YES Bank पर ₹8,415 करोड़ का संकट! सुप्रीम कोर्ट के फैसले से क्यों बढ़ी बैंक की मुश्किल?

YES Bank AT1 Bonds Case: सुप्रीम कोर्ट ने ₹8,415 करोड़ के AT1 बॉन्ड राइट-ऑफ मामले में YES Bank को झटका दिया है. जानिए फैसले का बैंक की पूंजी, CET1 रेशियो और निवेशकों पर क्या असर पड़ सकता है.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का बैंक पर तुरंत असर नहीं

AT1 बॉन्ड फैसले के असर पर रेटिंग एजेंसियों की नजर

CET1 रेशियो में 0.25%–0.3% गिरावट का अनुमान- केयर रेटिंग्स

CET1 रेशियो में 0.2%–0.25% गिरावट का अनुमान- क्रिसिल

यस बैंक को छह साल पहले वित्तीय संकट से निकालने के लिए बड़ा रेस्क्यू प्लान लाया गया था. उस समय बैंक के ₹8,415 करोड़ के AT1 बॉन्ड को पूरी तरह बट्टे खाते में डाल दिया गया था. अब सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को चुनौती देने वाली अपीलें खारिज कर दी हैं. इससे बैंक के सामने एक पुरानी देनदारी को लेकर नई चुनौती खड़ी हो गई है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि यस बैंक को तुरंत पूरे ₹8,415 करोड़ का भुगतान करना होगा. 

क्या है ₹8,415 करोड़ का पूरा मामला?

ये मामला साल 2020 का है, जब यस बैंक की वित्तीय हालत बेहद खराब हो गई थी. बैंक के कामकाज और जोखिम प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे थे. हालात इतने बिगड़ गए कि रिजर्व बैंक यानी RBI को हस्तक्षेप करना पड़ा. 5 मार्च 2020 को RBI ने यस बैंक के बोर्ड को अपने नियंत्रण में ले लिया और बैंक पर मोरेटोरियम लगा दिया. इसके तहत जमाकर्ता आम तौर पर अपने खाते से 50,000 रुपये से ज्यादा नहीं निकाल सकते थे. कुछ मामलों में इससे ज्यादा रकम निकालने की छूट थी. बैंक को संकट से निकालने के लिए SBI की अगुवाई में रेस्क्यू प्लान तैयार किया गया. ICICI बैंक , HDFC बैंक, एक्सिस बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक समेत दूसरे वित्तीय संस्थानों ने भी इसमें हिस्सा लिया. इस प्लान के तहत बैंक की वित्तीय स्थिति सुधारने की कोशिश की गई. लेकिन इसी दौरान बैंक के ₹8,415 करोड़ के AT1 बॉन्ड को पूरी तरह बट्टे खाते में डाल दिया गया. यानी इन बॉन्ड में पैसा लगाने वाले निवेशकों की पूरी रकम खत्म कर दी गई.

क्या होते हैं AT1 बॉन्ड?

AT1 बॉन्ड को आसान भाषा में समझें तो ये ऐसे बॉन्ड होते हैं, जिनके जरिए बैंक अपनी पूंजी जुटाते हैं. बैंक इन पर निवेशकों को ब्याज देते हैं. लेकिन सामान्य बॉन्ड के मुकाबले इनमें जोखिम ज्यादा होता है. अगर बैंक की वित्तीय स्थिति गंभीर रूप से बिगड़ती है, तो नियमों और संबंधित शर्तों के तहत इन बॉन्ड को बट्टे खाते में डाला जा सकता है या शेयरों में बदला जा सकता है. इसी ज्यादा जोखिम के कारण इन पर आम तौर पर अपेक्षाकृत ज्यादा ब्याज मिलता है. यस बैंक ने दिसंबर 2016 में 9.5 फीसदी ब्याज दर वाले ₹3,000 करोड़ के AT1 बॉन्ड जारी किए थे. इसके बाद अक्टूबर 2017 में 9 फीसदी ब्याज दर वाले ₹5,415 करोड़ के बॉन्ड जारी किए गए. मार्च 2020 में रिस्ट्रक्चरिंग के दौरान इन दोनों बॉन्ड की कुल ₹8,415 करोड़ की रकम जीरो कर दी गई. इससे म्यूचुअल फंडों, संस्थागत निवेशकों और आम निवेशकों को नुकसान हुआ. कई निवेशकों ने इस फैसले को अदालत में चुनौती दी.

बॉन्ड निवेशकों के पक्ष में क्या बोला सुप्रीम कोर्ट?

23 जनवरी 2023 को बॉम्बे हाई कोर्ट ने AT1 बॉन्ड को बट्टे खाते में डालने के फैसले को रद्द कर दिया था. हाई कोर्ट का कहना था कि बैंक के प्रशासक को ऐसा करने का अधिकार नहीं था. इसके बाद यस बैंक, RBI और केंद्र सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. 15 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने इन अपीलों को खारिज कर दिया. इससे बॉम्बे हाई कोर्ट का फैसला बरकरार रहा. कोर्ट के सामने सवाल यह नहीं था कि AT1 बॉन्ड को किसी भी परिस्थिति में बट्टे खाते में डाला जा सकता है या नहीं. असल सवाल यह था कि क्या यस बैंक के प्रशासक को 2020 की पुनर्गठन योजना के तहत ऐसा करने का अधिकार मिला था. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक, प्रशासक अपने कानूनी अधिकारों से बाहर जाकर कार्रवाई नहीं कर सकता था और पुनर्गठन योजना में बॉन्ड को पूरी तरह बट्टे खाते में डालने का अधिकार नहीं दिया गया था. ये फैसला बॉन्डधारकों के लिए बड़ी राहत है. दूसरी ओर, इससे यस बैंक के सामने वित्तीय और नियामकीय स्तर पर नई चुनौतियां आ सकती हैं.

https://www.newstak.in/business/story/yes-bank-share-fall-supreme-court-at1-bonds-write-off-8415-crore-3553774-2026-10-15

यस बैंक को ₹8,415 करोड़ लौटाने होंगे?

यही इस पूरे मामले का सबसे अहम सवाल है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अर्थ यह नहीं है कि बैंक को तुरंत ₹8,415 करोड़ निवेशकों को लौटाने का आदेश मिल गया है. कोर्ट ने बॉन्ड की शर्तों के अनुसार सालाना ब्याज भुगतान की बात कही है. वहीं, पहले से बकाया रकम और पूरे फैसले को लागू करने के वित्तीय असर का निर्धारण आगे की प्रक्रिया में होना है. इसलिए अभी यह तय होना बाकी है कि बैंक की बैलेंस शीट में इन बॉन्ड को किस तरह दिखाया जाएगा और निवेशकों को भुगतान की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ेगी.

बैंक की पूंजी पर कितना असर?

इस फैसले का असर यस बैंक की पूंजी पर पड़ सकता है. रेटिंग एजेंसियों के अनुमान के मुताबिक, अगर AT1 बॉन्ड को बट्टे खाते में डालने का फैसला पूरी तरह पलटता है, तो बैंक का कॉमन इक्विटी टियर-1 यानी CET1 कैपिटल रेशियो 230 से 300 बेसिस पॉइंट तक घट सकता है. क्रिसिल रेटिंग्स ने इसमें 230 से 250 बेसिस पॉइंट की गिरावट का अनुमान दिया है. ICRA का अनुमान करीब 255 बेसिस पॉइंट और केयर एज रेटिंग्स का अनुमान 250 से 300 बेसिस पॉइंट का है. इन अनुमानों के मुताबिक, बैंक का CET1 रेशियो करीब 11 से 11.5 फीसदी तक आ सकता है, जबकि जून में यह 14 फीसदी था. CET1 बैंक की सबसे मजबूत और अहम पूंजी को दर्शाता है. यह बैंक को अप्रत्याशित नुकसान से बचाने में मदद करती है. इस अनुपात में गिरावट आने पर बैंक के पास वित्तीय झटकों को सहने के लिए उपलब्ध पूंजी का सुरक्षा कवच कमजोर हो सकता है. हालांकि, ये रेटिंग एजेंसियों के अनुमान हैं, बैंक की ओर से पहले ही दर्ज किए जा चुके नुकसान नहीं. असली असर इस बात पर निर्भर करेगा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को कैसे लागू किया जाता है और बैंक इन बॉन्ड का हिसाब किस तरह रखता है.

जापान की SMBC सबसे बड़ी शेयरधारक

यस बैंक की कहानी में एक और बड़ा बदलाव आया है. 2020 में बैंक को बचाने में अहम भूमिका निभाने वाला SBI अब इसका सबसे बड़ा शेयरधारक नहीं है. मई 2025 में जापान के सुमितोमो मित्सुई बैंकिंग कॉरपोरेशन यानी SMBC ने SBI और सात अन्य बैंकों से यस बैंक में करीब 20 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने का समझौता किया था. यह सौदा करीब ₹13,483 करोड़ का था. यस बैंक की वित्त वर्ष 2025-26 की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, 31 मार्च 2026 तक SMBC के पास बैंक की 24.9 फीसदी हिस्सेदारी थी. वहीं, SBI की हिस्सेदारी 10.8 फीसदी थी. SMBC के निवेश से यस बैंक को कॉरपोरेट बैंकिंग, जोखिम प्रबंधन, प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय कारोबार में मदद मिलने की उम्मीद है. लेकिन AT1 बॉन्ड का कानूनी विवाद पहले से चल रहा था. अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इस मामले का वित्तीय असर नए निवेशक के लिए भी अहम हो गया है.