना जरूरी होगा.

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