बदलती बस्तर की तस्वीर: नक्सलवाद के साये से निकलकर 'इको-टूरिज्म' और 'संस्कृति' से रचा विकास का नया इतिहास
छत्तीसगढ़ का बस्तर अब नक्सलवाद छोड़ 'इको-टूरिज्म' और अपनी समृद्ध जनजातीय संस्कृति के दम पर विकास की नई इबारत लिख रहा है. होमस्टे नीति, बस्तर 2.0 कनेक्टिविटी और बस्तर पंडुम से बदल रही है क्षेत्र की तस्वीर. पढ़ें पूरी रिपोर्ट.
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छत्तीसगढ़ का बस्तर अब हिंसा और नक्सलवाद के पुराने साये से पूरी तरह बाहर निकलकर एक नई पहचान गढ़ रहा है. घने जंगलों, खूबसूरत झरनों, समृद्ध जनजातीय संस्कृति और हस्तशिल्प से समृद्ध बस्तर आज देश-दुनिया के पर्यटकों के लिए 'अनुभव आधारित पर्यटन' (Experience-Based Tourism) का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभर रहा है. 'बस्तर 2.0' विजन के तहत इस क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर, होमस्टे, कनेक्टिविटी और स्थानीय युवाओं के कौशल विकास पर तेजी से काम किया जा रहा है.
