9 साल बाद फिर एक्टिव हुआ छत्तीसगढ़ का सेक्स सीडी मामला, भूपेश बघेल पर चलेगा ट्रायल

छत्तीसगढ़ के चर्चित सेक्स सीडी मामले में 9 साल बाद बड़ा कानूनी मोड़ आया है. जब विशेष CBI अदालत ने भूपेश बघेल को मिली राहत को रद्द कर ट्रायल का रास्ता साफ कर दिया. इस फैसले के बाद मामला एक बार फिर कोर्ट और राज्य की राजनीति में तीखी बहस का केंद्र बन गया है.

पूर्व सीएम भूपेश बघेल
पूर्व सीएम भूपेश बघेल
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छत्तीसगढ़ की राजनीति में साल 2017 में जबरदस्त हलचल मचाने वाला सेक्स सीडी मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है. लगभग नौ साल पुराने इस विवाद में साल 2026 की शुरुआत में बड़ा कानूनी मोड़ देखने को मिला है. दरअसल रायपुर की विशेष CBI अदालत ने 24 जनवरी 2026 को मजिस्ट्रेट कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को राहत दी गई थी. इस फैसले के बाद अब भूपेश बघेल के खिलाफ केस दोबारा एक्टिव हो गया है और ट्रायल आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है.

यह पूरा मामला साल 2017 में सामने आए एक कथित अश्लील वीडियो से जुड़ा है. उस वक्त दावा किया गया था कि वीडियो में तत्कालीन छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्री राजेश मूणत नजर आ रहे हैं. वीडियो के सामने आते ही राज्य की सियासत गरमा गई थी. आरोप लगे थे कि यह वीडियो किसी निजी वजह से नहीं बल्कि बदनाम करने की साजिश के तहत तैयार किया गया और जानबूझकर फैलाया गया. 

भूपेश बघेल की डिस्चार्ज याचिका खारिज

CBI की विशेष अदालत ने अपने ताजा आदेश में सिर्फ भूपेश बघेल की डिस्चार्ज याचिका को ही खारिज नहीं किया, बल्कि इस मामले में शामिल अन्य आरोपियों कैलाश मुरारका, विनोद वर्मा और विजय भाटिया की अपीलों को भी नामंजूर कर दिया. ये सभी आरोपी ट्रायल कोर्ट में लगाए गए आरोपों को चुनौती दे रहे थे लेकिन कोर्ट ने उनके पक्ष में कोई ठोस आधार नहीं माना. 

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कब हुई थी केस की शुरुआत

इस केस की शुरुआत साल 2016 के अक्टूब में मानी जाती है. उस वक्त वरिष्ठ पत्रकार विनोद वर्मा को उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया गया था. पुलिस ने उनके पास से बड़ी संख्या में सेक्स सीडी बरामद करने का दावा किया था. आरोप था कि इन वीडियो में छेड़छाड़ कर उन्हें राजनीतिक माहौल में फैलाया गया ताकि मंत्री राजेश मूणत की छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके. बाद में राजेश मूणत की शिकायत के आधार पर भूपेश बघेल का नाम भी इस मामले में जुड़ा और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया था.

जांच के बाद सप्लीमेंट्री चार्जशीट

CBI ने मामले की डीटेल से जांच की जिसके बाद मुख्य और सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की थी. जिसमें कुल छह लोगों को आरोपी बनाया गया. जांच के दौरान यह बात भी सामने आई कि गिरफ्तार किए गए पत्रकार विनोद वर्मा उस समय भूपेश बघेल के सलाहकार के रूप में काम कर रहे थे जिससे मामला और ज्यादा संवेदनशील हो गया.

स्पेशल CBI कोर्ट के इस नए फैसले के बाद सेक्स सीडी केस एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी बहस का केंद्र बन गया है. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस केस की सुनवाई न सिर्फ अदालत में बल्कि छत्तीसगढ़ की राजनीति में भी गूंज पैदा कर सकती है.

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